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सरकारी दफ्तर में हो रहा हेलमेट पहनकर काम
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 07 Aug 2014 12:30 PM IST
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यह तस्वीर है छत्तीसगढ़ की राजधानी के जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक कक्ष की। लगभग 34 साल पुराना भवन बेहद जर्जर हो चुका है। कभी छत से प्लास्टर टूटकर गिर रहा है तो कभी पानी टपकता है। ऐसे में सहायक प्रबंधक सुनील बघेल हेलमेट पहनकर यहां का कामकाज निपटाते हैं।
सीजीखबर के अनुसार यहां से सालाना करोड़ों रुपये का कर्ज जारी होता है और इसके लिए लगातार लोगों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसी बात भी नहीं की इसकी जानकारी वरिष्ठ अफसरों को न हो। उनको समय समय पर अवगत कराने के बाद भी जान जोखिम में डाल यहां के कर्मियों को नौकरी करना पड़ रहा है।
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक सुनील बघेल कहते हैं कि यहां की बिल्डिंग पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। सुधार के लिए अधिकारियों को कह चुके हैं लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मैं जहां बैठता हूं, वहां की छत का प्लास्टर कभी भी गिर सकता है। बारिश होने पर पानी टपकता है। इस वजह से मुझे हेलमेट पहनकर काम करना पड़ रहा है।
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जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के मुख्य प्रबंधक पीके शुक्ला कहते हैं कि बिल्डिंग 1979-80 में बनी है। अब पुरानी हो गई है। तत्काल सुधार के लिए लिखता हूं, बारिश खत्म होते ही मेंटेनेंस का काम होगा। बहरहाल विभाग के कर्मी दहशत के साये में आज भी काम करने को मजबूर हैं।
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सीजीखबर के अनुसार यहां से सालाना करोड़ों रुपये का कर्ज जारी होता है और इसके लिए लगातार लोगों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसी बात भी नहीं की इसकी जानकारी वरिष्ठ अफसरों को न हो। उनको समय समय पर अवगत कराने के बाद भी जान जोखिम में डाल यहां के कर्मियों को नौकरी करना पड़ रहा है।
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छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक सुनील बघेल कहते हैं कि यहां की बिल्डिंग पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। सुधार के लिए अधिकारियों को कह चुके हैं लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मैं जहां बैठता हूं, वहां की छत का प्लास्टर कभी भी गिर सकता है। बारिश होने पर पानी टपकता है। इस वजह से मुझे हेलमेट पहनकर काम करना पड़ रहा है।
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जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के मुख्य प्रबंधक पीके शुक्ला कहते हैं कि बिल्डिंग 1979-80 में बनी है। अब पुरानी हो गई है। तत्काल सुधार के लिए लिखता हूं, बारिश खत्म होते ही मेंटेनेंस का काम होगा। बहरहाल विभाग के कर्मी दहशत के साये में आज भी काम करने को मजबूर हैं।