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रामानुजगंज तहसील में शराबी कानूनगो की करतूत: तहसीलदार ने भेजा अस्पताल, कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
Fri, 12 Sep 2025 04:56 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रामानुजगंज
अमर उजाला नेटवर्क, रामानुजगंज
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 12 Sep 2025 04:56 PM IST
सार
रामानुजगंज तहसील कार्यालय परिसर में शुक्रवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कानूनगो प्रवीण लकड़ा नशे की हालत में लड़खड़ाते हुए पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और फरियादी मौजूद थे, जो अपने कामकाज के लिए तहसील आए थे।
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रामानुजगंज तहसील में शराबी कानूनगो की करतूत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रामानुजगंज तहसील कार्यालय परिसर में शुक्रवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कानूनगो प्रवीण लकड़ा नशे की हालत में लड़खड़ाते हुए पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और फरियादी मौजूद थे, जो अपने कामकाज के लिए तहसील आए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही प्रवीण लकड़ा कार्यालय पहुंचे, वे संतुलन खो बैठे और जमीन पर गिर गए। लोगों ने उन्हें सहारा देकर सुरक्षित स्थान पर बैठाया। पूरे घटनाक्रम ने वहां मौजूद ग्रामीणों और कर्मचारियों को सकते में डाल दिया। सूचना मिलते ही तहसीलदार मनोज पैकरा मौके पर पहुंचे और तुरंत कार्रवाई करते हुए नशे में धुत कानूनगो को अस्पताल भिजवाया। वहीं, पूरे मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को दी गई।
जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष बीडी लाल गुप्ता ने कहा कि “मैं मौके पर मौजूद था, कानूनगो पूरी तरह नशे में धुत थे और चलने-फिरने की भी हालत में नहीं थे। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि “सरकारी कार्यालयों में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।”
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यह घटना न केवल तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकारी तंत्र की साख पर भी धब्बा है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद इस प्रकरण में क्या कार्रवाई होती है।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही प्रवीण लकड़ा कार्यालय पहुंचे, वे संतुलन खो बैठे और जमीन पर गिर गए। लोगों ने उन्हें सहारा देकर सुरक्षित स्थान पर बैठाया। पूरे घटनाक्रम ने वहां मौजूद ग्रामीणों और कर्मचारियों को सकते में डाल दिया। सूचना मिलते ही तहसीलदार मनोज पैकरा मौके पर पहुंचे और तुरंत कार्रवाई करते हुए नशे में धुत कानूनगो को अस्पताल भिजवाया। वहीं, पूरे मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को दी गई।
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जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष बीडी लाल गुप्ता ने कहा कि “मैं मौके पर मौजूद था, कानूनगो पूरी तरह नशे में धुत थे और चलने-फिरने की भी हालत में नहीं थे। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि “सरकारी कार्यालयों में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।”
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यह घटना न केवल तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकारी तंत्र की साख पर भी धब्बा है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद इस प्रकरण में क्या कार्रवाई होती है।