Chitrakote Kannada Chhattisgarh Sangam: स्वामी विवेकानंद ने रायपुर से फहराया था संस्कृति-भाषा और धर्म की पताका
Chitrakote Kannada Chhattisgarhi Sangma: छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति की राजधानी जगदलपुर में रविवार को दलपत सागर स्थित होटल ग्रैंड शिल्पी इंटरनेशनल में चित्रकोट-कन्नड़-छत्तीसगढ़ी संगम का आयोजन किया गया।
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Chitrakote Kannada Chhattisgarh Sangam: छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति की राजधानी जगदलपुर में रविवार को दलपत सागर स्थित होटल ग्रैंड शिल्पी इंटरनेशनल में चित्रकोट-कन्नड़-छत्तीसगढ़ी संगम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत चित्रकोट जलप्रपात से की गई। शाम के सत्र में सांस्कृतिक एवं भाषाई एकता में मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से संस्कृति, भाषा और धर्म की पताका फहराया था। राज्य सरकार ने माना एयरपोर्ट का नाम स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट रायपुर रखकर सराहनीय कार्य किया है क्योंकि स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन काल के दो वर्ष रायपुर में बिताये थे। रायपुर में उनके नाम पर स्वामी विवेकानंद बूढ़ातालाब और उनका निवास स्थान भी है, जो स्मारक के रूप में रायपुर में सुशोभित हो रहे हैं।
इस तरह के आयोजन संस्कृति के पुल को मजबूत बनाते हैं। छोटे स्तर के प्रयास भी प्रभावी होते हैं। भाषा-संस्कृति का संरक्षण और सुधार का दायित्व मीडिया पर भी है। पुरानी संस्कृति में छत्तीसगढ़ मिसाल बन सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने कहा कि भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए हम सभी को प्रयास करना चाहिए। मन में हर प्रांत और भाषा के प्रति सम्मान होना चाहिए। हमारे देश के गुलदस्ते में कई भाषाई-संस्कृति के फूल हैं, जिसे बनाये रखना चाहिये।
कार्यक्रम की शुरुआत एक विशेष अनुष्ठान से की गई। जिसमें दक्षिण भारत की नदियों से लाया गया पवित्र जल चित्रकोट में इंद्रावती नदी में पूजन के साथ प्रवाहित किया गया। इस पूजा-अर्चना को स्थानीय बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी शंकरराव शर्मा ने सम्पन्न करवाया। कर्नाटक और विभिन्न राज्यों से आए अतिथियों ने कावेरी, तुंगभद्रा और महानदी का जल इंद्रावती में मिलाकर सांस्कृतिक संगम का प्रतीकात्मक संदेश दिया।
भाषाई और सांस्कृतिक एकता पर जोर
इस कार्यक्रम का उद्देश्य भाषाई और सांस्कृतिक एकता को नई दिशा देना था। पूरे दिन तीन सत्रों में विशेषज्ञों, कलाकारों और पत्रकारों ने भाषा, इतिहास, संस्कृति और मीडिया की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। इस दौरान भारतीय भाषाओं को समझने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक के प्राचीन राजघरानों का इतिहास, भारत की सैन्य विरासत और विजयनगर साम्राज्य के योगदान जैसे विषयों पर रोचक उद्बोधन हुए। इस अवसर पर कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिये।
वरिष्ठ वक्ताओं ने रखे विचार-
बस्तर राज के महाराज कमलचंद भंजदेव ने एकता का संदेश देते हुए कहा कि देश को आगे बढ़ाने में हम सबको भाषा और संस्कृति के स्तर पर एक रहना होगा। हम सब अपने पूर्वजों के सदकार्यों के कारण ही आज विकास कर रहे हैं।
विजयनगर हम्पी के महाराजा कृष्णदेव राय ने कहा हमें अपने विरासत पर गर्व करना चाहिए। प्राचीन राजाओं ने जिस संस्कृति को संरक्षित किया, उस गौरवशाली भाषा-संस्कृति को सुरक्षित और समृद्ध करना हम सबका कर्त्तव्य है।
फिल्म निर्माता गंगासागर पांडा ने कहा कि भाषा कोई भी हो पर मर्यादित हो। छत्तीसगढ़ में प्रकृति का सम्मान किया जाता है इसलिए प्रकृति ने भी इस प्रदेश को सुरक्षा और सौंदर्य प्रदान किया है।
दूसरे सत्र में भाषाई समरसता में फिल्मों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान गंगासागर पांडा निर्देशित छत्तीसगढ़ी फिल्म 'बलि' का टीज़र लॉन्च किया गया। इस फिल्म की अभिनेत्री रीतिका यादव उपस्थित रहीं।
पूरे आयोजन में पद्मिनी ओक, विंग कमांडर सुदर्शन, गंगासागर पांडा, उदय रघुनाथ बिरजे और रविकुमार अय्यर, आरजे नमित आदि प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
रितु वर्मा और निर्मला हेंगड़े की मनमोहक प्रस्तुति ने बांधा समा
वहीं छत्तीसगढ़ की पंडवानी की प्रख्यात गायिका रितु वर्मा ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से सबको मंत्रगुग्ध कर दिया। प्रख्यात कलाकार निर्मला हेंगड़े के यक्षगान ने कार्यक्रम में समा बांध दिया। कार्यक्रम के आयोजक आकाश वर्मा, सीमा महोत्रा वर्मा और ऋग्विता रहे।