इमरजेंसी में इंदिरा से भी आगे हो गए थे वीसी शुक्ल
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आज मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के पूर्व वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय मंत्री वीसी शुक्ल का जन्मदिन है। दो साल पहले झीरम घाटी में नक्सलियों की गोली का निशाना बने वीसी शुक्ल के बारे में कहा जाता है कि कभी इमरजेंसी के दौर में वह इंदिरा गांधी से भी आगे हो गए थे। जानिए वीसी शुक्ल के बारे में कुछ ऐसी बातें जो आपने पहले न सुनी हों।
दो अगस्त 1929 को अविभाजित मध्यप्रदेश के रायपुर में जन्मे विधाचरण शुक्ल को राजनीति विरासत में मिली थी। उनके पिता पंडित रविशंकर शुक्ल मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे। बाद में उनके भाई श्यामाचरण शुक्ल भी तीन बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सारी राजनीति शुक्ल परिवार के इर्द गिर्द ही घूमती थी। बाद में छत्तीसगढ़ के विभाजन के बाद शुक्ल ने इस नए राज्य को अपनी कार्यस्थली बना लिया। हालांकि उनकी पहचान इन सबसे अलग 'इमरजेंसी वाले शुक्ल' की रही।
इमरजेंसी में कहलाए थे तानाशाह
जब इंदिरा गांधी ने कानून को थामकर देशभर में इमरजेंसी की घोषणा की तो इसका झंडा उनके बेटे संजय गांधी सहित विधाचरण शुक्ल जैसे नेताओं ने थामा। विधाचरण शुक्ल उस समय सूचना एवं प्रसारण मंत्री थी।
ऐसे में उन्होंने सबसे पहले प्रेस पर ही सेंसरशिप का डंडा चलाया। हालांकि उस समय इलेक्ट्रोनिक मीडिया तो नग्णय ही था लेकिन शुक्ल ने प्रिंट मीडिया पर भी पाबंदी लगाने में कसर नहीं छोड़ी।
आलम ये था कि शुक्ल जो चाहते वो करते। उनकी हिटलरशाही का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि उन्होंने सरकार के पक्ष में न गाने पर मशहूर गायक किशोर कुमार पर पाबंदी लगा दी थी।
इमरजेंसी के बाद जनता पार्टी की सरकार के दौरान शुक्ल के कार्यों की जांच के लिए बने शाह आयोग ने उनकी जमकर आलोचना की थी। आयोग ने उन्हें तानाशाह तक बता दिया था। राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान वीसी शुक्ल का कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों के कार्यालय में सीधा दखल रहता था।
झीरम घाटी में बन गए थे नक्सलियों की गोलियों का निशाना
इसके अलग उनकी पहचान राजसी ठाठ बाट के कारण भी थी। अपनी डैशिंग पर्सनलिटी और पहनावे की वजह से वह हमेशा चर्चा में रहते थे। खासकर अपनी गाड़ियों को लेकर तो वीसी हमेशा चर्चा में रहते थे।
बताया जाता है कि उस दौर में उनके पास बीएमडब्लू, मर्सीडीज और लैंड रोवर जैसी गाड़ियां होती थी जब लोगों ने एंबेसेडर के अलावा किसी और गाड़ी का नाम भी नहीं सुना होगा। जिंदगी भर राजनीति को अपने दम पर चलाने वाले वीसी शुक्ल की जिंदगी का अंत हालांकि काफी त्रासद पूर्ण रहा।
जब दो साल पहले झीरम घाटी हमले में उन्हें भी कांग्रेस के अन्य नेताओं की तरह नक्सलियों ने अपना निशाना बना लिया था। बाद में गुडगांव के मेदांता अस्पताल में कई दिन जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया था।