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पंजाब यूनिवर्सिटीः शिक्षकों को प्रमोशन के आवेदनों की जांच में मिल सकती है राहत, और फायदा भी

Tue, 24 Dec 2019 02:58 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 24 Dec 2019 02:58 PM IST
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Punjab University Teachers can get relief in investigation of promotion applications
फाइल फोटो
पीयू के शिक्षकों को प्रमोशन के आवेदनों की जांच में राहत मिल सकती है। इसके लिए सिंडिकेट स्क्रीनिंग कमेटी का रोल खत्म किया जा सकता है। ऐसा होने पर दर्जनों शिक्षकों को लाभ मिलेगा। साथ ही उनके प्रमोशन भी जल्दी हो जाएंगे और ग्रेड पे का लाभ भी मिल जाएगा।
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पंजाब यूनिवर्सिटी के दर्जनों शिक्षकों को प्रमोशन का लाभ देना था। इसी क्रम में उनसे यूजीसी की पुरानी गाइड लाइन के मुताबिक आवेदन करवाए गए थे, मामला ऑडिट में पहुंचा तो उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति दायर की। उन्होंने नई गाइड के मुताबिक शिक्षकों से आवेदन करवाने का सुझाव दिया।
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उसी के तहत शिक्षकों से दोबारा आवेदन करवाए जा रहे हैं। उसी बीच इन आवेदनों की जांच के लिए सिंडिकेट की कमेटी बना दी गई। इसको लेकर शिक्षकों में आक्रोश पनप गया। यह प्रकरण सीनेट में पहुंचा तो कुछ मेंबर्स ने प्रमुखता से शिक्षकों का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि जब विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी आवेदनों की जांच करेगी तो फिर सिंडिकेट की कमेटी का क्या मतलब।
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सिंडिकेट की कमेटी में आवेदन जाएंगे तो प्रमोशन के कार्य में देरी होगी। कुछ मेंबर्स ने आरोप लगाए थे कि शिक्षकों के प्रमोशन के बहाने राजनीति होगी। जानबूझकर प्रमोशन के मामले लटकाए जाएंगे। इससे शिक्षकों का नुकसान होगा। सूत्रों का कहना है कि सीनेट में यह मामला उठने के बाद शिक्षकों को राहत देने की तैयारी चल रही है।

सिंडिकेट की स्क्रीनिंग कमेटी को हटाया जा सकता है या फिर विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी में ही दो या तीन सिंडिकेट के सदस्यों को शामिल किया जा सकता है। यानी दो कमेटियों की जांच की बजाय एक ही कमेटी आवेदनों की स्क्रीनिंग कर लेगी।

शॉर्टली पर मंथन शुरू
यूजीसी ने शिक्षकों के प्रमोशन की जो नई गाइड लाइन बनाई हैं उसमें उन शिक्षकों को भी प्रमोशन देने की बात कही है, जिनके प्रोजेक्ट जल्द से जल्द पूरे होने वाले हों। इस अवधि को यूजीसी ने शॉर्टली का नाम दिया है। शॉर्टली को पूरी तरह परिभाषित नहीं किया गया। इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।


हालांकि पीयू के विशेषज्ञों ने शॉर्टली का मतलब अधिकतम एक से सवा साल लगाया है। वहीं कुछ लोग इस अवधि को तीन साल तक मान रहे हैं, लेकिन तीन साल का कार्यकाल प्रमोशन में शामिल नहीं किया जा सकता। इसको लेकर पीयू की कमेटी मंथन में लगी है। साथ ही यूजीसी को भी पत्र भेजकर शॉर्टली की अवधि जानी गई है। नए साल में इस प्रकरण का हल होने की उम्मीद है।
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