आंख में मक्खी ने दिए अंडे, लार्वा ने खाया पूरा अंग
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80 साल का एक बुजुर्ग। आंखों में बचपन से कम दिखता था लेकिन कोई खास परेशानी नहीं इसलिए कभी किसी डॉक्टर को नहीं दिखाया।
फिर अचानक ही कुछ महीनों पहले आंखों में परेशानी होने लगी और जब अस्पताल पहुंचे तो उनकी एक आंख की रोशनी जा चुकी थी।
डॉक्टरों दावा है कि, इस बीमारी की पहचान छत्तीसगढ़ में पहली बार हुई है। बेमेतरा निवासी बहार सिंह (80) राजधानी के निजी नेत्र चिकित्सालय में भर्ती हैं। घर वालों के मुताबिक उनकी आंख से खून भी बहने लगा था और बाहरी हिस्से गलने लगे थे।
मक्खी ने दिए आंखों में अंडे
पढ़कर शायद आपको एक बारगी यकीन नहीं हो लेकिन इस बुजुर्ग की आंख में मक्खी ने अंडे दे दिए जिस वजह से उन्हें ऑक्यूलर मियेसिस नामक बीमारी हो गई थी।
डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि बहार सिंह की आंख की रोशनी चली गई है। इन्फेक्शन काफी बढ़ गया है। इसे ठीक करने के लिए ऑपरेशन करना होगा।
डॉक्टरों ने दो ऑपरेशन कर बुजुर्ग की आंख से मक्खी के 8 लार्वा निकाले। दो ऑपरेशन के बाद दर्द गया लेकिन आंख नहीं बचाई जा सकी।
...तो बाकी अंग भी खराब हो जाते
डॉक्टरों के मुताबिक बहार सिंह की आंख में काफी पहले चोट लगी थी। एक माह पहले ही दर्द शुरू हुआ था। आंख में लाली आ गई थी और मवाद जैसा द्रव निकलने लगा था।
प्राथमिक उपचार से राहत नहीं मिलने पर आंख से खून भी आने लगा। मरीज को 24 मई को रायपुर लाकर भर्ती किया गया। डॉ. चारूदत्त ने बताया कि, मक्खी ने बहार सिंह की आंख में अंडे दिए थे, जिससे एक महीने में ही उसकी आंख खराब हो गई।
आंख के आईबॉल्स को लार्वा खा बैठे। पलक में छेद हो गई। यदि लार्वा जल्द नहीं निकाले जाते तो नाक, कान और मस्तिष्क के भी खराब होने का खतरा था।
भीतर और बाहर का हिस्सा खाया
छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले के बेमेतरा इलाके में रहने वाले 80 वर्षीय बहार सिंह साहू को बाईं आंख से बचपन से साफ नहीं दिखाई देता था। लेकिन उन्हें इससे कोई शिकायत नहीं थी।
दो तीन महीने पहले ही उन्हें आँख में शिकायत शुरू हुई लेकिन न तो उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया न उनके परिवार ने।
धीरे-धीरे लार्वा अंडों का रूप लेते गए और आंख के अंदर और बाहर का हिस्सा खाते गए।
आंख से निकलने लगा खून
जब परिवार के लोगों ने इलाज करवाया तो यहां तब नौबत पहुंच चुकी थी कि पीड़ित बुजुर्ग की आंख से खून तक निकलने लगता था।
और जब परिवार के लोगों ने देखा कि आंखों के बाहर का हिस्सा भी गलता शुरू हो गया है तो उन्होंने अस्पताल के लिए दौड़ लगाई।
डॉक्टर इस मामले को देखकर हैरान रह गए क्योंकि छ्त्तीसगढ़ में ऐसा पहला देखने को मिला। चार डॉक्टर्स की टीम बनी और डॉक्टर्स ने दो राउंड में यह बड़ी सर्जरी पूरी की।
यह है ऑक्यूलर मियेसिस
अंगों में चोट या घाव पर जब मक्खियां बैठती हैं तो इससे मेगट्स (लार्वा) पनपते हैं।
आंख में भी इसी तरह चोट या जख्म होने पर मक्खियों से मेगट्स बनते हैं। प्रारंभिक अवस्था में लार्वा अंदर ही अंदर जख्म को और बढ़ा देता है।
इसे ऑक्यूलर मियेसिस कहा जाता है। इस बीमारी को लेकर परेशानी यह है कि लोग इस बीमारी के बारे में जानते भी नहीं है। छत्तीसगढ़ में भी यह पहला मामला था। डॉक्टरों के मुताबिक देश में अभी तक ऑक्यूलर मियेसिस के बस 20 मामले ही सामने आए हैं।