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क्या सब पर भारी पड़ेंगे युवा मतदाता?
Updated Sat, 05 Apr 2014 09:24 AM IST
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क्या पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान आपने अपनी फ़ेसबुक वॉल पर किसी राजनीतिक मसले पर बहस की थी, किसी नेता को ट्विटर पर फ़ॉलो किया था या आप फ़ेसबुक और ट्विटर पर सक्रिय थे भी?
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इन सवालों के ज़्यादातर लोगों के जवाब न में होंगे।
मगर ज़रा इस चुनाव पर नज़र डालिए। फ़ेसबुक, ट्विटर, यू-ट्यूब या वॉट्सऐप इस नेता नगरी के चर्चे कहाँ नहीं हैं!
इन सभी क्लिक करें सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सबसे ज़्यादा सक्रिय वर्ग है 18 से 35 साल के लोगों का।
इसी 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग में मौजूद है वो क्लिक करें युवा मतदाता जिसकी चर्चा आपने पिछले दिनों शायद हर नेता के भाषण में सुनी भी होगी।
क्या ये युवा मतदाता जाति, संप्रदाय, क्षेत्र का दायरा तोड़कर मतदान करेगा या क्या वो भी उन्हीं बंधनों का शिकार है?
कैंपस हैंगआउट
चुनाव के ऐलान से पहले से ही ये सवाल हमारे मन में भी थे और इन चुनाव में ऐसे सवालों के जवाब समझने की कोशिश कर रही है बीबीसी हिंदी ‘बीबीसी कैंपस हैंगआउट’ कार्यक्रम के ज़रिए।
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एक कार्यक्रम जो विश्वविद्यालयों में पहुँचकर युवाओं के मन में झाँकने की कोशिश करने जा रहा है। इस कोशिश में हमारे और आपके बीच की प्रमुख कड़ी बनने वाला है ये क्लिक करें सोशल मीडिया।
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हम चाहते थे हर ऐसे शहर पहुँचना जहाँ सामान्य मीडिया की चकाचौंध नहीं पहुँच पाती मगर सीमित समय और संसाधनों के साथ ऐसा करना संभव नहीं था। इसे देखते हुए हमने देश के अलग-अलग हिस्सों से छह शहर चुने जो इन युवाओं की बात सामने रख सकें।
कार्यक्रम की शुरुआत हो रही है चार अप्रैल को बस्तर विश्वविद्यालय से। साल 2008 में स्थापित हुआ बस्तर विश्वविद्यालय जगदलपुर में स्थित है और यहाँ के आदिवासी समाज के लोगों के बीच उच्च शिक्षा के एक केंद्र के रूप में इसे विकसित करने की कोशिश हो रही है।
एक ऐसा क्षेत्र जिसकी अब पहचान बन गई है नक्सली हिंसा। बीबीसी हिंदी ने संघर्ष के उस केंद्र में स्थापित विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से बात करने की ठानी।
जुड़िए इस कार्यक्रम से
बस्तर विश्वविद्यालय में ‘बीबीसी कैंपस हैंगआउट’ में चर्चा का विषय है आदिवासियों के हितों और उनके प्रति सामाजिक नज़रिए से जुड़ा। ये कार्यक्रम गूगल हैंगआउट के ज़रिए सीधे बीबीसी हिंदी के यू-ट्यूब पेज क्लिक करें (http://www।youtube।com/user/bbchindi) पर दोपहर एक बजे से दो बजे तक लाइव देखा जा सकेगा।
आप इस कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर भी रख सकते हैं, जहाँ इस कार्यक्रम का लाइव अपडेट हम आप तक पहुँचाएँगे।
आप अगर इस कार्यक्रम में अपनी बात रखना चाहते हैं तो हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर या ट्विटर पर #CampusHangout और #Election2014 का इस्तेमाल करते हुए विचार व्यक्त करिए।
इसके बाद 11 अप्रैल को बंगलौर के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ़ इंडिया यूनिवर्सिटी, 18 अप्रैल को अहमदाबाद के गुजरात विद्यापीठ, 25 अप्रैल को श्रीनगर के कश्मीर विश्वविद्यालय, दो मई को मुज़फ़्फ़रपुर के भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय और नौ मई को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में ये कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।