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Balod: पहली बारिश में खुला, स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में भरा पानी; 35 लाख का हुआ था खर्च

Thu, 18 Jul 2024 01:51 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: श्याम जी. Updated Thu, 18 Jul 2024 01:51 PM IST
सार

बालोद में कन्नेवाड़ा स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के पुराने भवन को तोड़कर लगभग 35 लाख की लागत से संधारण किया गया है। इसके बाद भी छत से पानी टपक रहा है। साथी ही कमरों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

 

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Water leakage in Swami Atmanand English Medium School in Balod
पानी का रिसाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार


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बालोद जिले का कन्नेवाड़ा स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय जिसके पुराने भवन को तोड़कर लगभग 35 लाख की लागत से संधारण किया गया है। छत को तोड़कर नई छत बनायी गई है। भवन बनकर तैयार तो हुआ है, लेकिन इसका हैंडओवर नहीं हो पाया है और जगह की कमी की वजह से बच्चों को उस संधारित भवन में बैठाया जा रहा है। इस भवन ने पहली ही बारिश में जवाब दे दिया। दीवारों से पानी का रिसाव होने लगा है, खिड़कियों के दीवारों से झरनों की तरह पानी गिरता है और फर्श पर भी पानी भरा रहता है, जिससे स्कूली बच्चे काफी परेशान हैं।

नौवीं कक्षा के छात्र जयदीप देवांगन ने बताया कि नए भवन में हमें बैठाया गया, लेकिन जब एक दिन बारिश हुई तो पूरा पानी सीपेज होकर फर्श पर भर गया, जिसके कारण हमें पुस्तक-कापी के भीगने का डर है और तो और कमरा कीचड़ से भर आता है। इसके चलते फिसलने का डर बना रहता है। साथ ही छात्र गुलशन ने बताया कि अभी तो बारिश के मौसम की शुरुआत है और आने वाले समय में यह बारिश तेज भी होगी तो पूरी बारिश यदि हमें इसी कक्षा में गुजरना पड़ा तो हमें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अच्छे से विद्यालय में संधारण का कार्य नहीं किया गया है, जिसके कारण छात्र-छात्राएं काफी परेशान हैं। 
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30 से 35 लाख की लागत से हुआ काम
विद्यालय की प्राचार्य कविता वानखेड़े जो कि छुट्टी पर थीं, उन्होंने फोन के माध्यम से भवन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह संधारण का कार्य है, जिसके लिए दुर्गा के एक ठेकेदार इसका नाम सत्य प्रकाश शुक्ला को ठेका दिया गया था। ठेके का कार्य ऊपर से हुआ था और जब हमने निर्माण कार्य संबंधित बोर्ड लगाने की बात की तो ठेकेदार ने बोर्ड लगाने से मना कर दिया। वहीं, प्राचार्य ने कहा कि अब तक जलभराव जैसी स्थिति तो हमने देखी नहीं है। प्राचार्य कविता वानखेड़े ने बताया कि पहले ठेकेदार द्वारा 35 लाख की लागत बताई गई थी, जिसके बाद अब ठेकेदार द्वारा इस 30 लाख रुपये खर्च बताया जा रहा है। बिल्डिंग को हैंडओवर नहीं किया गया है, पर बच्चों की व्यवस्था के लिए उन्हें बैठाया जा रहा है। 
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जानें क्या कहा प्रशासन ने
मामले में अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक ने बताया कि यदि इस मामले में हैंड ओवर नहीं किया गया है तो फिर पूरे भवन को दुरुस्त करने का काम किया जाएगा। भवन दुरुस्त होने के बाद भी उसे हैंड ओवर लिया जाएगा और जब तक पूरी तरह संतुष्टि नहीं मिल जाती ठेकेदार का पेमेंट भी रोक दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ा हुआ सवाल है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देव के माध्यम से प्रतिवेदन भी लिया जाएगा।
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