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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Dussehra 20226 celebrated in WRS Colony Raipur for 55 years, CG News

Exclusive: जब आंधी-तूफान में उड़ गया विशालकाय रावण, डब्ल्यूआरएस कॉलोनी ने खड़े कर दिये हाथ,फिर ये बने संकटमोचन

Mon, 19 Oct 2026 10:39 PM IST
Lalit Kumar Singh Lalit Kumar Singh
Updated Mon, 19 Oct 2026 10:39 PM IST
सार

डब्ल्यूआरएस कॉलोनी रायपुर में 55 साल से दशहरा उत्सव भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। इस बार के आयोजन का यह 56वां साल है। विजयदशमी पर मंगलवार को 101 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। वहीं 65 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाथ का पुतला भी दहन किया जायेगा। दशहरा उत्सव को देखने के लिये रायपुर समेत पड़ोसी जिलों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

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Dussehra  20226 celebrated in WRS Colony Raipur for 55 years, CG News
रावण के पुतले को अंतिम रूप देता कलाकार - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

डब्ल्यूआरएस कॉलोनी रायपुर में 55 साल से दशहरा उत्सव भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। इस बार के आयोजन का यह 56वां साल है। विजयदशमी पर मंगलवार को 101 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। वहीं 65 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाथ का पुतला भी दहन किया जायेगा। दशहरा उत्सव को देखने के लिये रायपुर समेत पड़ोसी जिलों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। देखा जाये तो छत्तीसगढ़ में दो दशहरा उत्सव विख्यात हैं। पहला 75 दिनों तक चलने वाला विश्व विख्यात बस्तर दशहरा और दूसरा रेलवे का डब्ल्यूआरएस कॉलोनी रायपुर। इन दोनों ही जगहों पर दशहरा को देखने के लिये बड़ी संख्या में लोग उमड़ते हैं।

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इस बार डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में दो लाख लोगों की भीड़ जुटने की उम्मीद है। ऐसे में यहां पर सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक प्रबंध किये गये हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की पैनी नजर है। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। इस कार्यक्रम में  राज्यपाल रमेन डेका और सीएम विष्णुदेव साय शिरकत करेंगे। इसके साथ ही रायपुर मंत्री, विधायक, सांसद, मेयर समेत कई नामचीन हस्तियां मौजूद रहेंगी। 
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ओडिशा और मुंबई की टीम दिखायेगी आतिशबाजी
पुतला दहन के दौरान ओडिशा और मुंबई की टीम आतिशबाजी का करतब दिखायेगी। यहां पर मैन्यूअल और डिजिटल दोनों ही तरीके से शानदार आतिशबाजी की जायेगी। इस शानदार आतिशबाजी को देखने के लिये लोगों में एक महीने से काफी उत्सुकता रहती है। वहीं रामलीला का मंचन भी किया जायेगा।






रोचक है डब्ल्यूआरएस कॉलोनी का इतिहास
सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति नेशनल क्लब के पदाधिकारी परमंदिर दत्ता और जयराम ने बताया कि इस बार दशहरा आयोजन का 56वां वर्ष है। साल 1970 में रेलवे के कर्मचारियों ने डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में दशहरा उत्सव मनाने की शुरुआत की थी। शुरुआती दिनों में सबके सहभागिता से चंदा करके आयोजन किया जाता था। ऐसे में यहां पर बांस और बल्ली से सिर्फ रावण का पुतला ही बनाया जाता था। मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतल नहीं बनाये जाते थे।







जब लोगों को जानकारी हुई कि डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में दशहरा मनाया जा रहा है तो यहां पर लोगों की भीड़ धीरे-धीरे बढ़ने लगी। जैसे-जैसे समय बीतता गया आयोजन अपना व्यापक रूप लेते गया। एक समय ऐसा भी आया कि महंगाई की वजह से बजट नहीं बन पाने की वजह से समिति के सदस्यों ने दशहरा नहीं मनाने का फैसला लिया। 






महापौर तरुण चटर्जी ने की मदद
दशहरा नहीं मनाने के इस निर्णय की जानकारी जब नगर निगम के तत्कालीन कांग्रेस के महापौर तरुण चटर्जी को हुई, तो उन्होंने इसे बंद नहीं करने की सलाह दी और कहा कि आप लोग निराश न हों। हिम्मत न हारें। आयोजन शुरू करिये, स्थानीय प्रशासन आपका हरसंभव सहयोग करेगा। इसके बाद चटर्जी के सहयोग से यह कारवां दिनों-दिन आगे बढ़ते गया। फिर रमन सरकार में कद्दावर मंत्री रहे राजेश मूणत के तीन बार के कार्यकाल में समिति को बढ-चढ़कर आर्थिक मदद मिलती रही। धीरे-धीरे यह आयोजन वृहद स्तर पर पहुंच गया और आज प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा आयोजन बन गया है। सरकार चाहे बीजेपी की हो या कांग्रेस की, कोई न कोई मंत्री या विधायक दशहरा उत्सव समिति को अपना भरपूर सहयोग और समर्थन देता है। इस बार के आयोजन की कमान रायपुर उत्तर बीजेपी विधायक पुंरदर मिश्रा संभाल रहे हैं।





जब डबरी में उड़कर चला गया रावण, फिर...
आयोजन समिति के जयराम ने बताया कि कई साल पहले विजयदशमी के एक दिन पूर्व जमकर आंधी-तूफान आया। ऐसे में रावण का पुतला उड़कर मैदान से लगे डबरी (पोखर या तालाब ) में चला गया। उस समय मैदान समतल नहीं था। साथ ही बाउंड्रीवाल भी नहीं था। जगह-जगह कीचड़ से अटा था। ऐसे में लोग यहां जाने से कतराते थे। ऐसे समय में आयोजन समिति के सदस्यों और रेलवे कर्मचारियों ने कीचड़भरी डबरी में उतर गये। रावण का पुतला वहां से निकालकर आयोजन स्थल तक लेकर आये। फिर दशहरे के दिन दहन किया गया। इसके बाद इस रेलवे मैदान को बजरी, मूरुंग से पाटा गया। समतलतीकरण किया गया। रायपुर शहर के अंदर रेलवे का यह बहुत बड़ा दशहरा मैदान है। यहां पर दशहरे के साथ ही अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन भी किये जाते हैं। 

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