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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   EOW takes major action in 30-year-old housing loan scam, files 15,000-page chargesheet in court

CG: 30 साल पुराने हाउसिंग लोन घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई, 15 हजार पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल

Fri, 17 Jul 2026 09:31 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Fri, 17 Jul 2026 09:31 PM IST
सार

आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने तीन दशक पुराने गृह निर्माण ऋण घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष न्यायालय में 15 हजार पन्नों का चालान पेश किया है।

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EOW takes major action in 30-year-old housing loan scam, files 15,000-page chargesheet in court
तीन आरोपियों के खिलाफ 15,000 पन्नों का चालान पेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने तीन दशक पुराने गृह निर्माण ऋण घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष न्यायालय में 15 हजार पन्नों का चालान पेश किया है। मामला करीब 1.86 करोड़ रुपये के कथित गबन से जुड़ा है, जिसकी देनदारी ब्याज सहित बढ़कर अब 104 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। इस मामले में तीन आरोपियों को अभियुक्त बनाया गया है।
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जांच के अनुसार, वर्ष 1995 से 1998 के बीच सरकारी आवासीय योजना के तहत आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के 186 सदस्यों के नाम पर एक-एक लाख रुपये का गृह निर्माण ऋण स्वीकृत कराया गया था। आरोप है कि ऋण स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया फर्जी दस्तावेजों, उपयोगिता प्रमाण-पत्र और भवन पूर्णता प्रमाण-पत्र के आधार पर पूरी की गई, जबकि वास्तविकता में निर्माण कार्य हुआ ही नहीं।
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ईओडब्ल्यू की जांच के दौरान जब संबंधित स्थलों का भौतिक सत्यापन कराया गया तो दस्तावेजों में जिन स्थानों पर मकान बनने का दावा किया गया था, वहां कोई निर्माण नहीं मिला। इसके अलावा जिन लोगों के नाम पर ऋण स्वीकृत हुआ था, उनमें से कई सदस्य संबंधित पतों पर मौजूद नहीं पाए गए, जिससे पूरे मामले में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, तत्कालीन समिति अध्यक्ष, आवास संघ के एक पर्यवेक्षक और भोपाल स्थित आवास संघ के तत्कालीन अधिकारी ने कथित रूप से आपसी मिलीभगत से फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराए और ऋण राशि स्वीकृत कराकर उसका दुरुपयोग किया। इस प्रक्रिया में सरकारी संस्था को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचा।

ईओडब्ल्यू के रिकॉर्ड के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक मूल ऋण और उस पर जुड़ा ब्याज मिलाकर कुल देनदारी 104 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जिसे अब डूबत ऋण की श्रेणी में दर्ज किया गया है।


जांच एजेंसी का कहना है कि वर्षों से लंबित आर्थिक अपराधों की भी तेजी से जांच पूरी की जा रही है। इसी कड़ी में पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के बाद यह विस्तृत आरोप-पत्र विशेष अदालत में पेश किया गया है। अब मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाएगा।
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