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मासूमों की सब्जी में फिनाइल: HC ने कहा- अनहोनी होती तो संभालना मुश्किल, मुख्य सचिव से शपथपत्र में मांगा जवाब

Tue, 26 Aug 2025 08:28 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा
अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 26 Aug 2025 08:28 PM IST
सार

सुकमा जिले के पाकेला पोटाकेबिन विद्यालय में बच्चों की थाली में जहर परोसने की साजिश का खुलासा हुआ है। यहां 426 छात्रों के लिए तैयार की गई 48 किलो सब्जी में फिनाइल मिला पाया गया।

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Phenyl in the vegetable of innocent children HC said if something untoward had happened then it would have bee
मासूमों की सब्जी में फिनाइल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुकमा जिले के पाकेला पोटाकेबिन विद्यालय में बच्चों की थाली में जहर परोसने की साजिश का खुलासा हुआ है। यहां 426 छात्रों के लिए तैयार की गई 48 किलो सब्जी में फिनाइल मिला पाया गया। घटना का खुलासा तब हुआ जब बच्चों ने भोजन चखते समय गंध महसूस कर शिक्षकों को सूचना दी। जांच में पुष्टि हुई कि सब्जी में जानबूझकर फिनाइल मिलाया गया था। इस घटना को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। मुख्य न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी की – “अगर कैजुअल्टी होती तो संभालना मुश्किल होता” और मुख्य सचिव से शपथ पत्र में विस्तृत जवाब मांगा। अदालत ने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए स्कूलों में भोजन पर विशेष सतर्कता बरती जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 सितम्बर को होगी।

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शिक्षक की भूमिका पाई गई संदिग्ध
21 अगस्त को घटी इस घटना का सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि विद्यालय के ही एक शिक्षक की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। बच्चों ने जब भोजन में गंध की शिकायत की तो जांच के दौरान साफ हुआ कि सब्जी में फिनाइल मिलाने की कोशिश जानबूझकर की गई थी। शिक्षक की संलिप्तता को लेकर जांच टीम ने महत्वपूर्ण बयान दर्ज किए हैं।
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कलेक्टर ने त्वरित जांच समिति गठित की
घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने तत्काल तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई। इसमें एसडीएम सूरज कश्यप, डीएमसी उमाशंकर तिवारी और एपीसी आशीष राम को शामिल किया गया है। टीम ने विद्यालय पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया, बच्चों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए और प्राथमिक जांच रिपोर्ट तैयार की। कलेक्टर ने आदेश दिया है कि दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाए, जिसके आधार पर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।
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राजनीतिक जांच दल और गहमा-गहमी
घटना का खुलासा होते ही कांग्रेस और बस्तरिया राज मोर्चा की टीम पोटाकेबिन पहुंची। लेकिन शुरुआत में उन्हें भीतर जाने की अनुमति नहीं मिली, जिससे नाराज होकर जनप्रतिनिधियों ने चक्काजाम कर दिया। इसके बाद हुई गहमा-गहमी के बीच प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच कमेटी को पोटाकेबिन परिसर में प्रवेश दिया, जहां उन्होंने भोजन व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का निरीक्षण किया।


बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
426 मासूमों की जान पर बनी इस घटना ने पोटाकेबिन स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट की सख्ती और जिला प्रशासन की जांच ने साफ कर दिया है कि बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अब सबकी निगाहें अदालत की सुनवाई और प्रशासन की अंतिम रिपोर्ट पर टिक गई हैं।

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