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CG: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से बदली सुष्मिता जाटवर की तकदीर, कर्ज के बोझ से निकलकर बनीं आत्मनिर्भर
Fri, 09 Jan 2026 01:26 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 09 Jan 2026 01:26 PM IST
सार
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसकी एक प्रेरक मिसाल मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदुली से सामने आई है, जहां सत्कार महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुष्मिता जाटवर ने संघर्ष से सफलता तक का उल्लेखनीय सफर तय किया है।
समूह से जुड़ने से पहले सुष्मिता जाटवर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। परिवार की आय सीमित थी और आजीविका के लिए उन्हें छोटे-मोटे कार्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेना उनकी मजबूरी बन चुका था, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था।
एनआरएलएम के तहत सत्कार महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया। समूह के माध्यम से उन्हें 15 हजार रुपये की रिवॉल्विंग फंड सहायता और बैंक लिंकेज के अंतर्गत 50 हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने अपने खेत के साथ-साथ अन्य किसानों की भूमि किराये पर लेकर कृषि कार्य में निवेश किया और छोटे व्यवसाय की भी शुरुआत की।
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वर्तमान में सुष्मिता जाटवर भिंडी, करेला, लौकी और टमाटर जैसी सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय मंडी में विक्रय कर रही हैं। इस प्रयास से उनकी मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां उनकी आय लगभग 3 हजार रुपये प्रतिमाह थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 50 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई है।
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ उनके परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार आया है। उन्होंने साहूकारों से लिया गया कर्ज भी पूरी तरह चुका दिया है। आज सुष्मिता जाटवर आत्मनिर्भर बनकर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं।
भविष्य में वे अपने व्यवसाय का विस्तार करने के साथ ही बैंक सखी के रूप में कार्य करते हुए अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के लिए प्रेरित करने का संकल्प भी ले चुकी हैं।
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समूह से जुड़ने से पहले सुष्मिता जाटवर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। परिवार की आय सीमित थी और आजीविका के लिए उन्हें छोटे-मोटे कार्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेना उनकी मजबूरी बन चुका था, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था।
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एनआरएलएम के तहत सत्कार महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया। समूह के माध्यम से उन्हें 15 हजार रुपये की रिवॉल्विंग फंड सहायता और बैंक लिंकेज के अंतर्गत 50 हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने अपने खेत के साथ-साथ अन्य किसानों की भूमि किराये पर लेकर कृषि कार्य में निवेश किया और छोटे व्यवसाय की भी शुरुआत की।
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वर्तमान में सुष्मिता जाटवर भिंडी, करेला, लौकी और टमाटर जैसी सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय मंडी में विक्रय कर रही हैं। इस प्रयास से उनकी मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां उनकी आय लगभग 3 हजार रुपये प्रतिमाह थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 50 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई है।
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ उनके परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार आया है। उन्होंने साहूकारों से लिया गया कर्ज भी पूरी तरह चुका दिया है। आज सुष्मिता जाटवर आत्मनिर्भर बनकर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं।
भविष्य में वे अपने व्यवसाय का विस्तार करने के साथ ही बैंक सखी के रूप में कार्य करते हुए अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के लिए प्रेरित करने का संकल्प भी ले चुकी हैं।