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'फिर ये कैसी आजादी': स्वतंत्रता दिवस पर SC सरपंच का किया गया 'शुद्धिकरण', जातिगत अपमान का आरोप, जांच की मांग

Wed, 19 Aug 2026 03:12 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 19 Aug 2026 03:12 PM IST
सार

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान निर्वाचित सरपंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ का मामला सामने आया है। सरपंच नीलमणि रात्रे ने जातिगत भेदभाव और सार्वजनिक अपमान का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की है।

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SC Sarpanch 'purified' on Independence Day, accused of caste-based insult, demand for investigation in CG
SC सरपंच ने ‘शुद्धिकरण’ का आरोप लगाकर मांगी कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वतंत्रता दिवस पर जहां पूरा देश समानता, आजादी और संविधान के मूल्यों का जश्न मना रहा था, वहीं ग्राम किसड़ी में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले निर्वाचित सरपंच नीलमणि रात्रे ने आरोप लगाया है कि समारोह के दौरान मंत्रोच्चार के बीच उनके ऊपर तुलसी पानी का छिड़काव कर कथित तौर पर 'शुद्धिकरण' किया गया। सरपंच ने इसे जातिगत भेदभाव और सार्वजनिक अपमान बताते हुए पुलिस में लिखित शिकायत देकर एफआईआर और निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों को साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किए जाने का भी उल्लेख है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का बयान सामने आना बाकी है।
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पूरा मामला छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत किसड़ी का है। गांव में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले निर्वाचित सरपंच नीलमणि रात्रे के साथ कथित जातिगत भेदभाव और सार्वजनिक अपमान का मामला सामने आया है। सरपंच ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम के दौरान उनके ऊपर मंत्रोच्चार करते हुए तुलसी पानी का छिड़काव कर 'शुद्धिकरण' किया गया। घटना का वीडियो उपलब्ध होने का दावा भी आवेदन में किया गया है।
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सरपंच नीलमणि रात्रे ने 18 अगस्त 2026 को थाना प्रभारी, बलौदा, तहसील सरायपाली, जिला महासमुंद को लिखित शिकायत देकर मामले में एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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शिकायत के अनुसार, 15 अगस्त को ग्राम पंचायत किसड़ी में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधि, ग्रामीण और स्थानीय स्कूल के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद थे। सरपंच का आरोप है कि पूजा-अर्चना के दौरान ग्राम पंचायत सचिव पृथ्वीराज भोई और स्कूल के व्याख्याता किशोर रथ ने आपस में 'शुद्धिकरण' की बात की और इसके बाद मंत्रोच्चार करते हुए उनके ऊपर तुलसी पानी का छिड़काव किया। उन्होंने कहा है कि किसड़ी में स्वतंत्रता दिवस और अन्य ध्वजारोहण कार्यक्रमों में इस तरह की कोई परंपरा पहले नहीं रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जातिगत पहचान के कारण उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है और 15 अगस्त की घटना उसी कथित उत्पीड़न का हिस्सा है।

एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
सरपंच ने शिकायत में किशोर रथ, पृथ्वीराज भोई सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम समेत अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने उपलब्ध वीडियो को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित करने और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने का भी अनुरोध किया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना में कुछ पंचों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाए। सरपंच ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने के साथ भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।

वीडियो और गवाहों का हवाला
आवेदन के साथ घटना का वीडियो और फोटो साक्ष्य पेन ड्राइव में उपलब्ध कराने और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की सूची संलग्न करने की बात कही गई है। शिकायत में शौकीलाल नायक, विजय रात्रे, केदार महापात्रा, अलेख साहू, उग्रसेन नायक, दुतिया रात्रे, मोहन लाल रात्रे और पंचम रात्रे के नाम गवाहों के रूप में दिए गए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता संजीत ने उठाए सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता संजीत बर्मन ने इस घटना को सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरपंच नीलमणि रात्रे के साथ घटित जातिवादी घटना ने केंद्र और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के सारे दावे को ध्वस्त कर दिया है जो कि 'सबका साथ सबका विकास' करना सरकार की मूल ध्येय वाक्य रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत देश की राजनीति में प्रभावशाली नेता कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हो या उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हो या फिर उत्तर प्रदेश के कथावाचक संत सिंह यादव एवं मुकुट मणि यादव हो या छत्तीसगढ़ के कथा वाचक यामिनी साहू हो या छत्तीसगढ़ के पशु व्यापारी धमतरी निवासी देवप्रकाश सतीश साहू, बलराम साहू हो या फिर महासमुंद जिला के अंतिम छोर में बसा गांव किसड़ी का निवासी नीलमणि रात्रे जी हो इन सब का शुद्धिकरण और जाति के नाम पर अपमान हिंदू धर्म के अनुयायियों की ओर से ही किया गया है।


उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत किसड़ी में सामान्य सीट से सरपंच चुनाव जीतने के बाद से अनुसूचित जाति वर्ग का नीलमणि रात्रे को लगातार परेशान किया जा रहा है। उनके मनोबल को तोड़ने के लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जा रहा है। उन्हें शुद्धिकरण करने के लिए मंत्रोच्चार किया जा रहा है। तुलसी पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
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