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पंजाब यूनिवर्सिटी ने यूजीसी को भेजी परीक्षाएं कराने की योजना, छात्रों ने कहा- उनके साथ किया धोखा
Mon, 07 Sep 2020 12:04 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 12:04 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब विश्वविद्यालय ने अपनी परीक्षा लेने की योजना को अंतिम रूप देकर यूजीसी को भेज दिया है। इसी के साथ परीक्षा कराने की तैयारी भी शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर छात्रों में आक्रोश बढ़ रहा है। उनका तर्क है कि ऐसी परीक्षा का आयोजन तो पीयू जुलाई में भी कर सकता था। अब परीक्षा आखिरी समय में आनन-फानन में करवाई जा रही है। पढ़ाई के लिए समय भी नहीं मिल पाएगा।
पीयू ने वायदा किया था कि परीक्षा से 21 दिन पहले छात्रों को बताया जाएगा लेकिन अब तो महज 11 दिन ही मिले हैं। कई छात्रों ने पीयू के अधिकारियों को मेल के जरिये पत्र भी भेजे हैं। कुछ ने यह भी कहा है कि पीयू की ओर से जो परीक्षा की योजना तैयार की गई है, इसे परीक्षा का नाम देना गलत है। परीक्षा का मतलब शुचिता से जुड़ा होता है जो इसमें नहीं रहेगी।
उठे सवाल.. पीयू ने तीन माह तक छात्रों को उलझाए रखा
पीयू की ओर से 17 सितंबर से परीक्षाएं करवाई जा रही हैं। परीक्षा समाप्ति के पांच दिन बाद रिजल्ट भी जारी हो जाएगा। सितंबर के आखिरी दो सप्ताह में पीयू अपनी जिम्मेदारी निभाकर पीछा छुड़ा लेगी। एमए अंतिम वर्ष के छात्र राहुल शर्मा, एमएससी अंतिम वर्ष के छात्र रोहित सिंह, अभिषेक ने कहा है कि पीयू ने छात्रों को उलझाए रखा। तीन माह से परीक्षा को लेकर पीयू ने रुख साफ नहीं किया। कभी उच्च न्यायालय में केस जाने की बात कहती रही तो कभी यूजीसी के दिशा-निर्देश को लेकर संशय की स्थिति बनाई।
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मामला सर्वोच्च न्यायालय भी पहुंचा और वहां से आदेश आने के बाद तैयारी शुरू की।पीयू को शुरू में ही परीक्षा की योजना तैयार कर लेनी चाहिए थी लेकिन इसके लिए प्रयास नहीं किए गए। आरोप है कि पीयू परीक्षा कराने के मूड में ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि सालभर पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस प्रणाली से नुकसान होगा क्योंकि कमजोर व होशियार विद्यार्थियों को इसमें एक समझा जाएगा।
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पीयू ने वायदा किया था कि परीक्षा से 21 दिन पहले छात्रों को बताया जाएगा लेकिन अब तो महज 11 दिन ही मिले हैं। कई छात्रों ने पीयू के अधिकारियों को मेल के जरिये पत्र भी भेजे हैं। कुछ ने यह भी कहा है कि पीयू की ओर से जो परीक्षा की योजना तैयार की गई है, इसे परीक्षा का नाम देना गलत है। परीक्षा का मतलब शुचिता से जुड़ा होता है जो इसमें नहीं रहेगी।
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उठे सवाल.. पीयू ने तीन माह तक छात्रों को उलझाए रखा
पीयू की ओर से 17 सितंबर से परीक्षाएं करवाई जा रही हैं। परीक्षा समाप्ति के पांच दिन बाद रिजल्ट भी जारी हो जाएगा। सितंबर के आखिरी दो सप्ताह में पीयू अपनी जिम्मेदारी निभाकर पीछा छुड़ा लेगी। एमए अंतिम वर्ष के छात्र राहुल शर्मा, एमएससी अंतिम वर्ष के छात्र रोहित सिंह, अभिषेक ने कहा है कि पीयू ने छात्रों को उलझाए रखा। तीन माह से परीक्षा को लेकर पीयू ने रुख साफ नहीं किया। कभी उच्च न्यायालय में केस जाने की बात कहती रही तो कभी यूजीसी के दिशा-निर्देश को लेकर संशय की स्थिति बनाई।
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मामला सर्वोच्च न्यायालय भी पहुंचा और वहां से आदेश आने के बाद तैयारी शुरू की।पीयू को शुरू में ही परीक्षा की योजना तैयार कर लेनी चाहिए थी लेकिन इसके लिए प्रयास नहीं किए गए। आरोप है कि पीयू परीक्षा कराने के मूड में ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि सालभर पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस प्रणाली से नुकसान होगा क्योंकि कमजोर व होशियार विद्यार्थियों को इसमें एक समझा जाएगा।
17 लोगों की कमेटी का निर्णय काम का नहीं
पीयू की सिंडिकेट समेत 17 प्रोफेसरों व विशेषज्ञों की कमेटी बनाई गई। सभी को उम्मीद थी कि बेहतर योजना तैयार होगी लेकिन जब सामने आई तो छात्रों को लगा कि यह परीक्षा नहीं है। केवल पीयू नाम कर रही है कि उसने भी परीक्षा आयोजित की है। बीए अंतिम वर्ष के छात्र शुभम आनंद, सुमित शर्मा, विजय सिंह का कहना है कि पीयू के शिक्षक सबसे अधिक समझदार व ज्ञानी समझे जाते हैं।
लेकिन परीक्षा की योजना से तो उलट हो गया। अब परीक्षा सामने है। इसके लिए छात्रों को तैयारी का समय नहीं दिया गया। कई विद्यार्थी तो सदमे में हैं। यह भी पीयू ने नहीं बताया कि जिन छात्रों के पास नेट आदि की पहुंच नहीं है, वे कैसे परीक्षा देंगे और उनके लिए आगे क्या विकल्प होंगे।
इसे ऑनलाइन परीक्षा का नाम न दिया जाए
परीक्षा का मतलब शुचिता से जुड़ा होता है। पहली बार ऐसी परीक्षा हो रही है जिसका नकल से भी वास्ता होगा। उनकी मॉनीटरिंग कहीं से भी नहीं हो पाएगी। खुलेआम भी नकल हो सकती है। सेक्टर-7 के शिक्षाविद सुशांत सिंह, सेक्टर-32 के उदय कुमार कहते हैं कि मनोवैज्ञानिक इस बात को बाखूबी जानते हैं। छात्रों के सामने ऐसी परीक्षा होगी तो वे परीक्षा का मतलब शुचिता से नहीं समझेंगे।
इसका असर दूर तक उनके दिमाग पर बना रह सकता है। पीयू की यह योजना बिल्कुल गलत है। निजी शिक्षण संस्थान, कई विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन ही ऐसे बेहतर ढंग से पेपर करवाए हैं जिनमें गड़बड़ी या नकल की संभावनाएं नहीं हैं लेकिन पीयू ने सब उलट कर दिया। पीयू इसे ऑनलाइन परीक्षा नाम क्यों दे रहा है जबकि ऑनलाइन परीक्षा की परिभाषा अलग है।
लेकिन परीक्षा की योजना से तो उलट हो गया। अब परीक्षा सामने है। इसके लिए छात्रों को तैयारी का समय नहीं दिया गया। कई विद्यार्थी तो सदमे में हैं। यह भी पीयू ने नहीं बताया कि जिन छात्रों के पास नेट आदि की पहुंच नहीं है, वे कैसे परीक्षा देंगे और उनके लिए आगे क्या विकल्प होंगे।
इसे ऑनलाइन परीक्षा का नाम न दिया जाए
परीक्षा का मतलब शुचिता से जुड़ा होता है। पहली बार ऐसी परीक्षा हो रही है जिसका नकल से भी वास्ता होगा। उनकी मॉनीटरिंग कहीं से भी नहीं हो पाएगी। खुलेआम भी नकल हो सकती है। सेक्टर-7 के शिक्षाविद सुशांत सिंह, सेक्टर-32 के उदय कुमार कहते हैं कि मनोवैज्ञानिक इस बात को बाखूबी जानते हैं। छात्रों के सामने ऐसी परीक्षा होगी तो वे परीक्षा का मतलब शुचिता से नहीं समझेंगे।
इसका असर दूर तक उनके दिमाग पर बना रह सकता है। पीयू की यह योजना बिल्कुल गलत है। निजी शिक्षण संस्थान, कई विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन ही ऐसे बेहतर ढंग से पेपर करवाए हैं जिनमें गड़बड़ी या नकल की संभावनाएं नहीं हैं लेकिन पीयू ने सब उलट कर दिया। पीयू इसे ऑनलाइन परीक्षा नाम क्यों दे रहा है जबकि ऑनलाइन परीक्षा की परिभाषा अलग है।