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Korba: अंडर ब्रिज की मांग को लेकर ग्रामीणों ने किया चक्काजाम, वहीं वन परिक्षेत्राधिकारी का किया घेराव

Sat, 28 Dec 2024 01:23 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: Digvijay Singh Updated Sat, 28 Dec 2024 01:23 PM IST
सार

कोरबा चांपा निर्माणाधीन नेशनल हाईवे 149 में बरपाली चौक पर ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया है। बरपाली गांव के महिलाओं ने हाथ में रस्सी लेकर सड़क पर खड़ी हो गई है।

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Villagers blocked road demanding an under bridge and also gheraoed the forest officer in Korba
ग्रामीणों ने किया चक्काजाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरबा चांपा निर्माणाधीन नेशनल हाईवे 149 में बरपाली चौक पर ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया है। बरपाली गांव के महिलाओं ने हाथ में रस्सी लेकर सड़क पर खड़ी हो गई है। नेशनल हाइव के नीचे से अंडर ब्रिज मार्ग की मांग कर रहे है। सैकड़ों महिलाओं ने चक्काजाम किया है। सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लगी लंबी कतार लग गई है इस जाम में  यात्री गाड़ी भारी वाहनों के अलावा चारपहिया और बाइक सवार फंसे हुए है। सड़क के दोनों तरफ भारी वाहनों की लंबी कथा लगने की वजह से लोग काफी परेशान है सुबह से ही महिलाएं आंदोलन पर है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें सड़क पार करने काफी दूरी तय करना पड़ेगा वहीं अंडर ब्रिज मार्ग नहीं होने से हादसे भी हो सकते हैं। 

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पुष्पा भाई ने बताया कि बरपाली की निवासी है और इस नेशनल हाईवे के बनने के बाद से उन्हें और भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा सड़क के उसे तरफ उसका घर है और नेशनल हाईवे बनने के बाद उसे स्टेशन बाजार और उप स्वास्थ्य केंद्र के अलावा निस्तार के लिए तालाब भी जाना होता है और अंडर ब्रिज का निर्माण नहीं होने के कारण उन्हें काफी लंबी दूरी तय कर जाना पड़ेगा जिससे भविष्य में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है इन बातों को लेकर आज वह सड़क पर उतरी हुई है।
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वहीं ग्रामीण भगवती यादव ने बताया कि नेशनल हाईवे बनते समय उन्हें लगा कि एक नीचे से रास्ता होगा लेकिन नहीं होने के कारण उन्हें भविष्य में कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा इन सब बातों को लेकर गांव के सभी महिलाएं आज चक्का जाम कर अपनी मांग शासन प्रशासन के सामने रख रहे हैं। वहीं इसकी सूचना उरगा थाना पुलिस को दी गई जहां मौके पर पहुंचे ग्रामीणों को समझने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी यहां नहीं पहुंचेंगे और उनकी बातें अगर नहीं मानी गई तब तक वह चक्काजाम पर बैठे रहेंगे।

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ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्राधिकारी का किया घेराव

Villagers blocked road demanding an under bridge and also gheraoed the forest officer in Korba
कार्यालय का घेराव - फोटो : अमर उजाला

कोरबा कोलगा के कैलाश गुफा मार्ग स्थित जंगल में किए जा रहे कूप कटिंग काम को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। काम बंद कराने के बाद ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्राधिकारी घेराव कर दिया। बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीण अधिकारियों को हटाने की मांग पर अड़े रहे।

कोरबा वनमंडल के वन परिक्षेत्र पसरखेत में 21 नवंबर को सलेक्शन कम इम्प्रुवमेंट (एसीआई) के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित था। यह कार्यक्रम कक्ष क्रमांक 1128 में चल रहा था। कार्यक्रम में सीसीएफ प्रभात मिश्रा व डीएफओ अरविंद पीएम सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में मौके पर पहुंचे कोलगा के ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर विरोध जता दिया था। इस दौरान ग्रामीणों ने जंगल को कोलगा समिति का बताते हुए कूप कटिंग पर रोक लगाने की मांग की थी। ग्रामीणों के विरोध के बाद वार्ता का दौर चलता रहा। इसके बाद भी बात नही बनी। वन विभाग ने सप्ताह भर पहले कैलाश गुफा मार्ग स्थित जंगल में कूप कटिंग का काम शुरू करा दिया था। इसके लिए पसरखेत के मजदूर लगाए गए थे, जो कुल्हाड़ी सहित अन्य औजार की मदद से पेड़ की कटाई कर रहे थे। जिसकी भनक कोलगा के ग्रामीणों को लग गई। ग्रामीण पेड़ कटाई के विरोध में लामबंद हो गए। महिला समिति के सदस्य भारी संख्या में एकत्रित हुई। वे लाठी डंडे से लैस होकर मौके पर जा पहुंचे। महिलाओं ने पेड़ कटाई का विरोध शुरू कर काम बंद करा दिया था। शुक्रवार को पुनः ग्रामीणों ने पसरखेत रेंज आफिस का घेराव कर प्रदर्शन किया। कूप कटिंग का विरोध करते हुए वे अधिकारियों को अन्यत्र हटाने की मांग करते रहे।

कूप कटिंग को लेकर एक तरफ जहां विवाद की स्थिति बनी हुई है। वहीं अधिकारियों को हटाने की मांग भी हो रही है, लेकिन इस मामले में अधिकारियों को हटाना हल नहीं हो सकता। नए अधिकारी भी विभागीय आदेश के तहत कार्य को आगे बढ़ाएंगे ही। बताया जा रहा है कि वर्षों पहले कोलगा समिति में करीब दो दर्जन कक्ष समाहित थे। विभाग द्वारा तराईमार को कोलगा से पृथक कर नए समिति का गठन किया गया। जिससे करीब डेढ़ दर्जन कंपार्टमेंट तराईमार समिति में चला गया। तत्कालिन अधिकारियों द्वारा समिति विभाजन को लेकर ग्रामीणों को विश्वास में नहीं लिया गया था। जिसके चलते विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है।


 
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