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निरफ रैंकिंग में पिछड़ने के कारणों का पता लगाने में जुटा पंजाब विश्वविद्यालय, 44वें नंबर पर है

Wed, 17 Jun 2020 11:04 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 17 Jun 2020 11:04 AM IST
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punjab university is trying to find out the reasons behind lagging in Nirf ranking
punjab university
निरफ रैंकिंग में दस पायदान नीचे खिसकने के बाद पीयू इसके कारणों की तलाश में जुट गया है। इसके साथ पीयू अपने परसेप्शन को और बेहतर करने व रिसर्च को बढ़ावा देने की बात कर रहा है। सरकारी रैंकिंग में पीयू के पिछड़ने से फंड से लेकर तमाम नई चीजें प्रभावित हो सकती हैं। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इसी रैंकिंग के आधार पर तमाम सुविधाएं मुहैया कराती है। हालांकि, प्रोजेक्ट बेहतर होंगे तो फंड उसके लिए भी पीयू को मिलेगा।
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हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से निरफ रैंकिंग जारी की गई थी। इसमें पीयू को 44वां स्थान मिला, जबकि पिछले साल 34वें स्थान पर था। यह ओवरआल रैंकिंग है। अन्य विभागों की रैंकिंग भी अधिक अच्छी नहीं रही। हर बार पीयू दावा करता है कि निरफ रैंकिंग में वह बाजी मारेंगे, लेकिन जब रैंकिंग जारी होती है तो दिक्कतें वहीं खड़ी होती हैं।
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सूत्रों का कहना है कि इसके कारणों का पता लगाने में एक टीम जुटी है। उन्हीं कमियों को पूरा किया जाएगा ताकि आगे रैंक बेहतर आ सके। यह भी कहा जा रहा है कि इस रैंकिंग से नैक की ग्रेडिंग पर भी असर पड़ सकता है। नैक की रैंकिंग वर्ष 2022 में होगी। लॉकडाउन के कारण इस रैंक की तैयारियां भी पीयू नहीं कर पाया। हालांकि, अगस्त से नई प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। मानकों की जांच के लिए कमेटियां बनेंगी और जहां कमियां मिलेंगी, उन्हें पूरा करवाया जाएगा।
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