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69 की उम्र में रावण को रिटायर नहीं होने देना चाहते प्रशंसक
अमर उजाला
Updated Mon, 07 Oct 2013 03:24 PM IST
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यह हैं छत्तीसगढ़ के राम, पूरा नाम संतराम। उम्र 69 साल और काम हर साल रामलीला में रावण का किरदार निभाना। बलौदाबाजार निवासी संतराम जायसवाल पिछले 48 सालों से रामलीला में रावण का रोल निभा रहे हैं।
दो साल पहले संतराम ने दुर्गा उत्सव समिति से अनुरोध किया कि मेरी उम्र हो गई है इसलिए अब मुझे इस काम से छुट्टी दो। लेकिन उनके दमदार किरदार को देखते हुए समिति ने उन्हें 67 की उम्र में फिर रावण बनने के लिए राजी कर लिया।
रावण बन गई पहचान
नाम में भले ही राम हो लेकिन संतराम की पहचान उनके रावण बनने से है। लोग उन्हें इतना पसंद करते हैं कि रामलीला के दौरान राम से ज्यादा रावण के संवादों पर ज्यादा तालियां और सीटियां बजती हैं।
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69 की उम्र में फिर रावण बने राम
समिति और लोगों के प्यार को देखते हुए संतराम पिछले दो सालों से फिर से रावण का किरदार निभा रहे हैं। इस साल फिर से रामलीला शुरू हो गई है। तैयारियां पूरी हैं और संतराम रावण बनकर अपना किरदार निभाने के लिए तत्पर बैठे हैं।
परिजनों को भी पसंद हैं रावण
संतराम जायसवाल के परिवार में 23 लोग हैं। परिवार के किसी भी व्यक्ति को उनके रावण बनने पर आपत्ति नहीं है। उल्टा उनके परिवार को उनका किरदार बेहद पसंद है। जब वे रावण बनते हैं, तो कई लोग पूजा करते हैं।
राम छूते हैं पैर
रावण काफी बुजुर्ग हैं। जो भी व्यक्ति राम का किरदार निभाता है, वह अक्सर बदल भी जाता है। वह छोटा भी होता है। इस नाते जब वह संतराम से मिलता है, तो आशीर्वाद भी लेता है और संतराम यानी रावण उन्हें रावण के किरदार के बारे में समझाता है और गुर देता है। स्थिति यह है कि अगर कोई अनजान व्यक्ति संतराम जायसवाल का घर पूछे, तो शायद जवाब मिलने में देरी हो। पर रावण का पता पूछते ही लोग उनके घर तक छोड़कर आते हैं।
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दो साल पहले संतराम ने दुर्गा उत्सव समिति से अनुरोध किया कि मेरी उम्र हो गई है इसलिए अब मुझे इस काम से छुट्टी दो। लेकिन उनके दमदार किरदार को देखते हुए समिति ने उन्हें 67 की उम्र में फिर रावण बनने के लिए राजी कर लिया।
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रावण बन गई पहचान
नाम में भले ही राम हो लेकिन संतराम की पहचान उनके रावण बनने से है। लोग उन्हें इतना पसंद करते हैं कि रामलीला के दौरान राम से ज्यादा रावण के संवादों पर ज्यादा तालियां और सीटियां बजती हैं।
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69 की उम्र में फिर रावण बने राम
समिति और लोगों के प्यार को देखते हुए संतराम पिछले दो सालों से फिर से रावण का किरदार निभा रहे हैं। इस साल फिर से रामलीला शुरू हो गई है। तैयारियां पूरी हैं और संतराम रावण बनकर अपना किरदार निभाने के लिए तत्पर बैठे हैं।
परिजनों को भी पसंद हैं रावण
संतराम जायसवाल के परिवार में 23 लोग हैं। परिवार के किसी भी व्यक्ति को उनके रावण बनने पर आपत्ति नहीं है। उल्टा उनके परिवार को उनका किरदार बेहद पसंद है। जब वे रावण बनते हैं, तो कई लोग पूजा करते हैं।
राम छूते हैं पैर
रावण काफी बुजुर्ग हैं। जो भी व्यक्ति राम का किरदार निभाता है, वह अक्सर बदल भी जाता है। वह छोटा भी होता है। इस नाते जब वह संतराम से मिलता है, तो आशीर्वाद भी लेता है और संतराम यानी रावण उन्हें रावण के किरदार के बारे में समझाता है और गुर देता है। स्थिति यह है कि अगर कोई अनजान व्यक्ति संतराम जायसवाल का घर पूछे, तो शायद जवाब मिलने में देरी हो। पर रावण का पता पूछते ही लोग उनके घर तक छोड़कर आते हैं।