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छत्तीसगढ़: मंत्रालय में नौकरी के नाम पर दो बहनों से लाखों की ठगी, फर्जी सील बरामद

Sat, 03 Oct 2026 07:07 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sat, 03 Oct 2026 07:07 PM IST
सार

आरोपी ने स्वयं को मंत्रालय के वित्त विभाग में पदस्थ अधीक्षक बताकर सीधी भर्ती का झांसा दिया और एक ही परिवार की दो बहनों से लाखों रुपये ऐंठ लिए।

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Two sisters duped of lakhs in the name of job in ministry, fake seal recovered in Chhattisgarh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के मंत्रालय में फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर अधिकारी पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोपी ने स्वयं को मंत्रालय के वित्त विभाग में पदस्थ अधीक्षक बताकर सीधी भर्ती का झांसा दिया और एक ही परिवार की दो बहनों से लाखों रुपये ऐंठ लिए।
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शिकायत मिलने के बाद राखी थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की शुरुआती पड़ताल में पता चला है कि आरोपी ने केवल एक परिवार ही नहीं, बल्कि कई युवक-युवतियों को सरकारी नौकरी का झूठा आश्वासन देकर अपना शिकार बनाया है। पुलिस ने आरोपी के पास से शासन के उच्च अधिकारियों के नाम वाली कई फर्जी सील भी बरामद की हैं, जिनमें सचिव भुवनेश यादव की सील भी शामिल है।
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भर्ती का झांसा देकर लाखों की मांग
जांच के अनुसार रायगढ़ जिले की रहने वाली प्रांजल आचार्य को उनके रिश्तेदार प्रदीप पांडा ने संपर्क कर खुद को छत्तीसगढ़ मंत्रालय के वित्त विभाग का अधीक्षक बताया। आरोपी ने प्रांजल को झांसा दिया कि वह उसकी लेखा अधिकारी के पद पर सीधी भर्ती करवा सकता है। इस काम के बदले आरोपी ने पांच लाख रुपये की मांग की। इसके बाद प्रांजल ने अपनी बहन प्रियंका की नौकरी के बारे में भी बात की। आरोपी ने प्रियंका को कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया और इसके लिए साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की। सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद में दोनों बहनों ने आरोपी को किस्तों में रकम देनी शुरू कर दी। ठग के झांसे में आकर पीड़ितों ने अपने सोने के गहने बेचकर आरोपी को 1,50,000 रुपये दिए। इसके बाद आरोपी ने पीड़ितों का भरोसा कायम रखने के लिए फर्जी भर्ती विज्ञापन और कुछ समय बाद फर्जी नियुक्ति पत्र भी भेज दिया।
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महानदी भवन के सामने ली नकद रकम
फर्जी नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवती को विश्वास हो गया कि उसकी भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसी भरोसे के आधार पर वह 6 अगस्त को रायपुर पहुंची। आरोपी ने उसे मिलने के लिए महानदी भवन के सामने बुलाया और वहां उससे 20,000 रुपये नकद ले लिए। इसके बाद भी आरोपी ने काम पूरा करने का बहाना बनाकर अलग-अलग किस्तों में लगभग 50,000 रुपये और ऐंठ लिए। लंबी अवधि बीत जाने और बार-बार रुपये देने के बाद भी जब नौकरी नहीं लगी तो पीड़िता को ठगी का संदेह हुआ। ठगे जाने का अहसास होने पर उन्होंने पुलिस से संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत की।


फर्जी मोहरों के साथ जांच में जुटी पुलिस
राखी थाना पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी मंत्रालय के अधिकारी के रूप में खुद को पेश करता था और इसी पहचान के आधार पर बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का भरोसा देता था। पुलिस को आरोपी के पास से फर्जी दस्तावेज और उच्च अधिकारियों के नाम वाली फर्जी मोहरें मिली हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कितने लोगों से नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी की है और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में उसका सहयोग करने वाले अन्य लोग कौन हैं। इसके अलावा पुलिस आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों का भी परीक्षण कर रही है।
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