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CG: छत्तीसगढ़ में पहली बार महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण शुरू, 15 चरणों में होगा पूरा
Tue, 11 Nov 2025 07:26 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 11 Nov 2025 07:26 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से राज्य में पहली बार महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों (एलएचवी) के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से राज्य में पहली बार महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों (एलएचवी) के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा राज्य स्वास्थ्य प्रशिक्षण संस्थान (SIHFW) के सहयोग से आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों की दक्षता बढ़ाकर उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) के मामलों के प्रबंधन को बेहतर बनाना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, संचालक महामारी नियंत्रण डॉ. एस. के. पामभोई, संयुक्त संचालक डॉ. निर्मला यादव, उप संचालक (मातृत्व स्वास्थ्य) डॉ. शैलेन्द्र अग्रवाल, उप संचालक (शिशु स्वास्थ्य) डॉ. वी. आर. भगत, यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। राज्य में इस तरह का यह पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो कुल 15 चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण के बाद आगामी 14 बैचों में पूरे राज्य की महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
विशेषज्ञों ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक समुदाय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे स्वास्थ्य सेवाओं की पहली पंक्ति में कार्य करते हुए संस्थागत सेवाओं और समुदाय के बीच एक मजबूत कड़ी का कार्य करती हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रजनन, मातृ, शिशु, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य (RMNCH) सेवाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इसमें एएनसी (Antenatal Care), उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान एवं प्रबंधन, पीएमएसएमए कार्यक्रम, प्रसव पूर्व एवं पश्चात देखभाल, संक्रमण नियंत्रण, नवजात देखभाल तथा रेफरल समन्वय प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया गया।
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प्रतिभागियों को समूह चर्चा, केस स्टडी और व्यवहारिक अभ्यास के माध्यम से अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान नेतृत्व क्षमता, कार्यकुशलता और समुदाय से जुड़ाव को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में पोस्ट-टेस्ट और फीडबैक प्रस्तुतिकरण किया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए पूर्ण निष्ठा से कार्य करने का संकल्प लिया।
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कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, संचालक महामारी नियंत्रण डॉ. एस. के. पामभोई, संयुक्त संचालक डॉ. निर्मला यादव, उप संचालक (मातृत्व स्वास्थ्य) डॉ. शैलेन्द्र अग्रवाल, उप संचालक (शिशु स्वास्थ्य) डॉ. वी. आर. भगत, यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। राज्य में इस तरह का यह पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो कुल 15 चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण के बाद आगामी 14 बैचों में पूरे राज्य की महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
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विशेषज्ञों ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक समुदाय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे स्वास्थ्य सेवाओं की पहली पंक्ति में कार्य करते हुए संस्थागत सेवाओं और समुदाय के बीच एक मजबूत कड़ी का कार्य करती हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रजनन, मातृ, शिशु, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य (RMNCH) सेवाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इसमें एएनसी (Antenatal Care), उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान एवं प्रबंधन, पीएमएसएमए कार्यक्रम, प्रसव पूर्व एवं पश्चात देखभाल, संक्रमण नियंत्रण, नवजात देखभाल तथा रेफरल समन्वय प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया गया।
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प्रतिभागियों को समूह चर्चा, केस स्टडी और व्यवहारिक अभ्यास के माध्यम से अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान नेतृत्व क्षमता, कार्यकुशलता और समुदाय से जुड़ाव को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में पोस्ट-टेस्ट और फीडबैक प्रस्तुतिकरण किया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए पूर्ण निष्ठा से कार्य करने का संकल्प लिया।