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खुशखबरीः पंजाब में 30 साल बाद होंगे छात्र संघ चुनाव, CM ने किए कई ऐलान
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 29 Mar 2018 05:40 PM IST
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कॉलेजों में दाखिले के लिए मारामारी
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब में करीब तीन दशक बाद छात्र संघ चुनाव होंगे। आतंकवाद के दौरान पंजाब के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र यूनियनों के चुनाव पर पाबंदी लगा दी गई थी। हालात सामान्य होने के बाद भी इतने साल तक किसी सरकार ने चुनाव कराने की पहल नहीं की। आखिर कांग्रेस ने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव फिर बहाल करने का फैसला किया है। विधानसभा सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते ही सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने छात्र यूनियन चुनाव कराने का एलान किया।
उन्होंने कहा कि इसी सेशन से ये चुनाव कराए जाएंगे। कानून-व्यवस्था को देखते हुए तीन दशक पहले इन पर पाबंदी लगा दी गई थी लेकिन अब हालात सामान्य हैं। पंजाब में भी दिल्ली और पंजाब यूनिवर्सिटी की तरह नियमित चुनाव कराए जाएंगे। जीएनडीयू, पीयू पटियाला, पीटीयू और इनसे संबद्ध सभी कॉलेजों में चुनाव कराए जाएंगे। गौरतलब है कि छात्र संगठनों की लंबे समय से मांग थी कि छात्रसंघ चुनाव बहाल किए जाएं। विधानसभा चुनाव में भी यह मुद्दा उठा था। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विभिन्न छात्र यूनियनों को भरोसा दिया था। मैनिफेस्टो में भी चुनाव बहाल करने का वादा किया था।
छात्र यूनियन चुनाव शुरू होने के बाद सभी पार्टियों में नई युवा लीडरशिप भी सामने आ सकेगी। सीएम ने सदन में एलान किया कि सरकार जल्द ही निजी शिक्षण संस्थानों के लिए रेगुलेटरी बॉडी स्थापित करेगी। संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद मंत्रियों का समूह इसका ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि 2018-19 से राष्ट्रीय हुनर गुणवत्ता ढांचे के मुताबिक पाठ्यक्रम तैयार करने वाला पंजाब पहला सूबा बनेगा। हर शिक्षा ब्लॉक में छह स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम शुरू किया जाएगा। साथ ही 11वीं, बारहवीं में वैकल्पिक विषय के रूप में चाइनीज, फ्रेंच, जर्मन, इटालियन जैसीभाषाएं शुरू की जाएगी।
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हरियाणा को देने के लिए नहीं है पानी
सीएम ने कहा कि पंजाब के पास हरियाणा को देने के लिए बिलकुल पानी नहीं है। हरियाणा के पास हमसे ज्यादा पानी है। उन्हें हमारी नदियों के अलावा यमुना, शारदा से भी पानी मिल रहा है। पंजाब में नदियों का पानी तो कम हुआ ही है, भूजल स्तर की हालत भी बहुत खराब है। 1955 में 10 फीट पर पानी था तो अब 1200 फीट पर है। इसलिए हम किसी भी स्थिति में हरियाणा को पानी नहीं दे सकते।
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उन्होंने कहा कि इसी सेशन से ये चुनाव कराए जाएंगे। कानून-व्यवस्था को देखते हुए तीन दशक पहले इन पर पाबंदी लगा दी गई थी लेकिन अब हालात सामान्य हैं। पंजाब में भी दिल्ली और पंजाब यूनिवर्सिटी की तरह नियमित चुनाव कराए जाएंगे। जीएनडीयू, पीयू पटियाला, पीटीयू और इनसे संबद्ध सभी कॉलेजों में चुनाव कराए जाएंगे। गौरतलब है कि छात्र संगठनों की लंबे समय से मांग थी कि छात्रसंघ चुनाव बहाल किए जाएं। विधानसभा चुनाव में भी यह मुद्दा उठा था। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विभिन्न छात्र यूनियनों को भरोसा दिया था। मैनिफेस्टो में भी चुनाव बहाल करने का वादा किया था।
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छात्र यूनियन चुनाव शुरू होने के बाद सभी पार्टियों में नई युवा लीडरशिप भी सामने आ सकेगी। सीएम ने सदन में एलान किया कि सरकार जल्द ही निजी शिक्षण संस्थानों के लिए रेगुलेटरी बॉडी स्थापित करेगी। संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद मंत्रियों का समूह इसका ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि 2018-19 से राष्ट्रीय हुनर गुणवत्ता ढांचे के मुताबिक पाठ्यक्रम तैयार करने वाला पंजाब पहला सूबा बनेगा। हर शिक्षा ब्लॉक में छह स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम शुरू किया जाएगा। साथ ही 11वीं, बारहवीं में वैकल्पिक विषय के रूप में चाइनीज, फ्रेंच, जर्मन, इटालियन जैसीभाषाएं शुरू की जाएगी।
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हरियाणा को देने के लिए नहीं है पानी
सीएम ने कहा कि पंजाब के पास हरियाणा को देने के लिए बिलकुल पानी नहीं है। हरियाणा के पास हमसे ज्यादा पानी है। उन्हें हमारी नदियों के अलावा यमुना, शारदा से भी पानी मिल रहा है। पंजाब में नदियों का पानी तो कम हुआ ही है, भूजल स्तर की हालत भी बहुत खराब है। 1955 में 10 फीट पर पानी था तो अब 1200 फीट पर है। इसलिए हम किसी भी स्थिति में हरियाणा को पानी नहीं दे सकते।