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सीजी पीएससी: हाईकोर्ट में पूरी रिपोर्ट और जवाब पेश करेगा शासन, विधायक ननकीराम कंवर ने उठाया सवाल

Wed, 20 Sep 2023 08:58 PM IST
श्याम जी. सीजी पीएससी: हाईकोर्ट में पूरी रिपोर्ट और जवाब पेश करेगा शासन, अगली सुनवाई के बाद होगा फैसला
सीजी पीएससी: हाईकोर्ट में पूरी रिपोर्ट और जवाब पेश करेगा शासन, अगली सुनवाई के बाद होगा फैसला Published by: श्याम जी. Updated Wed, 20 Sep 2023 08:58 PM IST
सार

पीएससी चयन में गड़बड़ी के मामले में राज्य ने कहा कि मामले की स्वयं जांच कर हाईकोर्ट के समक्ष पूरी रिपोर्ट और जवाब पेश करेगा। शासन के इस वक्तव्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने याचिका की अगली सुनवाई एक सप्ताह के बाद रखी है।

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state government will present complete report in High Court in irregularities in PSC selection case
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीएससी चयन में गड़बड़ी के मामले में शासन ने कहा कि मामले की स्वयं जांच कर हाईकोर्ट के समक्ष पूरी रिपोर्ट और जवाब पेश करेगा। साथ ही जब तक मामले के अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक इस विषय को बढ़ावा न देकर जिन व्यक्तियों पर आरोप लगा है और उनकी नियुक्ति नहीं हुई है, उसको आगे अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। जिनकी नियुक्तियां हो चुकी हैं, वह यथास्थिति न्यायालय के आदेश के अधीन रहेंगी। 

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शासन के इस वक्तव्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने याचिका की अगली सुनवाई एक सप्ताह के बाद रखी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार तथा पीएससी को निर्देशित किया है कि जो सूची याचिकाकर्ता के द्वारा पेश की गई है उसके तथ्यों की सत्यता के संबंध में भी जांच कर लें। इसके अलावा याचिकाकर्ता को निर्देशित किया गया है कि वह चयनित व्यक्तियों को पक्षकार बनाए और अपनी याचिका में निर्धारित संशोधन कर पेश करें। न्यायालय के द्वारा याचिकाकर्ता को भी सचेत किया गया है कि अगर याचिकाकर्ता की जानकारी गलत पाई गई तो उसके खिलाफ भी न्यायोचित कार्यवाही की जाएगी।
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बता दें कि अपनी याचिका में विधायक ननकीराम कंवर ने राजभवन के सचिव अमृत खलको के बेटे और बेटी के डिप्टी कलेक्टर बनने के साथ ही पीएससी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के कई रिश्तेदारों के साथ ही कई नेताओं के रिश्तेदारों के चयन पर सवाल उठाया है। याचिकाकर्ता के पक्षों को सुनकर हाईकोर्ट ने भी हैरानी जताई है। चीफ जस्टिस के मुताबिक पीएससी सहित दूसरी संस्था में अधिकारियों के बच्चे का चयन होना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसा क्या संयोग है कि पीएससी चेयरमैन के करीबी रिश्तेदारों का चयन हुआ है। यह बहुत गलत बात है। कोर्ट ने कहा कि इनकी नियुक्ति रोक दी जानी चाहिए। डिवीजन बेंच ने चेयरमैन,अधिकारी और सत्ताधारी दल के नेताओं के करीबियों के 18 पदों की नियुक्ति की जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं।

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