{"_id":"5cde4a82bdec220717715b37","slug":"punjab-university-chandigarh-dental-college-teachers-promotions","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पंजाब यूनिवर्सिटीः 13 साल बाद डेंटल कॉलेज के 35 शिक्षकों को मिलेगा प्रमोशन, पॉलिसी बनना शुरू","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
पंजाब यूनिवर्सिटीः 13 साल बाद डेंटल कॉलेज के 35 शिक्षकों को मिलेगा प्रमोशन, पॉलिसी बनना शुरू
Fri, 17 May 2019 11:16 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 17 May 2019 11:16 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में भले ही कोई पॉलिसी शिक्षण संस्थानों में लागू हो, लेकिन पीयू में वह बहुत देरी से लागू होती है। इसी में शामिल है डेंटल कॉलेज के शिक्षकों का प्रमोशन। 35 शिक्षकों के प्रमोशन 13 साल से अटके हुए हैं। अब जाकर पीयू को यह याद आई और इनके लिए प्रमोशन पॉलिसी बनाना शुरू किया है। वर्ष 2006 में पीयू ने अपना विस्तार किया और डेंटल कॉलेज की स्थापना की।
यहां विद्यार्थियों को पढ़ाने के अलावा रोगियों को देखने के लिए भी सुविधा की गई। पूरा ढांचा तैयार किया गया और प्रोजेक्ट धरातल पर उतार दिया गया। यह प्रोजेक्ट लगातार पीयू को ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक हुआ। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी देश-दुनिया में जॉब कर रहे हैं। हजारों रोगियों को भी इलाज मुहैया कराया गया।
इन सभी का श्रेय संस्थान के शिक्षकों को जाता है। इनकी संख्या 35 से अधिक है, लेकिन इन शिक्षकों को उनका हक नहीं मिल पाया। उन्हें प्रमोशन दिए जाने थे। कई बार मांग की गई, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। इससे शिक्षकों का भी मनोबल गिरा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वह अपनी मांग करते रहे।
विज्ञापन
आखिर में सिंडिकेट में यह प्रस्ताव लाया गया तो प्रमोशन पॉलिसी अब बनना शुरू हुई है। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में भी दो से तीन माह लगा दिए जाएंगे।
विज्ञापन
यहां विद्यार्थियों को पढ़ाने के अलावा रोगियों को देखने के लिए भी सुविधा की गई। पूरा ढांचा तैयार किया गया और प्रोजेक्ट धरातल पर उतार दिया गया। यह प्रोजेक्ट लगातार पीयू को ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक हुआ। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी देश-दुनिया में जॉब कर रहे हैं। हजारों रोगियों को भी इलाज मुहैया कराया गया।
विज्ञापन
इन सभी का श्रेय संस्थान के शिक्षकों को जाता है। इनकी संख्या 35 से अधिक है, लेकिन इन शिक्षकों को उनका हक नहीं मिल पाया। उन्हें प्रमोशन दिए जाने थे। कई बार मांग की गई, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। इससे शिक्षकों का भी मनोबल गिरा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वह अपनी मांग करते रहे।
विज्ञापन
आखिर में सिंडिकेट में यह प्रस्ताव लाया गया तो प्रमोशन पॉलिसी अब बनना शुरू हुई है। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में भी दो से तीन माह लगा दिए जाएंगे।
सातवां वेतनमान का लाभ भी नहीं मिला
पीयू के लगभग एक हजार से अधिक शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ भी अभी तक नहीं मिल पाया है, जबकि पूरे देश के शिक्षण संस्थानों में यह लागू हो चुका है। शिक्षकों ने कई बार मांग की। दबाव बनाया तो जाकर प्रस्ताव आगे बढ़ा। अभी तक शिक्षकों के खाते में बढ़ी हुई सैलरी नहीं पहुंची है। वह इंतजार कर रहे हैं कि वेतनमान का लाभ मिले। कुछ शिक्षक तो सेवानिवृत्त भी हो गए।
उनके अरमान थे कि वह बढ़ी हुई सैलरी सेवा में रहते हुए लें, लेकिन वह नहीं मिल पाई। हालांकि, जब भी वेतनमान लागू होगा, उन्हें इसका लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा छठे वेतनमान के समय शिक्षकों को दिया जाने वाला पितृत्व अवकाश भी अब जाकर लागू हुआ है। लगातार पीयू में योजनाएं धरातल पर आते-आते दम तोड़ रही हैं। पीयू आज तक इस देरी का रास्ता नहीं निकाल पाया।
उनके अरमान थे कि वह बढ़ी हुई सैलरी सेवा में रहते हुए लें, लेकिन वह नहीं मिल पाई। हालांकि, जब भी वेतनमान लागू होगा, उन्हें इसका लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा छठे वेतनमान के समय शिक्षकों को दिया जाने वाला पितृत्व अवकाश भी अब जाकर लागू हुआ है। लगातार पीयू में योजनाएं धरातल पर आते-आते दम तोड़ रही हैं। पीयू आज तक इस देरी का रास्ता नहीं निकाल पाया।