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बजट का टोटा... निकाले गए 200 कर्मचारियों को फिलहाल नौकरी पर नहीं रखेगी पंजाब यूनिवर्सिटी
Tue, 07 Jul 2020 12:51 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2020 12:51 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी
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पंजाब यूनिवर्सिटी ने साफ कर दिया है कि वह निकाले गए लगभग 200 मल्टी टास्किंग स्टाफ यानी एमटीएस को फिलहाल नौकरी पर वापस नहीं लेगा। पीयू के पास बजट का टोटा है। साथ ही पीयू अपने स्थाई कर्मचारियों से ही पूरा काम नहीं ले पा रहा है। एक तिहाई स्टाफ से शिफ्ट वाइज काम लिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर एमटीएस स्टाफ भी आंदोलन की रणनीति बनाने में जुट गया है।
पीयू आउटसॉर्सिंग के जरिये हर साल एमटीएस स्टाफ की सेवाएं लेता है। इसमें क्लर्क, कंप्यूटर ऑपरेटर, माली, चपरासी आदि पदों के लिए काम लिया जाता है। इनकी सैलरी भी डीसी रेट पर निर्धारित है। जिस एजेंसी के जरिये कर्मचारी आते हैं वह वेतन का कुछ फीसदी हिस्सा काटकर भुगतान करते हैं। लॉकडाउन में पीयू बंद रहा। उसके बाद पीयू खुला, लेकिन शिक्षण कार्य नहीं हुआ। सभी विभाग बंद हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों की सेवाएं पीयू कहां लेता।
इसी बीच पीयू ने 30 जून के बाद इन कर्मचारियों का रिनुअल नहीं किया, क्योंकि 30 जून तक ही करार भी इनके साथ किया गया था। पीयू का खजाना भी खाली था। पीयू ने इन्हें निकाला तो सभी कर्मचारियों ने एडमिन ब्लॉक से लेकर कई जगहों पर प्रदर्शन किया। इन कर्मचारियों को आश्वासन मिला था कि कुछ राहत इन्हें दी जाएगी, लेकिन पीयू ने साफ मना कर दिया। यह नौकरी पर नहीं रखे जाएंगे। जब पीयू को जरूरत होगी तभी बुलाएंगे।
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इस बारे में प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार ने कहा कि एमटीएस कर्मचारियों का कांट्रेक्ट पूरा हो गया है। पीयू के पास पहले ही स्थाई स्टाफ काफी है और उसमें से भी हम एक तिहाई को ही काम पर बुला रहे हैं। ऐसे में अधिक कर्मचारियों की अभी आवश्यकता नहीं है। पीयू को जब जरूरत होगी तभी कर्मचारियों को रखने के बारे में सोचा जाएगा।
दस साल की सेवा पूरी करने वालों को स्थाई करने की प्रक्रिया भी रुकी
पीयू में दस साल की सेवाएं पूरी करने वाले कर्मचारियों को स्थाई करने की योजना चल रही थी। लगभग 50 कर्मचारियों को इसका लाभ दिया गया, लेकिन बाकी को अभी स्थाई नहीं किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया रुक गई है। इस पर दिसंबर के बाद पीयू अब निर्णय लेगा। कुछ आरोप यह भी लगे हैं कि पीयू ने कुछ लोगों को समय से पहले स्थाई कर दिया। उनका वेतन भी निकल रहा है। इसकी पीयू प्रशासन जांच करवा रहा है।
इससे कर्मचारियों में रोष भी है। उधर, निर्माण विभाग में कार्यरत 15 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी भी खतरे में है। उनका वेतन भी पूरा नहीं मिला। वह भी आए दिन प्रोटेस्ट पीयू में कर रहे हैं। अब वह आगामी रणनीति बनाने में जुटे हैं।
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पीयू आउटसॉर्सिंग के जरिये हर साल एमटीएस स्टाफ की सेवाएं लेता है। इसमें क्लर्क, कंप्यूटर ऑपरेटर, माली, चपरासी आदि पदों के लिए काम लिया जाता है। इनकी सैलरी भी डीसी रेट पर निर्धारित है। जिस एजेंसी के जरिये कर्मचारी आते हैं वह वेतन का कुछ फीसदी हिस्सा काटकर भुगतान करते हैं। लॉकडाउन में पीयू बंद रहा। उसके बाद पीयू खुला, लेकिन शिक्षण कार्य नहीं हुआ। सभी विभाग बंद हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों की सेवाएं पीयू कहां लेता।
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इसी बीच पीयू ने 30 जून के बाद इन कर्मचारियों का रिनुअल नहीं किया, क्योंकि 30 जून तक ही करार भी इनके साथ किया गया था। पीयू का खजाना भी खाली था। पीयू ने इन्हें निकाला तो सभी कर्मचारियों ने एडमिन ब्लॉक से लेकर कई जगहों पर प्रदर्शन किया। इन कर्मचारियों को आश्वासन मिला था कि कुछ राहत इन्हें दी जाएगी, लेकिन पीयू ने साफ मना कर दिया। यह नौकरी पर नहीं रखे जाएंगे। जब पीयू को जरूरत होगी तभी बुलाएंगे।
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इस बारे में प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार ने कहा कि एमटीएस कर्मचारियों का कांट्रेक्ट पूरा हो गया है। पीयू के पास पहले ही स्थाई स्टाफ काफी है और उसमें से भी हम एक तिहाई को ही काम पर बुला रहे हैं। ऐसे में अधिक कर्मचारियों की अभी आवश्यकता नहीं है। पीयू को जब जरूरत होगी तभी कर्मचारियों को रखने के बारे में सोचा जाएगा।
दस साल की सेवा पूरी करने वालों को स्थाई करने की प्रक्रिया भी रुकी
पीयू में दस साल की सेवाएं पूरी करने वाले कर्मचारियों को स्थाई करने की योजना चल रही थी। लगभग 50 कर्मचारियों को इसका लाभ दिया गया, लेकिन बाकी को अभी स्थाई नहीं किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया रुक गई है। इस पर दिसंबर के बाद पीयू अब निर्णय लेगा। कुछ आरोप यह भी लगे हैं कि पीयू ने कुछ लोगों को समय से पहले स्थाई कर दिया। उनका वेतन भी निकल रहा है। इसकी पीयू प्रशासन जांच करवा रहा है।
इससे कर्मचारियों में रोष भी है। उधर, निर्माण विभाग में कार्यरत 15 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी भी खतरे में है। उनका वेतन भी पूरा नहीं मिला। वह भी आए दिन प्रोटेस्ट पीयू में कर रहे हैं। अब वह आगामी रणनीति बनाने में जुटे हैं।