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पंजाब यूनिवर्सिटी में हॉस्टल खाली कराने के विरोध में छात्रों का घंटों हंगामा, सुरक्षाकर्मियों से हाथापाई
Sat, 04 Jul 2020 12:12 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2020 12:12 PM IST
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पीयू वीसी कार्यालय के गेट को धक्का देते छात्र
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टल छात्रों से खाली करवाने के विरोध में विद्यार्थियों ने वीसी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। दिनभर कोई अधिकारी उनकी बात सुनने नहीं पहुंचे तो छात्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने हंगामा तेज कर दिया और नारेबाजी की।
वीसी कार्यालय का गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन छात्र कामयाब नहीं हो पाए। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स ने उन्हें रोका। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों से नोकझोंक के बाद हाथापाई की नौबत भी आई। आखिर में तीन वार्डन पहुंचे और छात्रों की बात सुनीं। शनिवार को सुबह 11 बजे बैठक में इस प्रकरण पर निर्णय लिया जाएगा। उसके बाद छात्र शांत हुए।
वीरवार को कुछ वार्डन ने हॉस्टलों में जाकर छात्रों से कहा कि वह हॉस्टल खाली कर दें और अपने घर चले जाएं। कहा गया कि कोरोना कभी भी बढ़ सकता है। ऐसे में उन्हें दिक्कतें हो सकती हैं। पीयू ने छात्रों के हितों को ही ध्यान में रखा, लेकिन छात्र घर जाने को तैयार नहीं थे। छात्रों ने यह बात एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को बताई तो वह विरोध पर उतर आए।
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शुक्रवार को सुबह 9.00 बजे हॉस्टल के छात्र व एनएसयूआई के कार्यकर्ता पीयूसीएससी के पूर्व उपाध्यक्ष राहुल कुमार, मुकुल के नेतृत्व में वीसी कार्यालय पहुंच गए। वहां धरना देना शुरू कर दिया। उसके बाद नारेबाजी की। धरना देते देते दोपहर के दो बज गए, लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी बात सुनने नहीं पहुंचा।
उसके बाद छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पहुंच गया। उन्होंने नारेबाजी और तेज कर दी। खतरा भांपकर पुलिस फोर्स बुला ली गई। उसके बाद छात्रों ने वीसी कार्यालय में घुसने की कोशिश की तो सुरक्षा कर्मियों ने गेट बंद कर दिया। इस गेट को खोलने की कोशिश की गई। उसके बाद सभी छात्रों ने गेट को खूब हाथों से बजाया और धक्के मारे, लेकिन गेट नहीं टूटा।
सुरक्षा कर्मियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की। इस दौरान धक्का मुक्की भी हो गई। हंगामा बढ़ता जा रहा था। उसके बाद पूर्व उपाध्यक्ष राहुल ने डीएसडब्ल्यू से बात की। उन्होंने तीन वार्डन छात्रों की बात सुनने को भेजे। वार्डन आए और उन्होंने छात्रों की समस्या सुनी। कहा कि इस प्रकरण में शनिवार को दिन में 11 बजे बैठक होगी। इसमें निर्णय लिया जाएगा। छात्रों की मांग पर इस बैठक में पूर्व उपाध्यक्ष राहुल कुमार भी शामिल होंगे जो छात्रों की बात को रख सकेंगे। उसके बाद छात्र शांत हुए और अपने घरों को चले गए।
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वीसी कार्यालय का गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन छात्र कामयाब नहीं हो पाए। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स ने उन्हें रोका। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों से नोकझोंक के बाद हाथापाई की नौबत भी आई। आखिर में तीन वार्डन पहुंचे और छात्रों की बात सुनीं। शनिवार को सुबह 11 बजे बैठक में इस प्रकरण पर निर्णय लिया जाएगा। उसके बाद छात्र शांत हुए।
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वीरवार को कुछ वार्डन ने हॉस्टलों में जाकर छात्रों से कहा कि वह हॉस्टल खाली कर दें और अपने घर चले जाएं। कहा गया कि कोरोना कभी भी बढ़ सकता है। ऐसे में उन्हें दिक्कतें हो सकती हैं। पीयू ने छात्रों के हितों को ही ध्यान में रखा, लेकिन छात्र घर जाने को तैयार नहीं थे। छात्रों ने यह बात एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को बताई तो वह विरोध पर उतर आए।
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शुक्रवार को सुबह 9.00 बजे हॉस्टल के छात्र व एनएसयूआई के कार्यकर्ता पीयूसीएससी के पूर्व उपाध्यक्ष राहुल कुमार, मुकुल के नेतृत्व में वीसी कार्यालय पहुंच गए। वहां धरना देना शुरू कर दिया। उसके बाद नारेबाजी की। धरना देते देते दोपहर के दो बज गए, लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी बात सुनने नहीं पहुंचा।
उसके बाद छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पहुंच गया। उन्होंने नारेबाजी और तेज कर दी। खतरा भांपकर पुलिस फोर्स बुला ली गई। उसके बाद छात्रों ने वीसी कार्यालय में घुसने की कोशिश की तो सुरक्षा कर्मियों ने गेट बंद कर दिया। इस गेट को खोलने की कोशिश की गई। उसके बाद सभी छात्रों ने गेट को खूब हाथों से बजाया और धक्के मारे, लेकिन गेट नहीं टूटा।
सुरक्षा कर्मियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की। इस दौरान धक्का मुक्की भी हो गई। हंगामा बढ़ता जा रहा था। उसके बाद पूर्व उपाध्यक्ष राहुल ने डीएसडब्ल्यू से बात की। उन्होंने तीन वार्डन छात्रों की बात सुनने को भेजे। वार्डन आए और उन्होंने छात्रों की समस्या सुनी। कहा कि इस प्रकरण में शनिवार को दिन में 11 बजे बैठक होगी। इसमें निर्णय लिया जाएगा। छात्रों की मांग पर इस बैठक में पूर्व उपाध्यक्ष राहुल कुमार भी शामिल होंगे जो छात्रों की बात को रख सकेंगे। उसके बाद छात्र शांत हुए और अपने घरों को चले गए।
एनएसयूआई.. जाने के साधन नहीं, परीक्षा हुई तो कैसे वापस आएंगे
एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने कहा कि छात्र इसलिए भी घर नहीं जाना चाहते हैं कि कहीं उनके माध्यम से कोरोना घर तक पहुंच गया तो पूरा परिवार प्रभावित होगा। साथ ही पीयू परीक्षाएं करवाने की बात कह रहा है। यदि घर चले गए तो कैसे वापस लौटेंगे। जाने के लिए यातायात के साधन भी नहीं हैं। पीयू को छात्रों की समस्याओं को देखना चाहिए।
पीयू प्रशासन.. हॉस्टल से अधिक घर सुरक्षित, छात्र जाएं
पीयू के हॉस्टलों में 140 स्टूडेंट रह रहे हैं। केंद्र सरकार की गाइड लाइन हैं कि छात्रों को सुरक्षित रखा जाए। वह घर पर रहें। शिक्षण संस्थान अभी न खोले जाएं, लेकिन यह विद्यार्थी पीयू कैंपस नहीं छोड़ना चाहते। पीयू ने पिछले दिनों बसों के जरिये छात्र भेजे थे। 40 विद्यार्थी अपने घरों को गए भी थे। जानकारों का कहना है कि इन छात्रों के रहने से लेकर खाने तक के बंदोबस्त करने में कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं। वार्डन अपने परिवारों को समय नहीं दे पा रहे हैं जबकि अन्य शिक्षक अपने परिवारों के साथ हैं।
मेस में काम करने वाले एक दर्जन से अधिक लोग अपने परिवार के पास नहीं जा पा रहे हैं। छात्रों की भीड़ पीयू मेंस में पहुंचती है तो कोरोना आदि का खतरा रहता है। यदि कोरोना फैला तो सभी छात्र संक्रमित होंगे। पीयू इन छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए ही यह निर्णय ले रहा है कि यह अपने घर सुरक्षित रह सकेंगे। पीयू में पहले ही दो केस कोरोना के आ चुके हैं। बावजूद इसके छात्र यहां से जाने को तैयार नहीं।
छात्र हॉस्टलों में रहकर परीक्षा होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब 31 जुलाई तक पीयू बंद है। स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पास के छात्रों से घर जाने के लिए कहा गया है। यह घर जाने का उचित समय है। यदि कोरोना पीक पर पहुंचा तो दिक्कतें होंगी। हम छात्रों का हित देख रहे हैं। साथ ही पीयू का भी। विदेशी छात्रों को जाने के लिए नहीं कहा गया है।
- प्रो. एसके तोमर, डीएसडब्ल्यू
पीयू प्रशासन.. हॉस्टल से अधिक घर सुरक्षित, छात्र जाएं
पीयू के हॉस्टलों में 140 स्टूडेंट रह रहे हैं। केंद्र सरकार की गाइड लाइन हैं कि छात्रों को सुरक्षित रखा जाए। वह घर पर रहें। शिक्षण संस्थान अभी न खोले जाएं, लेकिन यह विद्यार्थी पीयू कैंपस नहीं छोड़ना चाहते। पीयू ने पिछले दिनों बसों के जरिये छात्र भेजे थे। 40 विद्यार्थी अपने घरों को गए भी थे। जानकारों का कहना है कि इन छात्रों के रहने से लेकर खाने तक के बंदोबस्त करने में कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं। वार्डन अपने परिवारों को समय नहीं दे पा रहे हैं जबकि अन्य शिक्षक अपने परिवारों के साथ हैं।
मेस में काम करने वाले एक दर्जन से अधिक लोग अपने परिवार के पास नहीं जा पा रहे हैं। छात्रों की भीड़ पीयू मेंस में पहुंचती है तो कोरोना आदि का खतरा रहता है। यदि कोरोना फैला तो सभी छात्र संक्रमित होंगे। पीयू इन छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए ही यह निर्णय ले रहा है कि यह अपने घर सुरक्षित रह सकेंगे। पीयू में पहले ही दो केस कोरोना के आ चुके हैं। बावजूद इसके छात्र यहां से जाने को तैयार नहीं।
छात्र हॉस्टलों में रहकर परीक्षा होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब 31 जुलाई तक पीयू बंद है। स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पास के छात्रों से घर जाने के लिए कहा गया है। यह घर जाने का उचित समय है। यदि कोरोना पीक पर पहुंचा तो दिक्कतें होंगी। हम छात्रों का हित देख रहे हैं। साथ ही पीयू का भी। विदेशी छात्रों को जाने के लिए नहीं कहा गया है।
- प्रो. एसके तोमर, डीएसडब्ल्यू