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कर्मचारी संगठनों की सात जुलाई को हड़ताल: छत्तीसगढ़ के सभी संगठन एकजुट, पांच सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन

Sun, 25 Jun 2023 03:44 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Sun, 25 Jun 2023 03:44 PM IST
सार

पांच सूत्रीय मांगों में सातवें वेतनमान के अनुरूप गृहभाड़ा भत्ता, केंद्रीय कर्मचारियों की तरह देय तिथि से मंहगाई भत्ता, अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर पुरानी पेंशन योजना का लाभ एवं जन घोषणा पत्र-2018 के अनुरूप चार स्तरीय वेतनमान दिया जाना शामिल है। 

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all employees organizations of Chhattisgarh strike on July 7
कवर्धा में आयोजित बैठक में चर्चा करते कर्मचारी। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ के सभी कर्मचारी संगठन सात जुलाई को एक दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। इसे लेकर सभी संगठन एकजुट हो गए हैं। ये अपनी पांच सूत्रीय मांगों को पूरा किए जाने को लेकर आंदोलनरत हैं। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर एक अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके लिए संगठनों ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त मोर्चा का गठन किया है। संगठनों ने कहा है कि सभी कर्मचारियों के हितों को देखते हुए साथ लड़ने का फैसला किया गया है। 

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एक अगस्त से करेंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल
मोर्चे में छग कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन, छग कर्मचारी अधिकारी महासंघ, मंत्रालय कर्मचारी संघ, संचालनालय कर्मचारी संघ, छग टीचर्स एसोसिएशन सहित समस्त कर्मचारी और शिक्षक संगठन शामिल हैं। टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने बताया कि मंत्रालय व संचालनालय रायपुर में हुई बैठक के बाद सभी संगठन प्रमुखों ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। एक दिवसीय हड़ताल के बाद भी मांगों पर निर्णय नहीं होने पर एक अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारम्भ की जाएगी। 
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एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष उग्रसेन चन्द्रवंशी, सचिव आसकरण धुर्वे, ब्लॉक अध्यक्ष केशलाल साहू, वकील बेग मिर्जा, बलदाऊ चन्द्राकर, राजेश तिवारी आदि ने बताया कि पांच सूत्रीय मांगों में सातवें वेतनमान के अनुरूप गृहभाड़ा भत्ता, केंद्रीय कर्मचारियों की तरह देय तिथि से मँहगाई भत्ता, अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर पुरानी पेंशन योजना का लाभ एवं जन घोषणा पत्र-2018 के अनुरूप चार स्तरीय वेतनमान दिया जाना शामिल है। 
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गृहभाड़ा भत्ता में भारी नुकसान
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सातवें वेतनमान को एक जनवरी 2016 से लागू किया गया है, लेकिन गृहभाड़ा भत्ता छठवें वेतनमान के आधार पर ही 10 प्रतिशत व 7 प्रतिशत के दर से दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में पदस्थ केंद्रीय कर्मचारियों को सातवें वेतनमान में एक जुलाई 2017 से 16 एवं 8 प्रतिशत और एक जुलाई 2021 से 18 एवं 9 प्रतिशत के दर पर गृहभाड़ा भत्ता दिया जा रहा है। इसके चलते राज्य के कर्मचारियों-अधिकारियों को जनवरी 2016 से मई 2023 तक  की अवधि में लगभग 80  हजार से चार लाख रुपये तक का आर्थिक नुकसान हुआ है। 

मंहगाई भत्ता में हजारों की चपत
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि महंगाई भत्ता में भी राज्य के कर्मचारियों का आर्थिक शोषण किया गया है। एक जुलाई 2019 के किश्त 17 प्रतिशत  को एक जुलाई 2021 से दिया गया। कोरोना काल के कारण केन्द्र सरकार ने एक जनवरी 2020 से एक जनवरी 2021 के देय कुल 11 प्रतिशत डीए को एक जुलाई 2021 से दिया था, जिससे मंहगाई भत्ता 17 से बढ़कर 28 प्रतिशत हुआ। केंद्र सरकार ने एक जनवरी 2022 से 34 प्रतिशत, एक जुलाई 2022 से 38 प्रतिशत एवं एक जनवरी 2023 से 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता केंद्रीय कर्मचारियों को दिया है। वहीं छग शासन ने एक जुलाई 2021 से 17 प्रतिशत, एक मई 2022 से 22, एक अगस्त 2022 से 28 व एक अक्तूबर 2022 से 33 प्रतिशत दिया है। 

इस प्रकार स्पष्ट है कि राज्य सरकार ने केंद्र के देय तिथि से मंहगाई भत्ता नहीं दिया है, जिसके कारण राज्य के कर्मचारियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। वर्तमान में महंगाई भत्ता स्वीकृति के मामले में देय तिथि से राज्य के कर्मचारी केंद्र के कर्मचारियों से नौ प्रतिशत पीछे चल रहे हैं। जुलाई 2019 से मई 2023 तक राज्य में देय तिथि से महंगाई भत्ता स्वीकृत नहीं होने से कर्मचारियों और अधिकारियों को लगभग 50 हजार से दो लाख रुपये तक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

पुरानी पेंशन में पेंच
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने बताया कि राज्य शासन ने नवीन पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना को एक अप्रैल 2022 से लागू किया है। शिक्षक एल. बी. संवर्ग को संविलियन तिथि 2018 से ओपीएस का लाभ देने का निर्णय लिया है। अर्धवार्षिकी आयु 62 वर्ष पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने की स्थिति में पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत पेंशन पात्रता के लिए 10 वर्ष की न्यूनतम अहर्तादायी सेवा पूर्ण नहीं होने के कारण अधिसंख्य शिक्षक पेंशन लाभ से वंचित हो जाएंगे। 


एल बी. संवर्ग के जो शिक्षक पुरानी पेंशन के दायरे में आएंगे, उन्हें भी 33 वर्ष की सेवा पूर्ण नहीं कर पाने के कारण अत्यल्प अनुपातिक पेंशन ही मिलेगी। इसी को दृष्टिगत रखते हुए संयुक्त मोर्चा ने पेंशन पात्रता के लिए अहर्तादायी सेवा अवधि की गणना शिक्षाकर्मी पद पर प्रथम नियुक्ति तिथि से करने की माँग को प्रमुखता से शामिल किया है। 

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