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सरगुजा: सरकारी जमीन के फर्जीवाड़े में भू-माफिया समेत पांच लोगों पर एफआईआर

Fri, 23 Oct 2026 06:05 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, सरगुजा
अमर उजाला नेटवर्क, सरगुजा Published by: अमन कोशले Updated Fri, 23 Oct 2026 06:05 PM IST
सार

जिले के मैनपाट में 3.46 हेक्टेयर सरकारी जमीन के राजस्व दस्तावेजों में कूटरचना कर अवैध बिक्री का मामला सामने आया है। कलेक्टर अजीत वसंत ने भू-माफिया आजाद इराकी समेत पांच लोगों पर FIR दर्ज करने और जमीन को दोबारा शासकीय मद में दर्ज करने के निर्देश दिए।

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FIR against five people including land mafia in fraud of government land in Surguja
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरगुजा जिले की मैनपाट तहसील के ग्राम केसरा में 3.46 हेक्टेयर सरकारी जमीन के राजस्व दस्तावेज में कूटरचना कर उसे निजी नाम पर दर्ज कराने और बेचने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद भू-माफिया आजाद इराकी सहित पांच खरीदारों और विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश मैनपाट तहसीलदार को दिए हैं। इसके साथ ही, कलेक्टर ने राजस्व अभिलेखों में दर्ज अवैध प्रविष्टियों को विलोपित कर जमीन को फिर से शासकीय मद में दर्ज करने का निर्देश भी जारी किया है।
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कूटरचना कर जमीन की अवैध बिक्री
सरगुजा कलेक्टर को शिकायत मिली थी कि केसरा में स्थित 3.46 हेक्टेयर सरकारी भूमि को कूटरचना के जरिये निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराकर आगे अन्य लोगों को बेच दिया गया है। इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने मैनपाट तहसीलदार को मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। मैनपाट तहसीलदार ने जांच कर प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बंदोबस्त वर्ष 1995-96 में भी उक्त खसरा नंबर शासकीय भूमि के रूप में छोटे झाड़ जंगल मद में ही दर्ज था।
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जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल
जांच प्रतिवेदन से स्पष्ट हुआ कि वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख का अंतिम खसरा नंबर 650 दर्ज है। इससे यह साफ हो गया कि अधिकार अभिलेख में खसरा नंबर 1378 की प्रविष्टि प्रारंभिक तौर पर संभव ही नहीं थी। यह खसरा नंबर पहली बार वर्ष 1995-96 के राजस्व दस्तावेज में सामने आया था। कूटरचना के जरिये वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख में यह भूमि फर्जी तरीके से विजय सिंह पिता चंद्रचरण सिंह के नाम दर्ज कर दी गई थी। इसके बाद विजय सिंह के मुख्तार आम दिलीप चिकवा पिता रामप्रसाद और तुलेश्वर गुप्ता पिता गणेश गुप्ता ने इस जमीन की रजिस्ट्री जयनगर निवासी आजाद इराकी पिता रियाजुद्दीन इराकी और अनुपम कुमार सिंह पिता रामाशंकर सिंह के नाम कर दी।
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वन भूमि संरक्षण नियम का उल्लंघन
प्रकरण की सुनवाई के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी प्रकार की वन भूमि का हस्तांतरण केवल वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों और शीर्ष अदालत के आदेशों के तहत ही संभव है। इसी आधार पर पांचों आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कराने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि आरोपी आजाद इराकी शहर के रिंग बांध तालाब की जमीन के मामले में भी आरोपी रहा है, जहां उसने फर्जी प्रमाण पत्र के जरिये तालाब को पाटकर दूसरे के नाम दर्ज करा दिया था।
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