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एक्सप्लेनर: धान खरीदी कब शुरू होगी सरकार? त्योहारी सीजन से पहले किसानों के हाथ खाली, ऐसे में कैसे मनेगा तिहार

Fri, 16 Oct 2026 11:45 AM IST
Lalit Kumar Singh Lalit Kumar Singh
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:45 AM IST
सार

छत्तीसगढ़ के किसान धान खरीदी की बांट जो रहे हैं। उनकी नजरें राज्य सरकार पर टिकी हैं, क्योंकि राज्य की साय सरकार ने अब तक धान खरीदी की घोषणा नहीं की है। ऐसे में किसानों का त्योहार (तिहार) कैसे मनेगा? क्या इस बार तिहार में किसानों के हाथ खाली रह जायेंगे? 

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paddy procurement Preparations in Chhattisgarh, CG News
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

छत्तीसगढ़ के किसान धान खरीदी की बांट जो रहे हैं। उनकी नजरें राज्य सरकार पर टिकी हैं, क्योंकि राज्य की साय सरकार ने अब तक धान खरीदी की घोषणा नहीं की है। ऐसे में किसानों का त्योहार (तिहार) कैसे मनेगा? क्या इस बार तिहार में किसानों के हाथ खाली रह जायेंगे? बिना रुपये के किसान कैसे तिहार मनायेंगे? खेती-किसानी कैसे गुलजार होगा? यही सवाल किसानों की जुबां पर है। किसान और विपक्ष में बैठे राजनीतिक दलों ने भी साय सरकार से एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग की है। 

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छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहा जाता है। ऐसे में यहां धान सिर्फ खेतों में ही नहीं उगता, बल्कि प्रदेश के सियायी गलियारे में भी में भी इसकी गूंज सुनाई देती है। अक्तूबर जाने में 15 दिन बचे हैं और नवंबर की तैयारी है। ऐसे में धान खरीदी अब तक शुरू नहीं हुई है। खेती-किसानी से जुड़े जानकारों का कहना है कि एक नवंबर से धान की खरीदी शुरू हो सकती है। सरकार नवंबर से धान खरीदी का एलान कर सकती है। ऐसे में किसानों को राहत मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार एमएसपी रेट पर धान खरीदी का बोनस भी दे सकती है। 
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पूर्व की भूपेश सरकार में किसानों का एक साल का बोनस बाकी है। भाजपा सरकार ने उस बोनस को किसानों को आज तक नहीं दिया है। जिसका फंड भी रिलीज हो चुका था। पिछले तीन साल में केंद्र सरकार ने एमएसपी बढ़ाई है, जो कि लगभग 258 के आस-पास है। पिछले साल भी समर्थन मूल्य पर जो धान खरीदी की गई, उस राशि को जोड़कर किसानों को नहीं दिया गया। ऐसे में केंद्र के तीन साल में बढ़ी हुई एमएसपी की राशि समर्थन मूल्य में अतिरिक्त जोड़कर प्रति क्विंटल 3 हजार 358 रुपये धान खरीदी हो सकती है। 



बढ़ा किसानों का दायरा
छत्तीसगढ़ में पिछले पांच साल की धान खरीदी के आंकड़ों की बात करें तो राज्य में धान खरीदी का पैमाना लगातार बढ़ा हुआ है। किसानों का पंजीयन बढ़ा है, धान बेचने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है और सरकार की ओर से धान के एवज में किए जाने वाले भुगतान का आंकड़ा भी लगातार बढ़ा है। पिछले पांच वर्षों का आंकड़ों देखें तो धान खरीदी और किसानों की भागीदारी दोनों बड़े स्तर पर रही।





खरीफ विपणन वर्ष 2021-22
धान खरीदी का लक्ष्य 105 लाख मीट्रिक टन था और करीब 97 लाख 97 हजार मीट्रिक टन धान खरीदा गया। करीब 24 लाख 5 हजार किसान पंजीकृत थे और 21 लाख 77 हजार किसानों ने धान बेचा। किसानों को करीब 19 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया।



खरीफ विपणन वर्ष 2022-23
धान खरीदी का लक्ष्य 110 लाख मीट्रिक टन था। इसके मुकाबले करीब 107 लाख 53 हजार मीट्रिक टन धान खरीदा गया। करीब 24 लाख 98 हजार किसान पंजीकृत थे, जिनमें से 23 लाख 42 हजार से ज्यादा किसानों ने धान बेचा। इस साल किसानों को करीब 23 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान हुआ।



खरीफ विपणन वर्ष 2023-24
इस वर्ष धान खरीदी का लक्ष्य 130 लाख मीट्रिक टन था, जबकि वास्तविक खरीदी 144 लाख 92 हजार मीट्रिक टन तक पहुंची। करीब 26 लाख 85 हजार किसान पंजीकृत थे और 24 लाख 72 हजार किसानों ने धान बेचा। किसानों को धान के एवज में करीब 32 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया।





खरीफ विपणन वर्ष 2024-25
साल 2024-25 में धान खरीदी का लक्ष्य 160 लाख मीट्रिक टन था। वास्तविक खरीदी करीब 149 लाख 25 हजार मीट्रिक टन रही। करीब 25 लाख 49 हजार किसान पंजीकृत थे और इनमें से 24 लाख 80 हजार से ज्यादा किसानों ने धान बेचा। धान के लिए 31 हजार 89 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया।



खरीफ विपणन वर्ष 2025-26
पिछले खरीफ विपणन वर्ष में धान खरीदी का लक्ष्य करीब 140 लाख मीट्रिक टन था। इसके मुकाबले 31 जनवरी 2026 तक करीब 142 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई। इस साल करीब 27 लाख 40 हजार किसान पंजीकृत थे, जबकि 25 लाख 24 हजार से ज्यादा किसानों ने धान बेचा गया। धान के लिए किसानों को करीब 33 हजार 149 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।






पीवी एप को लेकर विरोध
आम आदमी पार्टी का कहना है कि प्रदेश में फसल सत्यापन (खरीफ गिरदावरी) और राजस्व कार्यों के लिए उपयोग किए जा रहे (पीवी एप) और भुइंया वेबसाइट को लेकर राज्य में किसानों में भारी विरोध देखने को मिल रहा है। जिसमें सरकार को सुधार करना चाहिए। ग्रामीण और दूर-दराज के खेतों में इंटरनेट नेटवर्क न होने के कारण एप ठीक से काम नहीं करता है, जिससे डेटा सिंक या अपलोड करने में भारी दिक्कतें आती हैं। तकनीकी रूप से कमजोर सर्वर और सॉफ्टवेयर डिजाइन के चलते फील्ड में काम करते समय एप बार-बार हैंग हो जाता है। एप में सटीक जियो-लोकेशन न मिलने के कारण खसरे की सही स्थिति दर्ज करने में बाधा आती है। एप के नियमों के अनुसार खेत के चारों कोनों पर जाकर फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। खेतों में पानी भरे होने, फसल के बड़े होने या पुराने नक्शों में विसंगति होने के कारण हर कोने तक पहुंचना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन है। 



एप में तकनीकी खामियां
वहीं एप की इन तकनीकी कमियों के बावजूद काम पूरा न होने पर शासन-प्रशासन के पटवारियों को शो-कॉज नोटिस और निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसका पटवारी संघ ने कड़ा विरोध किया है और इन्हीं सभी मांगों को लेकर पटवारी हड़ताल कर रहे हैं। इन तकनीकी बाधाओं के चलते सत्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है, जिससे भविष्य में किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने में परेशानी हो रही है ।



विरोध के बाद एग्रीस्टेक की अनिवार्यता खत्म
इस बार धान खरीदी की तैयारी के बीच एक बड़ा बदलाव किसानों के पंजीयन और फसल के रिकॉर्ड से जुड़ा है। अब समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसानों के पास एग्रीस्टेक फार्मर आईडी/फार्मर आईडी होना जरूरी किया गया है। पिछले खरीफ विपणन वर्ष में पंजीकृत किसानों को इस साल भी पंजीकृत माना जाएगा। उनकी दर्ज भूमि, धान का रकबा और खसरा संबंधी जानकारी एग्रीस्टेक व्यवस्था के जरिए अपडेट की जाएगी, लेकिन यहीं से किसानों की एक नई चिंता भी सामने आई है। संयुक्त खातों में दर्ज सह-खातेदारों के लिए बकेट क्लेम और सहमति सत्यापन की प्रक्रिया जरूरी की गई है। हालांकि लगातार विरोध के बाद सरकार ने इस बार एग्रीस्टेक की अनिवार्यता खत्म कर दी है। 



एक नवंबर से धान खरीदी की मांग
छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य वेगेंद्र कुमार सोनबेर समेत किसानों ने धान खरीदी की शुरुआत एक नवंबर से करने की मांग की है। उनका कहना है कि एक नवंबर छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस भी है। ऐसे में इस दिन से धान खरीदी शुरू करने की परंपरा बनाई जा सकती है, ताकि आने वाली सरकारों में भी तारीख को लेकर अनिश्चितता की स्थिति न रहें। उनका कहना है कि 15 नवंबर से धान खरीदी की तैयारी किसानों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। अक्टूबर के अंत तक बड़ी मात्रा में फसल पककर तैयार हो जाती है। नवंबर की शुरुआत तक किसान अपनी फसल काटने की तैयारी में रहता है। ऐसे में खरीदी शुरू होने में देरी का सीधा असर किसान की आर्थिक जरूरतों पर पड़ सकता है। दीपावली के आस-पास किसानों को मजदूरों का भुगतान करना होता है। परिवार की जरूरतें भी बढ़ जाती हैं। किसान समय पर धान नहीं बेच पायेंगे तो उसके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जायेगा। ऐसे में व्यापारी किसानों की फसल को औने-पौने दाम पर खरीदकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।




एमएसपी पर होगी खरीदारी?
किसान नेताओं का कहना है कि पिछले वर्षों में समर्थन मूल्य में हुई बढ़ोतरी का अंतर किसानों को नहीं मिला है। किसान संगठन के मुताबिक यह अंतर जोड़ने पर प्रति क्विंटल करीब 398 रुपये का आंकड़ा बनता है और 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से यह राशि करीब 8 हजार 358 रुपये प्रति एकड़ तक पहुंचती है। किसान संगठन सरकार से इस अंतर की राशि का भुगतान करने की मांग कर रहा है। साथ ही साल 2023 से जुड़ी चौथी किस्त की बकाया राशि के भुगतान की मांग भी उठ रही है।








कांग्रेस ने उठाये सवाल

छत्तीसगढ़ कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि राज्य बनने के बाद धान खरीदी की परंपरा कांग्रेस की पहली सरकार ने शुरू की थी। उनका आरोप है कि भाजपा शासन के दौरान पहले धान खरीदी की मात्रा सीमित रखने की कोशिश होती रही, जबकि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में खरीदी की व्यवस्था को विस्तार दिया गया और किसानों को पूरा मूल्य देने की दिशा में काम हुआ। शुक्ला का आरोप है कि मौजूदा सरकार 3100 रुपये में धान खरीदी के वादे के बावजूद ऐसी प्रक्रियाएं लागू कर रही है, जिनसे किसानों के सामने नई अड़चनें पैदा हो रही हैं। कांग्रेस का कहना है कि गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्रीस्टेक जैसी प्रक्रियाओं के कारण किसान को सरकारी खरीदी व्यवस्था तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।



किसानों और राजनीतिक दलों की मांगें

  • पटवारियों की जायज मांगे सरकार तुरंत मानें और पीवी ऐप के जरिए जबरन काम कराने के बजाय इसे पहले की तरह भुइंया पोर्टल के माध्यम से काम लिया जाये।
  • कांग्रेस सरकार का बकाया बोनस किसानों को दिया जाए।
  • केंद्र के तीन साल में बढ़ी हुई एमएसपी की राशि समर्थन मूल्य में अतिरिक्त जोड़कर 3358 रुपये से किसानों से धान खरीदा जाए।
  • एक नवम्बर से अनिवार्य रूप से धान खरीदी करें सरकार।
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