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घमासान जारी... शिक्षक बोले- पुटा सचिव का पद जिम्मेदारी भरा है, हर बात सीधे और स्पष्ट कहें

Tue, 29 Sep 2020 04:19 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 29 Sep 2020 04:19 PM IST
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clash in punjab university on puta election
Punjab University - फोटो : amar ujala
बेशक पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) का चुनाव फिलहाल स्थगित हो गया हो, लेकिन घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई शिक्षकों ने पुटा सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि यह पद जिम्मेदारी का है और राजनीति से हटकर शिक्षकों से हर बात सीधे और स्पष्ट तौर पर कहें। इस समय पुटा में सिर्फ यही पद सक्रिय है। सही जानकारी शिक्षकों को उपलब्ध कराने का जिम्मा उन्हीं का है। उन्हें किसी पार्टी या ग्रुप में शामिल नहीं होना चाहिए।
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शिक्षकों ने यह भी कहा कि वह नहीं चाहते कि कोरोना के कारण शिक्षकों की जान चुनाव के नाम पर दांव पर लगाई जाए। एक बार चुनाव स्थगित किया गया। उसके बाद फिर क्यों चुनाव के लिए अनुमति मांगी जा रही है। पिछली बार बिना अनुमति मिले चुनावों की घोषणा कर दी गई। उन्होंने सचिव से कहा कि कोरोना से पीड़ित शिक्षकों का हाल जानने की कोशिश करें ताकि उनका दर्द कम हो सके। उन्हें चुनाव से वंचित रखकर उनका दर्द बढ़ाने की कोशिश न करें। पीड़ित शिक्षकों का पत्रों के जरिए मजाकउड़ाया गया है जो ठीक नहीं है। यह भी कहा है कि शिक्षकों को केवल पीयू की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए।
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भाषा की मर्यादा का ख्याल रखना जरूरी
शिक्षकों ने पत्र में कहा है कि ऐसे-ऐसे राजनीति शब्दों वाले पत्र जारी किए गए हैं, जिसमें सचिव के भी हस्ताक्षर हैं। पत्रों में भाषा भी सही प्रयोग नहीं की गई, जो शिक्षकों को करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा है कि रविवार को मृत्युंजय ग्रुप की ओर से जारी पत्र में यह कहा गया है कि पुटा के चुनाव को स्थगित कराकर यह जताया गया है कि सीनेट का चुनाव स्थगित करना ठीक कदम था। शिक्षकों ने जवाब दिया है कि सीनेट व सिंडिकेट में वही ग्रुप है जो यह बात कह रहा है। वही लोग अपने कार्य करवा रहे हैं। किसी का ट्रांसफर का है तो किसी की तैनाती का है। शिक्षकों को केवल पीयू की बेहतरी चाहिए। सीनेट की राजनीति से उनका कोई लेना-देना नहीं। वहीं दूसरी ओर पुटा सचिव ने पहले ही कह दिया है कि वह अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझते हैं और सोच-समझकर कार्य कर रहे हैं।
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बिहार चुनाव की दलील न दी जाए
इन शिक्षकों ने साफ कहा है कि पुटा के सचिव शिक्षकों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, इसलिए उन्हें किसी ग्रुप में न पड़कर शिक्षकों की बात सुननी चाहिए। ग्रुपों की लड़ाई चलती है तो चले, लेकिन शिक्षकों को गुमराह न किया जाना चाहिए। शिक्षकों ने कहा कि वह चुनाव के पक्ष में हैं और इसका विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल शिक्षकों की जान बचाना जरूरी है। बिहार चुनाव की बात मृत्युंजय ग्रुप ने अपने पत्र में कही है। शिक्षकों ने कहा है कि बिहार चुनाव अनलॉक-5 में होगा जबकि अभी अनलॉक-4 चल रहा है। ऐसे में वहां के चुनाव से तुलना न की जाए।


खालिद-सिद्धू ग्रुप कर सकते हैं बड़ा खुलासा
पुटा चुनाव की प्रक्रिया व प्रचार के दौरान एक-दो शिक्षकों ने ऐसे कार्य किए जो अपराध की श्रेणी में आते हैं। ऐसे शिक्षकों के खिलाफ खालिद-सिद्धू ग्रुप बड़ा खुलासा करने की तैयारी में है। मंगलवार तक सभी तथ्य सामने आ जाएंगे। माना जा रहा है कि इस खुलासे के बाद बहुत स्थितियां साफ हो जाएंगी कि शिक्षकों का असली हितैषी कौन है। शिक्षकों को भी इस खुलासे का इंतजार है। खुलासा किस बात से जुड़ा है, अभी यह साफ नहीं है, लेकिन पीयू में सोमवार को इसकी चर्चाएं रहीं।
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