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पंजाब यूनिवर्सिटी ने छात्रावास के खर्चों पर चलाई कैंची, अफसरों की गाड़ियों में खूब डलेगा पेट्रोल
Thu, 01 Oct 2020 03:04 PM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 01 Oct 2020 03:04 PM IST
सार
- वर्ष 2020-21 के बजट में बड़ी कटौती, पीयू प्रशासन ने कमेटी के निर्णय पर मुहर लगाई
- जब गाड़ियां एक ही जगह खड़ी हैं, पेट्रोल का खर्च भी 70 फीसदी तक कम किया जाना चाहिए
- कर्मचारियों को नहीं मिलेगा ओवर टाइम, शिक्षक एलटीए का लाभ भी नहीं ले सकेंगे
- पिछले साल 486 करोड़ था बजट, इस बार का 470 करोड़ के आसपास रखने की योजना
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
कोरोना के कारण पंजाब यूनिवर्सिटी का खजाना खाली है। इसे ध्यान में रखते हुए वर्ष 2020-21 के बजट में कैची चलाई है। सबसे बड़ी बात यह है कि छात्रावास के खर्चों में 40 फीसदी कटौती की गई है, लेकिन अफसरों की गाड़ियों में पेट्रोल लगातार डलता रहेगा। इसमें कटौती नहीं की गई। ये गाड़ियां कहीं आ-जा भी नहीं रही हैं।
यह पीयू में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि जब गाड़ियां एक ही जगह खड़ी हैं तो पेट्रोल का खर्च भी 70 फीसदी तक कम किया जाना चाहिए था ताकि पीयू के खजाने में लाखों रुपये बचते। इसके अलावा कर्मचारियों को भी ओवर टाइम नहीं मिलेगा और शिक्षक एलटीए का लाभ भी नहीं ले सकेंगे। पीयू प्रशासन ने कमेटी के इस निर्णय पर मुहर लगा दी है।
ये है बजट का गणित
पीयू का बजट हर साल 450 करोड़ रुपये से अधिक का बनता है। पिछले साल का बजट लगभग 486 करोड़ था। इस बार का बजट 470 करोड़ के आसपास रखने की योजना चल रही है। उसी को लेकर कमेटी बनाई गई ताकि खर्चों में कटौती की जा सके। इस कमेटी ने हर मुद्दे पर बात की, लेकिन उस विषय को छोड़ दिया जिस पर अफसरों का हक था। यानी जिन गाड़ियों में अफसर दौड़ते हैं उन गाड़ियों में अब रोज पेट्रोल नहीं डल रहा है। अधिकारी अपने घरों से काम कर रहे हैं।
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न कहीं निरीक्षण के लिए जा रहे हैं और न किसी अन्य कार्यक्रम में। कार्यालय भी आना है तो उनके घर से उसकी दूरी महज एक से दो किमी ही है। सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल के खर्च के नाम पर खेल कोई नया नहीं है। इसलिए इसके बजट पर कटौती नहीं की गई। सूत्रों का कहना है कि पीयू में 20 गाड़ियों के लिए पेट्रोल खर्च दिया जाता है। साथ ही रिपेयर का भी खर्च शामिल है। पीयू की दो से तीन बसें संचालित हैं। बाकी अधिकारियों की गाड़ियां चलती हैं। इन पर सालाना लगभग 42 लाख रुपये खर्च होता है।
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यह पीयू में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि जब गाड़ियां एक ही जगह खड़ी हैं तो पेट्रोल का खर्च भी 70 फीसदी तक कम किया जाना चाहिए था ताकि पीयू के खजाने में लाखों रुपये बचते। इसके अलावा कर्मचारियों को भी ओवर टाइम नहीं मिलेगा और शिक्षक एलटीए का लाभ भी नहीं ले सकेंगे। पीयू प्रशासन ने कमेटी के इस निर्णय पर मुहर लगा दी है।
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ये है बजट का गणित
पीयू का बजट हर साल 450 करोड़ रुपये से अधिक का बनता है। पिछले साल का बजट लगभग 486 करोड़ था। इस बार का बजट 470 करोड़ के आसपास रखने की योजना चल रही है। उसी को लेकर कमेटी बनाई गई ताकि खर्चों में कटौती की जा सके। इस कमेटी ने हर मुद्दे पर बात की, लेकिन उस विषय को छोड़ दिया जिस पर अफसरों का हक था। यानी जिन गाड़ियों में अफसर दौड़ते हैं उन गाड़ियों में अब रोज पेट्रोल नहीं डल रहा है। अधिकारी अपने घरों से काम कर रहे हैं।
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न कहीं निरीक्षण के लिए जा रहे हैं और न किसी अन्य कार्यक्रम में। कार्यालय भी आना है तो उनके घर से उसकी दूरी महज एक से दो किमी ही है। सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल के खर्च के नाम पर खेल कोई नया नहीं है। इसलिए इसके बजट पर कटौती नहीं की गई। सूत्रों का कहना है कि पीयू में 20 गाड़ियों के लिए पेट्रोल खर्च दिया जाता है। साथ ही रिपेयर का भी खर्च शामिल है। पीयू की दो से तीन बसें संचालित हैं। बाकी अधिकारियों की गाड़ियां चलती हैं। इन पर सालाना लगभग 42 लाख रुपये खर्च होता है।
छात्र बोले- जहां करनी थी कटौती वहां नहीं की
एमएससी के छात्र रोहित सिंह और एमए के छात्र सुरेंद्र प्रताप का कहना है कि हॉस्टल में विद्यार्थी रहते हैं। वहां का खर्च व सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए थी, लेकिन बजट में कटौती कर छात्रों की सुविधाओं पर ताला लगाने की कोशिश की गई है। अधिकारियों की गाड़ियां एक जगह खड़ी हैं, लेकिन उनका पेट्रोल खर्च लगातार होता रहेगा। इसमें खेल होता है इसलिए कटौती नहीं की गई। इसको लेकर छात्र जल्द ही पीयू प्रशासन को ज्ञापन देंगे और प्रदर्शन भी करेंगे।
इन कटौतियों को मिली मंजूरी
- पीयू शिक्षकों व कर्मचारियों को चार साल में एक बार देश में घूमने के लिए यात्रा भत्ता देती है। इसके अलावा 10 दिन का वेतन भी दिया जाता है। इसे एलटीए कहा जाता है। इस पर रोक लगा दी गई।
- सेमिनार व फील्ड वर्क के कोई भी पैसा पीयू अपने खजाने से नहीं देगी। यानी सौ फीसदी इसके बजट में कटौती की गई है। हालांकि इसकी जगह वेबिनार ने ली है, लेकिन उसमें खर्च बहुत कम है।
- पीयू के 78 विभागों के खर्चों में 20 फीसदी की कटौती होगी। साथ ही यही कटौती प्रशासनिक कार्यालयों पर लागू होगी।
- रिपेयर व मेंटीनेंस के बजट पर 10 फीसदी की कटौती की गई है।
- हॉस्टल के खर्चों में 40 फीसदी कटौती की गई है। कौनसे खर्च कम होंगे, यह स्पष्ट नहीं किया गया।
- खेलों का बजट 40 फीसदी तक घटाया गया।
- कर्मचारियों को ओवर टाइम के लिए पैसे भी नहीं दिए जाएंगे।
- नई तैनाती नहीं होंगी। आउट सोर्स से भी कर्मचारी नहीं रखे जाएंगे।
इन कटौतियों को मिली मंजूरी
- पीयू शिक्षकों व कर्मचारियों को चार साल में एक बार देश में घूमने के लिए यात्रा भत्ता देती है। इसके अलावा 10 दिन का वेतन भी दिया जाता है। इसे एलटीए कहा जाता है। इस पर रोक लगा दी गई।
- सेमिनार व फील्ड वर्क के कोई भी पैसा पीयू अपने खजाने से नहीं देगी। यानी सौ फीसदी इसके बजट में कटौती की गई है। हालांकि इसकी जगह वेबिनार ने ली है, लेकिन उसमें खर्च बहुत कम है।
- पीयू के 78 विभागों के खर्चों में 20 फीसदी की कटौती होगी। साथ ही यही कटौती प्रशासनिक कार्यालयों पर लागू होगी।
- रिपेयर व मेंटीनेंस के बजट पर 10 फीसदी की कटौती की गई है।
- हॉस्टल के खर्चों में 40 फीसदी कटौती की गई है। कौनसे खर्च कम होंगे, यह स्पष्ट नहीं किया गया।
- खेलों का बजट 40 फीसदी तक घटाया गया।
- कर्मचारियों को ओवर टाइम के लिए पैसे भी नहीं दिए जाएंगे।
- नई तैनाती नहीं होंगी। आउट सोर्स से भी कर्मचारी नहीं रखे जाएंगे।