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Balrampur: विधायक के कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र विवाद पर आदिवासी समाज खफा, प्रशासन पर पक्षपात का आरोप

Thu, 27 Nov 2025 06:51 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 27 Nov 2025 06:51 PM IST
सार

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लगातार तारीखें बढ़ाकर मामले को जानबूझकर लंबित किया जा रहा है, जिससे प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गुरुवार को आदिवासी समाज के लोग पहले राष्ट्रीय राजमार्ग 343 पर धरने पर बैठे, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।

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Tribal community upset over MLA s alleged fake caste certificate controversy
प्रदर्शन करते लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र के मामले में जांच में हो रही देरी को लेकर आदिवासी समाज का गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा है। गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्टर कार्यालय के सामने सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया और प्रशासन पर पक्षपात का गंभीर आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आम नागरिकों के लिए साधारण जाति प्रमाणपत्र बनवाना भी अत्यंत कठिन हो गया है। अधिकारियों द्वारा मांगे जाने वाले तरह-तरह के दस्तावेज और जटिल प्रक्रियाएं आम लोगों को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पर मजबूर करती हैं। इसके विपरीत, समाज का आरोप है कि एक जन प्रतिनिधि के विवादित जाति प्रमाणपत्र को निरस्त करने में प्रशासन जानबूझकर देरी कर रहा है।

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आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि छानबीन समिति द्वारा विधायक की उपस्थिति के लिए गुरुवार को अंतिम तिथि निर्धारित थी। इस महत्वपूर्ण तिथि पर भी समिति द्वारा मामले को आगे बढ़ा देना लोगों के आक्रोश का एक प्रमुख कारण बना। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लगातार तारीखें बढ़ाकर मामले को जानबूझकर लंबित किया जा रहा है, जिससे प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गुरुवार को आदिवासी समाज के लोग पहले राष्ट्रीय राजमार्ग 343 पर धरने पर बैठे, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। इसके बाद, प्रदर्शनकारी कलेक्टर कार्यालय के सामने जमा हो गए, जहां उन्होंने "जिला प्रशासन होश में आओ", "प्रतापपुर विधायक हटाओ", "आदिवासी समाज बचाओ" जैसे नारे लगाते हुए उग्र प्रदर्शन जारी रखा।
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सूचना मिलते ही अपर कलेक्टर, एसडीएम सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। हालांकि, प्रदर्शनकारी अपने रुख पर अडिग रहे और काफी देर तक हंगामा चलता रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार चल रही है और सभी दस्तावेजों व तथ्यों का गहन परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने अगली सुनवाई की तिथि 11 दिसंबर निर्धारित की है। इसके बावजूद, आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि जब तक मामले का त्वरित, पारदर्शी और निष्पक्ष निर्णय नहीं हो जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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