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दिव्यांग होकर भी नहीं मानी हार: स्वरोजगार से परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं जगदंबा सिंह, पढ़ें
Mon, 29 Sep 2025 04:13 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंज
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंज
Published by: Digvijay Singh
Updated Mon, 29 Sep 2025 04:13 PM IST
सार
रामानुजगंज वार्ड क्रमांक 1 जीवन की तमाम चुनौतियों के बावजूद आत्मनिर्भरता और हिम्मत की मिसाल पेश कर रहे हैं वार्ड क्रमांक 1 निवासी 30 वर्षीय दिव्यांग जगदंबा सिंह बचपन से ही दाहिने पैर से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
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जगदंबा सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रामानुजगंज वार्ड क्रमांक 1 जीवन की तमाम चुनौतियों के बावजूद आत्मनिर्भरता और हिम्मत की मिसाल पेश कर रहे हैं वार्ड क्रमांक 1 निवासी 30 वर्षीय दिव्यांग जगदंबा सिंह बचपन से ही दाहिने पैर से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वह टेंपो चलाकर माल ढोने जैसे कठिन कार्य से न केवल अपना, बल्कि पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
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जगदंबा सिंह की दो बेटियाँ हैं, जिनकी जिम्मेदारी वह पूरी मेहनत से उठाते हैं। प्रतिदिन टेंपो चलाकर और स्वयं माल लोड-अनलोड कर वे लगभग 500 से 600 रुपये की आय कर लेते हैं। यह कार्य सामान्य व्यक्तियों के लिए भी कठिन होता है, परंतु दिव्यांगता को मात देकर जगदंबा यह चुनौती भरा कार्य बीते छह वर्षों से कर रहे हैं। पूर्व में वे बढ़ई (कारपेंटर) का कार्य करते थे, लेकिन 2019 तक उस पेशे से पर्याप्त आमदनी न होने के कारण उन्होंने सेकंड हैंड टेंपो खरीदकर माल ढुलाई का कार्य प्रारंभ किया। इस कार्य से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला।
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जगदंबा की पत्नी गुलाबी सिंह भी दिव्यांग हैं। बावजूद इसके, दोनों पति-पत्नी ने कभी भी दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जगदंबा का कहना है कि यदि उनकी पत्नी को कोई छोटा-मोटा कार्य मिल जाए, तो परिवार को आर्थिक रूप से और मजबूती मिलेगी। उन्होंने शासन-प्रशासन से सहयोग की अपील की है।
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जरूरत है शासन की मदद की:
जगदंबा जैसे लोग समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। शासन को चाहिए कि वह ऐसे मेहनती एवं आत्मनिर्भर दिव्यांगों को स्वरोजगार में सहयोग दे, ताकि वे और अधिक सशक्त हो सकें।