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मनमाना रवैयाः पंजाब यूनिवर्सिटी ने नजरअंदाज किए नैक के सुझाव, 9 सेंटरों को बना दिया अलग विभाग

Wed, 02 Oct 2019 02:18 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 02 Oct 2019 02:18 PM IST
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Punjab University chandigarh igonred NAAC Suggestions
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
पीयू को नैक ने सुझाव दिए थे कि छोटे विभागों को मर्ज कर दिया जाए। लेकिन अमल तो दूर की बात, मर्ज किए गए नौ सेंटरों को भी अलग कर विभाग बना दिया गया। यही नहीं इन सेंटरों के समन्वयकों की जगह चेयरमैन की व्यवस्था कर दी गई। यह किस नियम के तहत पीयू में हुआ, इसकी जानकारी न तो सिंडिकेट के सदस्यों के पास है और न सीनेट के।
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अब दोबारा विभागों के मर्ज करने की बात सामने आई तो इसका खुलासा कई शिक्षकों ने किया। जानकारों का कहना है कि इसमें खेल हुआ है। इसकी जांच होनी चाहिए और इन विभागों को पुराने स्वरूप में करना चाहिए। हालांकि कुछ लोगों का तर्क है कि उन्होंने मास्टर व पीएचडी की पढ़ाई शुरू कर दी इसलिए ब्रांच या सेंटरों को विभाग बना दिया।
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नैक ने वर्ष 2015 में पीयू का दौरा किया था। उसी दौरान विभागों के मर्जर का सुझाव भी दिया था। इसके जरिये पीयू का खर्च भी कम होना था। साथ ही कई अन्य फायदे भी मिलने थे। पीयू को नैक के सुझावों पर काम करना चाहिए था लेकिन उन्होंने उल्टा कर दिया।
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सूत्रों का कहना है कि इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्जिंग एरिया एंड साइंस एंड टेकभनोलॉजी व इमर्जिंग एरिया सोशल साइंस दो यूनिट बनाई गई थी। इनके अंतर्गत नौ ब्रांच आती थीं। इन ब्रांचों की जिम्मेदारी को-ऑर्डिनेटर को दी गई थी, जो प्रोफेसर होते थे। साथ ही यूनिट का हेड चीफ को-ऑर्डिनेटर बनाए गए थे, लेकिन दो साल पहले इस व्यवस्था को बदल दिया गया। ब्रांचों को विभाग बना दिया गया और विभाग अध्यक्ष यानी चेयरमैन की प्रथा शुरू कर दी गई।

पीयू कैलेंडर के मुताबिक चेयरमैन बनाने का प्रस्ताव सिंडिकेट होकर सीनेट में पास होता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जानकारों का कहना है कि पूर्व वीसी की ओर से ऐसा किया गया। अब मामला तब उजागर हुआ जब विभागों को मर्ज करने की बात सामने आई। नियमत: पीयू को दो ही यूनिट इनको मानते हुए नौ विभागों को ब्रांच मानना चाहिए। जानकारों का कहना है कि ऐसा करने से विभागों के मर्ज करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और नैक के सुझाव भी पूरे हो जाएंगे। जानकारों ने तो यह भी कहा है कि इस प्रकरण की नियमत: जांच होनी चाहिए।
 

यूनिट : इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्जिंग एरिया इन साइंस एंड टेकभनोलॉजी
- पब्लिक हेल्थ
- न्यूक्लियर साइंस
- फॉरेंसिक साइंस
- नैनो साइंस
- बायोइनफोर्मेटिक
- स्टैमसेल एंड इंजीनियरिंग

यूनिट : इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्जिंग एरिया इन सोशल साइंस
- पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन
- ह्यूमन राइट
- सोशल वर्क

पूर्व वीसी के कार्यकाल में यह हुआ था। इसकी पूरी जानकारी मुझे भी नहीं है, शायद समन्वयक तो अभी भी इन विभागों में हैं। यह मामला दिखवाएंगे।
- प्रो. शंकर जी झा, डीयूआई
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