चंडीगढ़ पीयू का हाल: न लैब खुलीं न हॉस्टल, शोधार्थियों का दर्द-कब पूरा करेंगे शोध और कब मिलेगी नौकरी
पंजाब यूनिवर्सिटी में लगभग दो हजार शोधार्थी हैं। कोरोना के कारण पिछले साल से पीयू बंद है। डेढ़ साल से शोध कार्य रूका हुआ है। ऐसे में शोधार्थी परेशान हैं।
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चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के शोधार्थी परेशान हैं। कोरोना के कारण उनका शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। उस पर पीयू प्रशासन भी कोई मदद नहीं दे रहा है। शिक्षा का महत्वपूर्ण भाग शोध से जुड़ा है जो लॉकडाउन के कारण काफी पिछड़ गया। शोधार्थियों का कहना है कि इसकी पूर्ति के लिए बीच-बीच में समय मिला। पीयू की सरकारी मशीनरी को इसका लाभ उठाना चाहिए था। प्रयोगशाला से लेकर पुस्तकालय, छात्रावासों के रास्ते खोलने थे, लेकिन वही नहीं कर पाए। शोधार्थी भी इन बाधाओं के कारण आगे नहीं बढ़ पाए। वह चिंतित हैं, क्योंकि लगभग डेढ़ साल से शोध काफी पीछे हो गया यानी उन्हें डेढ़ साल शोध के लिए अतिरिक्त चाहिए। उनकी उम्र नौकरी के लिए निकल रही है। कब उनके हाथ में डिग्रियां आएंगी और कब वह नौकरी करेंगे।
पीयू में स्थायी शिक्षकों की संख्या लगभग 700 है। एक प्रोफेसर के पास पांच से छह शोधार्थी शोध कर रहे हैं। वहीं एसोसिएट प्रोफेसर के पास चार व असिस्टेंट प्रोफेसर के पास दो शोधार्थी होते हैं। इस तरह पीयू में शोधार्थियों की संख्या लगभग दो हजार है। पिछले साल कोरोना आया तो छात्रावास बंद कर दिए गए। लॉकडाउन लग गया। लगभग चार माह तक आवाजाही बंद रही।
पिछले साल जुलाई के बाद पीयू ने कार्यालय खोले। उसके बाद लगातार कोरोना से स्थितियां ठीक होती गई। शोधार्थियों का कहना है कि उस समय पीयू को सभी छात्रावासों को शोधार्थियों के लिए खोलना चाहिए था। साथ ही प्रयोगशालाओं से लेकर पुस्तकालय तक की सुविधा दी जानी चाहिए थी, लेकिन वह नहीं हो सका। शोधार्थियों ने खुद संघर्ष किया। जुलाई 2020 से लेकर फरवरी 2021 तक सात माह में हुए नुकसान की पूर्ति शोध की हो सकती थी। उसके बाद कोरोना की दूसरी लहर आई। लॉकडाउन इसमें भी लगा। अब कोरोना की स्थितियां सामान्य हो रही हैं लेकिन शोधार्थियों के सामने वही संकट खड़ा है। पीयू ने न सभी के लिए छात्रावास के ताले खोले और न ही प्रयोगशालाओं के। शोधार्थी समझदार हैं, वह कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए अपना बचाव कर सकते हैं। ऐसे में प्रयोगशालाओं में उनकी आवाजाही पूरी तरह की जानी चाहिए वह भी नहीं हो पा रही।
पीयू शोधार्थियों पर प्रतिबंध न लगाए
कोरोना के कारण शोध काफी प्रभावित हुआ। उसकी पूर्ति लॉकडाउन खुलने के बाद पिछले साल से ही की जानी चाहिए थी। शोधार्थी भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कब शोध पूरा होगा और कब डिग्रियां मिलेंगी। शोधार्थियों के लिए पीयू में कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। - जसवदिंर सिंह, शोधार्थी, जंतु विज्ञान विभाग, पीयू
शोधार्थियों को मिले हर सुविधा
शोधार्थियों को पुस्तकालय की भी आवश्यकता है और प्रयोगशालाओं की भी। रहने के लिए छात्रावास चाहिए। यह सभी सुविधाएं पूरी तरह मिलनी चाहिए, लेकिन इसमें कुछ कमियां दिख रही हैं जिससे शोध गति नहीं पकड़ रहा है। - रोहिल, शोधार्थी, राजनीति शास्त्र
फील्ड का काम नहीं हो पा रहा
शोध में फील्ड वर्क बहुत जरूरी है जो कोरोना के कारण नहीं हो सका। इसके लिए संस्थानों को रास्ते निकालने चाहिए। साथ ही शोध को ऐसा रूप दिया जाए ताकि बेहतर परिणाम के साथ जल्दी पूरा हो सके। - सौंदर्य कुमार दीपक, इतिहास विभाग
शोध के लिए तनावमुक्त दिमाग की आवश्यकता
शोध के लिए तनावमुक्त दिमाग चाहिए। सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। रहने के लिए छत हो, प्रयोग के लिए प्रयोगशाला हो। इन सबके लिए शोधार्थियों को दिक्कतें हुई हैं। इसमें सुधार की आवश्यकता है।- सचिन चहल, शोधार्थी, इतिहास विभाग
जिन शोधार्थियों के शोध का कार्य लंबित है, वे प्रयोगशालाओं में एसओपी के मुताबिक जाकर कार्य कर सकते हैं। छात्रावास भी जरूरत के हिसाब से खोले जा रहे हैं। -प्रो. एसके तोमर, डीएसडब्ल्यू