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पंजाब यूनिवर्सिटी में वरिष्ठता का मानक खत्म हुआ, वीसी ने पहली बार अपने विवेक से बनाए वार्डन
Fri, 14 Jun 2019 01:37 PM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 14 Jun 2019 01:37 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस
- फोटो : file photo
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पंजाब यूनिवर्सिटी में वार्डन की तैनाती के लिए सिंडिकेट की ओर से बनाया गया वरिष्ठता का मानक खत्म कर दिया गया है। पहली बार किसी वाइस चांसलर ने अपने विवेक का प्रयोग करते हुए तीन वार्डन के नामों पर मुहर लगाई है। वीसी प्रो. राजकुमार के इस निर्णय से सिंडिकेट के एक पक्ष को बड़ा धक्का लगा है। माना जा रहा है कि अब तक सिंडिकेट ने जो तय कर दिया वही मान्य होता था चाहे वह पीयू कैलेंडर के खिलाफ ही क्यों ना हो, लेकिन इस बार वही हुआ जो पीयू कैलेंडर में लिखा था।
नए वार्डन के लिए प्रोफेसर डॉ. अरुण ठाकुर, डॉ. विशाल शर्मा और डॉ. शिप्रा गुप्ता के नाम पर मुहर लगाई गई है। तीन हॉस्टल में वार्डन की तैनाती के लिए 17 आवेदन मिले थे। डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर और प्रो. नीना कप्लास ने आवेदकों के इंटरव्यू लिए। वरिष्ठता के आधार पर नाम चयनित करके इंटरव्यू बोर्ड ने वीसी के पास भेज दिए। उन्होंने वरिष्ठता के मानक की जांच की। पता चला कि यह मानक पीयू कैलेंडर में वार्डन की तैनाती में लागू नहीं होता।
सूत्रों का कहना है कि वीसी ने इसी को ध्यान में रखते बोर्ड की ओर से भेजे नामों को किनारे कर दिया। उन्होंने इंटरव्यू बोर्ड से बुधवार को दोबारा सभी आवेदकों की एल्फाबेटिकल लिस्ट मांगी। वीसी ने उसी सूची को देखा और तीन वार्डन के नाम फाइनल कर दिए। यूआईएचटीएम के प्रोफेसर डॉ. अरुण ठाकुर को ब्वॉयज हॉस्टल नंबर सात का वार्डन बनाया। इसी तरह यूआईईटी के प्रोफेसर डॉ. विशाल शर्मा को हॉस्टल नंबर आठ व लॉ डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. शिप्रा गुप्ता को गर्ल्स हॉस्टल नंबर नौ की वार्डन बनाया गया है।
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सूत्रों का कहना है कि पीयू सीनेट व सिंडिकेट में दो पक्षों का दबदबा है। उसमें एक पक्ष के यह तीनों वार्डन हैं। सिंडिकेट में जिनका दबदबा हमेशा रहा है उस पक्ष के इस बार वार्डन नहीं बनाए गए हैं। हालांकि वार्डन बनाते समय वीसी ने इस बात का भी ध्यान रखा है कि बड़े विभागों का प्रतिनिधित्व वार्डन के रूप में हो।
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नए वार्डन के लिए प्रोफेसर डॉ. अरुण ठाकुर, डॉ. विशाल शर्मा और डॉ. शिप्रा गुप्ता के नाम पर मुहर लगाई गई है। तीन हॉस्टल में वार्डन की तैनाती के लिए 17 आवेदन मिले थे। डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर और प्रो. नीना कप्लास ने आवेदकों के इंटरव्यू लिए। वरिष्ठता के आधार पर नाम चयनित करके इंटरव्यू बोर्ड ने वीसी के पास भेज दिए। उन्होंने वरिष्ठता के मानक की जांच की। पता चला कि यह मानक पीयू कैलेंडर में वार्डन की तैनाती में लागू नहीं होता।
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सूत्रों का कहना है कि वीसी ने इसी को ध्यान में रखते बोर्ड की ओर से भेजे नामों को किनारे कर दिया। उन्होंने इंटरव्यू बोर्ड से बुधवार को दोबारा सभी आवेदकों की एल्फाबेटिकल लिस्ट मांगी। वीसी ने उसी सूची को देखा और तीन वार्डन के नाम फाइनल कर दिए। यूआईएचटीएम के प्रोफेसर डॉ. अरुण ठाकुर को ब्वॉयज हॉस्टल नंबर सात का वार्डन बनाया। इसी तरह यूआईईटी के प्रोफेसर डॉ. विशाल शर्मा को हॉस्टल नंबर आठ व लॉ डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. शिप्रा गुप्ता को गर्ल्स हॉस्टल नंबर नौ की वार्डन बनाया गया है।
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सूत्रों का कहना है कि पीयू सीनेट व सिंडिकेट में दो पक्षों का दबदबा है। उसमें एक पक्ष के यह तीनों वार्डन हैं। सिंडिकेट में जिनका दबदबा हमेशा रहा है उस पक्ष के इस बार वार्डन नहीं बनाए गए हैं। हालांकि वार्डन बनाते समय वीसी ने इस बात का भी ध्यान रखा है कि बड़े विभागों का प्रतिनिधित्व वार्डन के रूप में हो।
डीएसडब्ल्यू पर भी जल्द लगेगी मुहर
जिस पक्ष से तीन वार्डन बने हैं, उसी पक्ष से अब डीएसडब्ल्यू भी बनाने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि जुलाई में सीनेट की बैठक होगी और उसी बैठक में प्रो. देविंदर सिंह के नाम पर मुहर लग जाएगी। हालांकि सीनेट के सभी सदस्यों को अपने विश्वास में लेने का काम शुरू हो गया है। सदस्यों से संपर्क साधा जा रहा है। सीनेटर डॉ. सुभाष शर्मा कहते हैं कि अब वही होगा जो पीयू कैलेंडर में होगा। नियमों की अनदेखी नहीं होने देंगे।
डीन रिसर्च का पद खत्म करेंगे
पीयू कैलेंडर में डीन रिसर्च का पद ही नहीं है, लेकिन कुछ वर्षों से डीन रिसर्च तो कभी निदेशक रिसर्च पद चला आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि सीनेट की बैठक में इस पद को खत्म किया जा रहा है। हालांकि विद्यार्थियों की जरूरतों को देखते हुए कुछ अन्य रास्ते तलाशे जाएंगे। मालूम हो कि इस पद प्रो. आरके सिंगला हैं। इनसे पूर्व वीसी प्रो. राजकुमार ने डीन निदेशक के पद पर प्रो. एसके तोमर की तैनाती की थी, लेकिन सिंडिकेट ने यह बदल दिया। उन्होंने वरिष्ठता का मानक तय कर दिया। बताते हैं कि डीन रिसर्च के पद पर काफी छानबीन हुई तो पता चला कि कैलेंडर में इस पद का जिक्र नहीं है।
वार्डन की नई तैनाती कर दी गई है। वीसी के पास इनकी तैनाती के पूरे अधिकार हैं।
- रेनुका बी सलवान, डीपीआर पीयू
डीन रिसर्च का पद खत्म करेंगे
पीयू कैलेंडर में डीन रिसर्च का पद ही नहीं है, लेकिन कुछ वर्षों से डीन रिसर्च तो कभी निदेशक रिसर्च पद चला आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि सीनेट की बैठक में इस पद को खत्म किया जा रहा है। हालांकि विद्यार्थियों की जरूरतों को देखते हुए कुछ अन्य रास्ते तलाशे जाएंगे। मालूम हो कि इस पद प्रो. आरके सिंगला हैं। इनसे पूर्व वीसी प्रो. राजकुमार ने डीन निदेशक के पद पर प्रो. एसके तोमर की तैनाती की थी, लेकिन सिंडिकेट ने यह बदल दिया। उन्होंने वरिष्ठता का मानक तय कर दिया। बताते हैं कि डीन रिसर्च के पद पर काफी छानबीन हुई तो पता चला कि कैलेंडर में इस पद का जिक्र नहीं है।
वार्डन की नई तैनाती कर दी गई है। वीसी के पास इनकी तैनाती के पूरे अधिकार हैं।
- रेनुका बी सलवान, डीपीआर पीयू