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फैसलाः नैक से पहले पंजाब यूनिवर्सिटी खुद करेगी मानकों की जांच, कुछ बिंदुओं पर खास ध्यान

Mon, 13 Jan 2020 02:17 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 13 Jan 2020 02:17 PM IST
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punjab university decision to check NAC's standards from August itself
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
नैक के मानकों की पूर्ति समय से हो जाए, इसके लिए पीयू पहले खुद ही मॉक इंस्पेक्शन करने जा रहा है। गठित टीमें एक साल तक मानकों की जांच समय समय पर करेंगी। यह कार्य तब तक चलता रहेगा जब तक विभाग अपने सभी मानकों को पूरा नहीं कर लेते। ऐसा करने से नैक की टीम को मानकों की जांच पूरी मिलेगी और पीयू भी ग्रेडिंग में बाजी मार लेगा। पीयू प्रशासन ने यह योजना तैयार कर ली है। मॉक इंस्पेक्शन के लिए जल्द ही टीमों का गठन किया जाएगा। यदि कोई विभाग बार बार लापरवाही कर रहा है तो ऐसे में कार्रवाई भी की जा सकती है।
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पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने यह योजना बनाई है। उन्होंने साफ कर दिया है कि नैक की ग्रेडिंग में इस बार पीयू पीछे नहीं रहेगा। इसके लिए पूरे पीयू के जिम्मेदारों को शामिल किया जा रहा है। हर किसी को काम बांटा जा रहा है। यह काम अलग अलग तरह के होंगे। कोई अधिकारी विभागों में शिक्षण का माहौल देखेगा तो कोई सीबीसीएस सिस्टम के लागू होने व न होने के कारणों को तलाशेगा। वाईफाई की सुविधा विद्यार्थियों को दिए जाने से लेकर तमाम सुविधाओं को परखा जाएगा। लाइब्रेरी के मानकों को भी समय समय पर देखा जाएगा।
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पीयू वीसी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वह अगस्त के मॉक निरीक्षण की तैयारी के लिए जुट जाएं। कोशिश करें कि अगस्त से पहले निरीक्षण करने वाली टीम को सबकुछ ठीक मिले और अधिक आपत्तियां न लगानी पड़े। मालूम हो कि नैक की टीम वर्ष 2022 में पीयू का निरीक्षण करेगी। पिछले वर्षों के निरीक्षण में जिन बिंदुओं पर आपत्ति लगाई गई थी उन्हें पूरा किया जाएगा।
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इन बिंदुओं की जांच करेगी टीम

- बोर्ड व चॉक प्रणाली का हाल
- वाईफाई का संचालन
- छात्रावासों की संख्या व विद्यार्थियों के रहने के बंदोबस्त
- सीबीसीएस विधि का संचालन
- संकाय की कमी की पूर्ति
- तकनीकी स्टाफ की पूर्ति की या नहीं

इन बिंदुओं पर देना होगा अधिक ध्यान
- मूल्य आधारित शिक्षा सभी कार्यक्रमों में एकीकृत नहीं हो पा रही है।
- सीबीसीएस सिस्टम पूरी तरह अभी लागू नहीं हो सका है।
- छात्रों के फीडबैक अभी सभी विभागों से पूरी तरह नहीं मिल पा रहे हैं।
- अग्रिम शिक्षार्थियों की पहचान के लिए तंत्र विकसित किया जाना था, इस पर अभी काम चल रहा है।
- संकायों में स्टाफ की कमी है। इसकी अनुमति शासन से नहीं मिली।

यहां पर मिली पीयू को कुछ सफलता

- मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभागों द्वारा अनुसंधान के लिए संसाधन जुटाए गए।
- कंसल्टेंसी केमाध्यम से आय जुटाने के प्रयास हुए।
- छात्रों की भागीदारी को ट्रैक करने के लिए संरचित तंत्र के लिए पोर्टल की व्यवस्था की गई।
- सामान व फाइलों के रखरखाव की स्थिति में सुधार हुआ।
- स्वच्छता के लिए गीला व सूखा कूड़ा अलग किया जा रहा है।
- सूचना संसाधन पोर्टल के जरिये छात्रों की प्रगति पर ध्यान दिया जा रहा है।
- छात्रों का वैधानिक, शैक्षणिक और औपचारिक प्रतिनिधित्व बना हुआ है।
- आईक्यूएसी को प्रभावी बनाया गया है जो हर मामले को सुलझाने के प्रयास कर रही है।
- परामर्श केमाध्यम से गरीब राजस्व सृजन का कार्य हो रहा है।
- छात्रावासों की संख्या दस से बढ़कर 11 हो रही है। इसकेअलावा हॉस्टलों का उच्चीकरण हो रहा है।
- प्लेसमेंट व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ। हजारों विद्यार्थियों को हर साल नौकरी दिलाई जा रही है।
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