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क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ ने खाई मात, पिछड़ने के कई कारण आए सामने
Mon, 24 Jun 2019 04:38 PM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 24 Jun 2019 04:38 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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हाल ही में जारी हुई क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में पीयू के पिछड़ने के कई कारण सामने आए हैं। रैंकिंग एजेंसी के मुताबिक, इंप्लायर रेपुटेशन ज्यादा अच्छी नहीं मिली है। इस मानक में 20 अंक मिलते हैं, लेकिन पीयू को पांच से भी कम अंक मिले। साथ ही एकेडमिक रेपुटेशन, फैकल्टी व स्टूडेंट अनुपात में भी पीयू को कम अंक मिले हैं। यही कारण रहा कि पीयू दुनिया के टॉप 1000 यूनिवर्सिटीज में भी जगह नहीं बना पाया। क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग दुनिया की टॉप रैंकिंग एजेंसियों में गिनी जाती है।
क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग के सात पैरामीटर
एकेडमिक रेपुटेशन : 30 अंक
इंप्लायर रेपुटेशन : 20 अंक
फैकल्टी एंड स्टूडेंट्स अनुपात : 10 फीसदी अंक
इंटरनेशनल रिसर्च नेटवर्क : 10 अंक
यूनिवर्सिटी इंटरनेशनल पेपर व प्रति फैकल्टी पेपर : 15
स्टाफ विद ए पीएचडी : 5 अंक
इनबांड और आउटबांड एक्सचेंज स्टूडेंट्स : 10 फीसदी अंक
नोट : 100 अंक में से 40 अंक आने पर ही क्यूएस रैंकिंग की सूची में आते हैं संस्थान आते हैं।
पीयू की स्थिति : पीयू को इससे भी कम अंक मिले। इसी कारण दो साल से पीयू इस रैंकिंग में नहीं आ पा रहा।
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क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग के सात पैरामीटर
एकेडमिक रेपुटेशन : 30 अंक
इंप्लायर रेपुटेशन : 20 अंक
फैकल्टी एंड स्टूडेंट्स अनुपात : 10 फीसदी अंक
इंटरनेशनल रिसर्च नेटवर्क : 10 अंक
यूनिवर्सिटी इंटरनेशनल पेपर व प्रति फैकल्टी पेपर : 15
स्टाफ विद ए पीएचडी : 5 अंक
इनबांड और आउटबांड एक्सचेंज स्टूडेंट्स : 10 फीसदी अंक
नोट : 100 अंक में से 40 अंक आने पर ही क्यूएस रैंकिंग की सूची में आते हैं संस्थान आते हैं।
पीयू की स्थिति : पीयू को इससे भी कम अंक मिले। इसी कारण दो साल से पीयू इस रैंकिंग में नहीं आ पा रहा।
पिछड़ने के अन्य कारण
- पीयू के पास स्टूडेंट्स के मुताबिक शिक्षकों की संख्या कम होना
- फैकल्टी का पूरी तरह पीएचडी न होना
आगे क्या... फैकल्टी की तैनाती के लिए यूजीसी से पीयू को हरी झंडी मिल गई है। अब बजट की व्यवस्था करके पीयू इसकी पूर्ति कर सकता है। माना जा रहा है कि एक से दो साल में फैकल्टी की पूर्ति हो जाएगी और रैंकिंग में इस बिंदु पर अच्छे अंक मिलेंगे।
रैंकिंग में सुधार के लिए अपनाना होगा ये फार्मूला
पीयू को वर्ल्ड रैंकिंग से पहले देश में जारी होने वाली रैंकिंग के मानकों पर शत प्रतिशत खरा उतरना होगा। पहले नैक के मानकों को पूरा करना होगा और उसके बाद भारत सरकार की रैंकिंग निरफ, अटल रैंकिंग के मानकों को पूरा करना होगा। इन मानकों पर खरे उतरने के बाद अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग पर ध्यान देने की जरूरत।
- फैकल्टी का पूरी तरह पीएचडी न होना
आगे क्या... फैकल्टी की तैनाती के लिए यूजीसी से पीयू को हरी झंडी मिल गई है। अब बजट की व्यवस्था करके पीयू इसकी पूर्ति कर सकता है। माना जा रहा है कि एक से दो साल में फैकल्टी की पूर्ति हो जाएगी और रैंकिंग में इस बिंदु पर अच्छे अंक मिलेंगे।
रैंकिंग में सुधार के लिए अपनाना होगा ये फार्मूला
पीयू को वर्ल्ड रैंकिंग से पहले देश में जारी होने वाली रैंकिंग के मानकों पर शत प्रतिशत खरा उतरना होगा। पहले नैक के मानकों को पूरा करना होगा और उसके बाद भारत सरकार की रैंकिंग निरफ, अटल रैंकिंग के मानकों को पूरा करना होगा। इन मानकों पर खरे उतरने के बाद अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग पर ध्यान देने की जरूरत।
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क्या कहते हैं जानकार...
जानकार कहते हैं कि पीयू देश की रैंकिंग पर कम और विदेशी रैंकिंग पर अधिक जोर दे रहा है जो पीयू के लिए ठीक नहीं है। पीयू को पहले जमीन पर काम करना होगा।
पीयू की परफारमेंस..
एक साल से पीयू इस पर ध्यान दे रहा है। उसका सीधा असर अटल रैंकिंग में देखने को मिला।
सभी मानकों की पूर्ति की जाएगी
क्यूएस रैंकिंग में पीछे आने का एक बड़ा कारण फैकल्टी और स्टूडेंट्स अनुपात कम होना है। इसकी पूर्ति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अन्य मानकों की भी पूर्ति की जाएगी।
- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी
पीयू की परफारमेंस..
एक साल से पीयू इस पर ध्यान दे रहा है। उसका सीधा असर अटल रैंकिंग में देखने को मिला।
सभी मानकों की पूर्ति की जाएगी
क्यूएस रैंकिंग में पीछे आने का एक बड़ा कारण फैकल्टी और स्टूडेंट्स अनुपात कम होना है। इसकी पूर्ति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अन्य मानकों की भी पूर्ति की जाएगी।
- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी