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सड़कें बनाना संबंधित विभागों का काम, अदालत का नहीं: हाईकोर्ट ने कहा-हर बार आदेश का इंतजार क्यों?

Thu, 15 Oct 2026 03:42 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 15 Oct 2026 03:42 PM IST
सार

प्रदेश की बदहाल सड़कों और निर्माण कार्यों में देरी पर हाईकोर्ट ने सरकार, NHAI और बिलासपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। बिलासपुर-रायपुर सड़क के गड्ढे 31 अक्टूबर तक भरने और बड़े निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरे करने का दावा किया गया है।

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work of sloganeer related to building roads, not court: Supreme Court said – why wait for orders every time?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रदेश में सड़कों की खस्ताहाल हालत और निर्माण कार्यों में हो रही देरी पर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और बिलासपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि सड़कें बनाना और उनका रखरखाव करना संबंधित विभागों का मुख्य काम है, अदालत का नहीं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग अपनी ओर से कदम उठाने के बजाय हर बार अदालत के आदेश का इंतजार करते हैं, जो बिल्कुल सही नहीं है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दिवाली के बाद नवंबर में तय की है।
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रखरखाव में लापरवाही पर नाराजगी
बिलासपुर सहित पूरे प्रदेश की जर्जर सड़कों को लेकर उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिकाओं पर लगातार सुनवाई चल रही है। अदालत ने पिछली सुनवाई में कहा था कि सड़कों की बदहाली को लेकर वर्ष 2021 से जनहित याचिका लंबित है और इसके साथ दो अन्य याचिकाओं पर भी विचार हो रहा है। 7 अक्तूबर 2026 को खंडपीठ ने टिप्पणी की थी कि इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश की सड़कों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की हालत विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है। पिछली सुनवाई में नगर निगम की तरफ से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ था, जिस पर अदालत ने गहरी नाराजगी जताते हुए निगम आयुक्त को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होने या प्रतिनिधि भेजने का निर्देश दिया था। बुधवार को निगम के अधिवक्ता ने न्यायालय में पेश होकर मरम्मत कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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विभिन्न परियोजनाओं की धीमी प्रगति
मामले की सुनवाई के दौरान सेंदरी-मोपका बायपास के हस्तांतरण पर स्थिति साफ हुई। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पहले बताया था कि बायपास का संचालन और रखरखाव लोक निर्माण विभाग के बिलासपुर संभाग क्रमांक-1 के पास है, जबकि लोक निर्माण विभाग इसे सौंपने की बात कह रहा था। बुधवार को प्राधिकरण ने अदालत को सूचित किया कि लोक निर्माण विभाग ने बायपास हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज उसी दिन सौंपे हैं। प्राधिकरण ने उच्च न्यायालय को बताया कि बिलासपुर-रायपुर सड़क के गड्ढे 31 अक्तूबर तक भर दिए जाएंगे और बड़े निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरे होंगे। इसके अलावा, रायपुर जाते समय चीफ जस्टिस ने एयरपोर्ट जाने वाले मार्ग पर धनेली से विधानसभा सड़क की बदहाली पर भी संज्ञान लिया था। खंडपीठ ने मुख्य सचिव को 8 अप्रैल 2025 के अदालती आदेश के पालन पर हुई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने को कहा है।
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नगर निगम की रिपोर्ट और कार्ययोजना
बिलासपुर नगर निगम ने शहर की सड़कों की मरम्मत को लेकर उच्च न्यायालय में 78 पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। निगम ने अलग-अलग जोन में पेचवर्क कराने का दावा करते हुए मंगला चौक से आजाद चौक पहुंच मार्ग, कांतिपारा, एसईसीएल मुख्य मार्ग, शनिचरी बाजार, व्यापार विहार, यदुनंदन नगर और सिरगिट्टी सहित अनेक इलाकों में कराए गए कार्यों का ब्योरा दिया। रिपोर्ट में काम से पहले और बाद की तस्वीरें भी जोड़ी गई हैं। निगम ने बताया कि शहर में गड्ढे भरने का काम चल रहा है और जल्द डामरीकरण शुरू होगा। मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत स्वीकृत नई सड़कों का निर्माण भी शुरू कराया जाएगा। डामर की कीमतें बढ़ने से काम प्रभावित होने की बात पर राज्य सरकार ने दो-तीन दिन में अंतिम निर्णय लेने की जानकारी दी।
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