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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   CG News: Memories of Chhattisgarh renowned Hindi writer Vinod Kumar Shukla

'दीवार में एक खिड़की रहती थी' के जादूगर विनोद कुमार शुक्ल की 30 लाख की रायल्टी ने तोड़ा था भ्रम: मची थी खलबली

Tue, 23 Dec 2025 10:14 PM IST
Lalit Kumar Singh ललित कुमार सिंह
Updated Tue, 23 Dec 2025 10:14 PM IST
सार

Famous Hindi writer Vinod Kumar Shukla: हिंदी उपन्यास 'नौकर की कमीज', 'खिलेगा तो देखेंगे' और 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' से हिंदी साहित्य जगत में वैश्विक पहचान बनाने वाले छत्तीसगढ़ के प्रख्यात हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल हमारे बीच नहीं रहे।

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CG News: Memories of Chhattisgarh renowned Hindi writer Vinod Kumar Shukla
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

Famous Hindi writer Vinod Kumar Shukla: हिंदी उपन्यास 'नौकर की कमीज', 'खिलेगा तो देखेंगे' और 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' से हिंदी साहित्य जगत में वैश्विक पहचान बनाने वाले छत्तीसगढ़ के प्रख्यात हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल हमारे बीच नहीं रहे। अब हमेशा के लिये उनकी कलम थम गई है। मंगलवार को 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से साहित्य प्रेमियों में शोक की लहर है। देश-प्रदेश के सभी उपन्यासकार, साहित्यकार, रचनाकार, कथाकार  और कवि शोक में डूबे हुए हैं।
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साल 1979 में उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज', ‘खिलेगा तो देखेंगे (वर्ष 1996), 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' (वर्ष 1970), ‘हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी' और बौना पहाड़ (वर्ष 2011), ‘यासि रासा त'(वर्ष 2016) और ‘एक चुप्पी जगह’ (वर्ष 2018) प्रकाशित हुईं। इन सभी रचनाओं ने हिंदी उपन्यास की धारा को एक नया मोड़ दिया। इन रचनाओं से प्रभावित होकर फिल्मकार मणिकौल ने 'नौकर की कमीज' उपन्यास पर  बॉलीवुड फिल्म भी बनाई है। शुक्ल के दूसरे उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। वे हिंदी साहित्य में अपने प्रयोगधर्मी लेखन के लिए प्रख्यात रहे हैं। उनकी लेखनी सरल सहज और अद्वितीय शैली के लिए जानी जाती है। उनकी कहानियों ने घरेलू और उपेक्षित जीवन को अद्भुत कथा-शिल्प में पिरोया। उनका पहला कविता संग्रह ‘लगभग जय हिन्द’ साल 1971 में प्रकाशित हुआ था। साल 2023 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय साहित्य में उपलब्धि के लिए 2023 का पेन/नाबोकोव पुरस्कार के लिए चुना गया था। वे भारतीय एशियाई मूल के पहले लेखक थे, जिन्हें इस सम्मान से नवाजा गया था। 
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साल 2024 में 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित
हिंदी साहित्य जगत में उनके अद्वितीय योगदान, विशिष्ट लेखन शैली और सृजनात्मकता के लिये साल 2024 में 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे छत्तीसगढ़ के पहले लेखक हैं, जिन्हें इस सम्मान से पुरस्कृत किया गया है। शुक्ल को उनके प्रकाशन ‘हिंद युग्म’ की ओर से महज छह महीने में 30 लाख रुपये की रायल्टी दिए जाने की खबर ने हिंदी साहित्य जगत में खलबली मचा दी थी। रायपुर में में 20 सितंबर को आयोजित 'चौथे हिंद युग्म उत्सव' शुक्ल को रायल्टी का प्रतीकात्मक चेक सौंपा गया था। इस असाधारण सफलता पर हिंद युग्म के संस्थापक और संपादक शैलेश भारतवासी शैलेश ने इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय शुक्ल के लेखन को दिया था।
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उन्होंने कहा था कि "जब किसी लेखक की रचनाएं पाठकों के मन-मस्तिष्क को छूती हैं, तो उसका चमत्कार तेजी से फैलता है। हिंदी किताबों की बिक्री हमेशा चुनौती रही है इसलिए लाखों की रायल्टी पर लोगों में संशय स्वाभाविक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विनोद कुमार शुक्ल की सफलता इसलिए खास है क्योंकि इतने कम समय में इतनी बड़ी रायल्टी किसी पुराने हिंदी लेखक को नहीं मिली थी।








 'शायद मैं अपना काम पूरा न कर पाऊं…'
उस समय कहा था कि मैंने जीवन में बहुत कुछ देखा है। बहुत कुछ महसूस किया है, लेकिन मैं बहुत कम लिख पाया हूं। जब मैं सोचता हूं कि मुझे कितना कुछ लिखना बाकी था, तो ऐसा लगता है कि बहुत कुछ अभी बाकी है। जब तक मैं जीवित हूं। मैं अपनी बची हुई रचनाएं पूरी करना चाहता हूं, लेकिन शायद मैं अपना काम पूरा न कर पाऊं… इसी वजह से मैं एक बड़ी दुविधा में हूं। मैं लेखन के माध्यम से अपना जीवन जीना चाहता हूं, लेकिन मेरा जीवन तेजी से अपने अंत की ओर बढ़ रहा है, और मुझे नहीं पता कि इतनी जल्दी कैसे लिखूं, इसलिए मुझे थोड़ा अफसोस हो रहा है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि “मैं यह नहीं कह सकता कि (पुरस्कार) मीठा है क्योंकि मैं मधुमेह रोगी हूं।” उन्हें अपनी शारीरिक अस्वस्थता से अपनी लेखनी के प्रभावित होने की पूरी आशंका थी। जिसे वे जाहिर किया करते थे। 
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