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खुशखबरीः पंजाब यूनिवर्सिटी में अब होगा पानी का एक्स-रे, लगाया जा रहा है ऐसा सिस्टम

Thu, 24 Jan 2019 03:12 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 24 Jan 2019 03:12 PM IST
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Xray of Water in Punjab University Chandigarh Saf Lab
रिसर्च - फोटो : demo pic
पानी पर रिसर्च करने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। पीयू में एक्स-रे फोटो इलेक्ट्रोन व वाटर प्यूरीफिकेशन सिस्टम लगने जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इन मशीनों के अलावा एक दर्जन अन्य मशीनें भी पीयू की सैफ लैब के जरिये खरीदी जाएंगी जो रिसर्च को और आसान बनाएंगी। देशभर में 13 सैफ लैब हैं। इनमें से पंजाब विश्वविद्यालय की सैफ लैब अत्याधुनिक है। यहां अधिकांश सुविधाएं रिसर्च स्कॉलर को मिल जाती हैं। रसायनों की जांच आदि यहां हो जाती है। देशभर से यहां नमूने जांच को आते हैं।
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रिसर्च स्कॉलर, शिक्षक व इंडस्ट्री से हर साल 13 से 14 हजार नमूने जांच को आते हैं। इससे पीयू की आय भी बढ़ रही है। डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक पीयू यहां से कमा रहा है। धीरे-धीरे लैब का विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में वीसी प्रो. राजकुमार के आदेश पर पिछले माह पीयू ने केंद्र सरकार से दो दर्जन उपकरणों के लिए प्रस्ताव भेजा था। 22 जनवरी को दिल्ली में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक हुई। सूत्रों का कहना है कि कमेटी ने यह प्रस्ताव पास कर दिया। यह प्रस्ताव लगभग 19 करोड़ का है।
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इन उपकरणों को मिली मंजूरी
- एक्स-रे फोटो इलेक्ट्रोन
- स्पेक्ट्रोस्कॉपी
- सिंगल मोलिक्यूल एक्स-रे
- वाइब्रेटिंग सैंपल
- मैग्नेटोमीटर
- नैनो इंडेंटर
- जेटा पोटेंशियल
- इलेक्ट्रो केमिकल वर्क स्टेशन
स्पेक्ट्रोस्कॉपिक इलिप्सोमीटर

आयरन, तांबा, आर्सेनिक का लग जाएगा पता
पानी में कई तत्व होते हैं जो शरीर के लिए जरूरी भी होते हैं लेकिन उनकी अधिकता हो जाती है तो उससे शरीर को नुकसान होता है। आर्सेनिक सबसे खतरनाक होता है। इसकी जांच वाटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम से हो जाएगी। पानी में इन तत्वों का पता लगाने के लिए रिसर्च स्कॉलर नमूनों की जांच कराते हैं लेकिन उपकरणों के अभाव के कारण उन्हें दिक्कतें होती हैं। बताया जाता है कि यह सिस्टम हर दिन में 90 से 110 नमूनों की जांच कर सकेगा। एक्स-रे के जरिये भी पानी के इन तत्वों का पता लग जाएगा। साथ ही ठोस पदार्थों की जानकारी भी मिल जाएगी। एलिप्सोमीटर से माइक्रोन की फिकनेस का पता किया जा सकेगा।
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रसायनों की जांच करना जाना
कश्मीर विश्वविद्यालय से आए 60 विद्यार्थियों ने रसायनों की जांच करना सीख लिया है। अब उन्हें मशीनों के रखरखाव का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह कार्य दो दिन में पूरा हो जाएगा। उसके बाद यह विद्यार्थी अपने विश्वविद्यालय में जाकर सीखे कार्यों का अभ्यास करेंगे।


वाटर प्यूरीफिकेशन सिस्टम से पानी के तत्वों की मात्रा का पता लग जाएगा। यह रिसर्च करने वाले विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होगा। जैसे ही इन उपकरणों के लिए रकम मिलेगी तो आगे का काम शुरू करवा दिया जाएगा।
- प्रो. एसके मेहता, निदेशक, सैफ लैब
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