फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   27-year master mind, of 3700 crore scam, Rs 200 crore of Meerut stranded

27 साल का मास्टर माइंड अभिनव, एक क्लिक, 3700 करोड़ का घोटाला

Fri, 10 Feb 2017 07:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अरुण चट्ठा
अमर उजाला ब्यूरो/अरुण चट्ठा Updated Fri, 10 Feb 2017 07:39 PM IST
सार

मेरठ में 42 हजार से अधिक आईडी के जरिये लगी 200 करोड़ से अधिक रकम, यूपी एसटीएफ की कार्रवाई के बाद संकट में फंसी ऐसी कंपनियां, सेंट्रल एक्साइज और डीजीसीईआई से जुड़े आंकड़ों से खुली हकीकत

विज्ञापन
27-year master mind, of 3700 crore scam, Rs 200 crore of Meerut stranded
3w

विस्तार

केस 1- सरधना की अर्चना गुप्ता ने बीते साल सोशल ट्रेडिंग के जरिये 57500 का प्लान खरीदा। रोजाना उनके खाते में 770 रुपये आने शुरू हुए तो उन्होंने अपने साथ 57500 की दो आईडी और जोड़ लीं। उन्हें रोजाना 1540 रुपये मिलने शुरू हो गए। साल में 1.72 लाख रुपये लगाकर 7.50 लाख रुपया मिलने का अंदाजा लगाकर धड़ल्ले से आईडी लगाने का सिलसिला शुरू हुआ और एक साल में 12 लाख रुपये लगा डाले।

विज्ञापन


केस -2 बच्चा पार्क स्थित एक कांप्लेक्स में कंप्यूटर शॉप चलाने वाले राजीव कुमार ने सोशल ट्रेडिंग के जरिये सुनहरे सपने देखे। उन्होंने दोस्त के साथ मिलकर छह माह में करीब 5.50 लाख रुपये सोशल ट्रेडिंग में लगाए।  जिसमें से अभी तक तीन लाख रुपये ही लौटे हैं।

विज्ञापन

घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से मोटी कमाई का लालच देकर सात लाख लोगों से 3700 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने नोएडा के सेक्टर-63 में छापा मारकर फर्जी कंपनी चला रहे मालिक सहित सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने इनके दर्जन भर बैंक खातों में जमा 524 करोड़ रुपये भी जब्त किए हैं। आरोपियों ने धोखाधड़ी की रकम से राजनीति और बॉलीवुड में भी अच्छी पकड़ बना ली थी।

विज्ञापन
विज्ञापन


सोशल ट्रेडिंग में फंसे मेरठ के दो अरब रुपये  
सेंट्रल एक्साइज और डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) से जुड़े आंकड़े बता रहे हैं कि मेरठ और उसके आसपास जिलों के 35 हजार से ज्यादा लोगों ने सोशल ट्रेडिंग कंपनियों में पैसा लगाया है। उनमें से कुछ लोग ऐसे भी है जिन्होंने एक झटके में अमीर होने की हसरत में अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी। एक ही व्यक्ति ने 10 से 20 आईडी तक लगाईं। सेंट्रल एक्साइज से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि करीब 42 हजार से अधिक की आईडी अकेले मेरठ से लगी हैं। जिनके जरिये लोगों ने करीब 200 करोड़ से अधिक की धनराशि लगाई है। जबकि दोनों कंपनियों में करीब सात लाख लोगों ने पैसा लगाया है, जिसमें अधिकांश लोग दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र के हैं। 

‘अमर उजाला’ ने चेताया था
‘अमर उजाला’ ने 28 जनवरी के मेरठ माय सिटी अंक में खुलासा किया था कि बड़ी संख्या में सोशल ट्रेडिंग कंपनियां डीजीसीईआई व अन्य एजेंसियों के रडार पर हैं। सरकारी एजेंसियों ने ऐसी कंपनियों को संदिग्ध मानते हुए जहां अपनी नजरें टेढ़ी कर दी हैं तो जल्द ही एक्शन मोड में हैं।

असली नुकसान इन्हें   
बीते छह माह में जिन लोगों ने बड़ी रकम सोशल ट्रेडिंग के लिए तमाम कंपनियों के खातों में प्लान खरीदने के लिए डाली है, उन सभी के लिए खतरे की घंटी है। क्योंकि अभी तक उनकी पूरी रकम नहीं लौटी है। बताया जा रहा है कि दो अरब में से करीब 140 करोड़ की रकम बीते छह महीने से भी कम समय के अंदर आईडी खरीदने में लोगों ने दोनों कंपनियों को दी है। जिनकी अभी मूल रकम भी नहीं लौटी है। अब जब दोनों कंपनियों पर संकट के बादल हैं तो पैसा डूबने की संभावना बरकरार है। अधिकांश लोगों ने 57,500 रुपये का प्लान खरीदा।


क्या है पूरा मामला 
दो दिन पहले यूपी एसटीएफ ने ऑब्लेज इंफो सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली के चेयरमैन अनुभव मित्तल (27) समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी की। एसटीएफ के अनुसार कंपनी ने सोशल ट्रेड डॉट बिज, फ्रैंजप डॉट कॉम, फ्रीहब डॉट कॉम, इंटमार्ट डॉट कॉम और थ्री डब्ल्यू डॉट कॉम नाम से ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल चलाए हुए थे। नोएडा के दो थानों में इन पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। इन कंपनियों में लोगों ने एक साल का पैक खरीदकर पैसा लगाया था। लेकिन कंपनियों ने पुराने लोगों को पैसा देना बंद कर दिया था। बाद में धोखाधड़ी के आरोप लगे तो शिकायत पर एसटीएफ ने कार्रवाई की।


टैक्स तो लगातार दिया
सेंट्रल एक्साइज के सूत्रों के अनुसार इन दोनों कंपनियों ने दिसंबर महीने में बीती तिमाही का करीब 124 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स दिया। जिसमें से सोशल ट्रेड डॉट बिज ने ही करीब 90 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स अदा किया। 
 

28 जनवरी के अंक में अमर उजाला ने किया था खुलासा

27-year master mind, of 3700 crore scam, Rs 200 crore of Meerut stranded
scam alert

ऑनलाइन नेटवर्किंग कंपनियां डीजीसीईआई के रडार पर   
मेरठ में मिशन डिजिटल इंडिया के नाम पर ऑनलाइन नेटवर्किंग कंपनियों के कुछ लुभावने ऑफर डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) ने संदिग्ध मानते हुए ऐसी कंपनियों पर नजर टेढ़ी कर दी है। शुरुआती जांच में कई कंपनियों का पंजीकरण तक न मिलने से सेंट्रल एक्साइज विभाग सख्त एक्शन की तैयारी में है।

सूत्रों का कहना है कि गाजियाबाद, नोएडा व कुछ अन्य शहरों के पतों पर संचालित हो रहीं ऐसी कंपनियों की ट्रेडिंग प्रथम दृष्टांत संदेहास्पद पाई गई है। ऐसी अधिकांश कंपनियां नोएडा में पंजीकृत हैं। करीब दर्जन भर कंपनियां अब तक ट्रैक की जा चुकी हैं, जिसमें से 40 फीसदी कंपनियों ने ही सेंट्रल एक्साइज विभाग में पंजीकरण कराया है। लेकिन उन्होंने अपना सालाना कारोबार बेहद कम दिखाया है। जबकि बताया जा रहा है कि ऑफर पैक बेचकर कंपनियां एक महीने से अंदर ही करोड़ों रुपया जमा कर रही है। जिससे साफ हो जाता है कि ऐसी कंपनियां अपने कारोबार का बड़ा हिस्सा छिपाकर सर्विस टैक्स की चोरी कर रही है। कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं जिनका अभी तक कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। यानी उन्होंने विभाग से पंजीकरण नंबर ही हासिल नहीं किया है। जिनकी विभाग कुंडली खंगाल रहा है।

क्या हैं ऐसी कंपनियों के प्लान
वेबसाइट देखने और एड को लाइक कर आप रोजाना 60 रुपये से 18 सौ रुपये तक कमा सकते हैं। अगर आप कोई पार्टनर जोड़ते हैं, तो मुनाफा दोगुना हो जाएगा। बशर्ते आपको कंपनी की तरफ से दिया जा रहा पैक खरीदना होगा। जितना बड़ा पैक खरीदेंगे और पार्टनर जोड़ेंगे, उतना ज्यादा लाभ होगा। कंपनियां अपने प्लान में बहुत सारे पैक रखती हैं, जिनकी शुरूआत 5750 से 1.15 लाख या उससे ऊपर तक जाती है। 5750  के पैक में 5000 रुपये पैक का चार्ज होता है, जबकि 750 रुपये सर्विस टैक्स बताया जाता है। जो भी व्यक्ति इस पैक को खरीदता है तो उसे 9 लिंक प्रतिदिन भेजे जाते हैं, जिसमें प्रत्येक लिंक 9 रुपये का होता है। साल के अंदर सिर्फ 255 लिंक ही मिलेंगे। ऐसे में प्रतिदिन के हिसाब से साल में 16063 रुपये मिलेंगे। इसमें भी अगर कोई बूस्टर पोस्ट लेता है तो उसे डेली डबल लिंक मिलेंगे और एक साल में 32130 रुपये प्राप्त होंगे। बूस्टर पोस्ट यानी डबल इनकम में एक निर्धारित अवधि के अंदर दो इस्पांसर जोड़ने होते हैं। एक को राइट साइड व दूसरे के लेफ्ट साइड।

ऐसे होती है भूमिका संदिग्ध
प्रारंभिक जांच में ऐसी कंपनी के गायब होने की जानकारी सेंट्रल एक्साइज को नहीं मिली है। डीजीसीईआई के एक उच्च अधिकारी का कहना है कि जब कोई कंपनी टैक्स चोरी करती है या बिना पंजीकरण संचालित की जाती है, तो उसकी गारंटी नहीं ली जा सकती है कि उसमें लोगों का पैसा डूबेगा नहीं या वो कंपनी बंद नहीं होगी। कोई कंपनी अगर रातोंरात पैसा दोगुना करने का दावा करती है तो उसकी भूमिका संदिग्ध हो जाती है। 

मेरठ में 42 हजार से अधिक आईडी के जरिये लगी 200 करोड़ से अधिक रकम, यूपी एसटीएफ की कार्रवाई के बाद संकट में फंसी ऐसी कंपनियां, सेंट्रल एक्साइज और डीजीसीईआई से जुड़े आंकड़ों से खुली हकीकत
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed