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सीजी: नक्सलवाद मुक्त बस्तर में विकास और पुनर्वास का संकल्प, 768 दिव्यांगजन लाभान्वित
Thu, 15 Oct 2026 07:33 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 15 Oct 2026 07:33 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दंतेवाड़ा में कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद पीड़ितों का पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन देना सरकार की जिम्मेदारी है। 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए जाएंगे।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सीएम विष्णुदेव साय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाना और उन्हें सम्मानपूर्ण जीवन देना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष की जनसेवा के उपलक्ष्य में दंतेवाड़ा में आयोजित निशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर नक्सल हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है।
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्तूबर तक तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण दिए जाएंगे। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के सहयोग से हो रहा है। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, जो अब पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्ति मिली है। उन्होंने बस्तर को देश का सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाने का लक्ष्य बताया।
विकास और पुनर्वास की व्यापक पहल
गृह मंत्री शाह ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में स्थानीय जनजातीय समाज के सहयोग की सराहना की। उन्होंने बताया कि 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनके लिए बैंक खाते, इनामी राशि, प्रोत्साहन, नौकरी और भूमि आवंटन जैसी पहलें की गई हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास दिए गए और 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण मिला। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ‘नियद नेल्लानार’ योजना से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुंचा रही है। 500 से अधिक गांवों में सड़क, बिजली, नल से जल और दूरसंचार सुविधाएं पहुंची हैं। 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।
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सुरक्षा शिविर बनेंगे सेवा डेरा
गृह मंत्री शाह ने घोषणा की कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक अब ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ बनेंगे। ये शिविर अब सेवा और विकास के केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि इन केंद्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियां संचालित होंगी। शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू हुआ है, जहां सिलाई-कढ़ाई और इमली पैकेजिंग जैसे कार्य हो रहे हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास का अभियान जारी रहेगा।
कृषि और आजीविका को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के साथ कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका को प्राथमिकता दे रही है। परिवारों को दो-दो गाएं दी जा रही हैं और डेयरी विकास पर भी काम हो रहा है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में दो हजार करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं से 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को लाभ मिलेगा। दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना और चंद्रैया सपका जैसे लाभार्थियों ने कृत्रिम अंग मिलने पर खुशी व्यक्त की।
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दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्तूबर तक तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण दिए जाएंगे। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के सहयोग से हो रहा है। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, जो अब पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्ति मिली है। उन्होंने बस्तर को देश का सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाने का लक्ष्य बताया।
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विकास और पुनर्वास की व्यापक पहल
गृह मंत्री शाह ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में स्थानीय जनजातीय समाज के सहयोग की सराहना की। उन्होंने बताया कि 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनके लिए बैंक खाते, इनामी राशि, प्रोत्साहन, नौकरी और भूमि आवंटन जैसी पहलें की गई हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास दिए गए और 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण मिला। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ‘नियद नेल्लानार’ योजना से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुंचा रही है। 500 से अधिक गांवों में सड़क, बिजली, नल से जल और दूरसंचार सुविधाएं पहुंची हैं। 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।
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सुरक्षा शिविर बनेंगे सेवा डेरा
गृह मंत्री शाह ने घोषणा की कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक अब ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ बनेंगे। ये शिविर अब सेवा और विकास के केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि इन केंद्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियां संचालित होंगी। शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू हुआ है, जहां सिलाई-कढ़ाई और इमली पैकेजिंग जैसे कार्य हो रहे हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास का अभियान जारी रहेगा।
कृषि और आजीविका को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के साथ कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका को प्राथमिकता दे रही है। परिवारों को दो-दो गाएं दी जा रही हैं और डेयरी विकास पर भी काम हो रहा है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में दो हजार करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं से 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को लाभ मिलेगा। दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना और चंद्रैया सपका जैसे लाभार्थियों ने कृत्रिम अंग मिलने पर खुशी व्यक्त की।