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कोंडागांव: आमाबेड़ा में हुई घटना के विरोध में बंद का दिखा असर,अधिकांश दुकानें रहीं बंद
Wed, 24 Dec 2025 02:48 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव
अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव
Published by: Digvijay Singh
Updated Wed, 24 Dec 2025 02:48 PM IST
सार
जनजातीय आस्था पर हो रहे कथित हमलों और कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में हुई घटना के विरोध में 24 दिसंबर को सर्व समाज, छत्तीसगढ़ के आह्वान पर प्रदेशव्यापी छत्तीसगढ़ बंद का व्यापक असर देखने को मिला।
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बंद का दिखा असर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जनजातीय आस्था पर हो रहे कथित हमलों और कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में हुई घटना के विरोध में 24 दिसंबर को सर्व समाज, छत्तीसगढ़ के आह्वान पर प्रदेशव्यापी छत्तीसगढ़ बंद का व्यापक असर देखने को मिला। कोंडागांव जिले में बंद का प्रभाव सुबह से ही नजर आया, जहां शहर की अधिकांश दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बाजार स्वस्फूर्त रूप से बंद रहे। सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में आवाजाही कम दिखी और माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। सर्व समाज ने स्पष्ट किया कि यह बंद पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में आयोजित किया गया है। बंद के दौरान आवश्यक सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं, वहीं प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
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कोंडागांव में सुबह से ही सर्व समाज के लोगों ने बाइक रैली निकालकर बंद का संदेश दिया, जिसका व्यापारियों और आम नागरिकों ने समर्थन किया। सर्व समाज का कहना है कि आमाबेड़ा क्षेत्र में पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत अधिसूचित जनजातीय इलाके में ग्राम सभा और जनजातीय परंपराओं की अनदेखी कर शव दफन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के बावजूद प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि बाहरी संगठनों की संगठित सक्रियता, प्रशासनिक पक्षपात और पुलिस बल के अत्यधिक प्रयोग से स्थिति और बिगड़ी, जिससे जनजातीय समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया। इन्हीं मुद्दों को लेकर कोंडागांव के चौपाटी मैदान में सर्व समाज द्वारा आम सभा आयोजित की गई, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।
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सभा में वक्ताओं ने जनजातीय आस्था की रक्षा, धर्मांतरण पर प्रभावी रोक और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए महात्मा गांधी वार्ड स्कूल मैदान पहुंची, जहां कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। सर्व समाज की प्रमुख मांगों में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक का सख्ती से क्रियान्वयन, आमाबेड़ा प्रकरण की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और ग्रामीणों पर दर्ज मामलों को निरस्त करना शामिल है। बंद के दौरान शहर का बंद बाजार और शांत सड़कें जनजातीय समाज के आक्रोश और एकजुटता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
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