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पीयू का हिंदी माह उत्सव संपन्न, इरशाद कामिल बोले- भाषा का कोई मजहब नहीं, सबकी साझी होती है
Tue, 15 Sep 2020 02:55 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2020 02:55 PM IST
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कार्यक्रम में शामिल हुए इरशाद कामिल
- फोटो : अमर उजाला
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भाषा का कोई मजहब नहीं होता। भाषा जो है वह सबकी साझी होती है। पंजाब के लोग इस मायने में बहुत सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें तीन भाषाओं हिंदी-उर्दू-पंजाबी की समृद्ध विरासत मिली है। यह बात सोमवार को प्रसिद्ध गीतकार और पीयू के पूर्व छात्र डॉ. इरशाद कामिल ने पीयू के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित हिंदी माह उत्सव-2020 के समापन अवसर पर कही। उन्होंने इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने ‘हिंदी-उर्दू-पंजाबी की साझा विरासत’ पर विचार व्यक्त रखे।
डॉ. इरशाद कामिल ने कहा कि वह स्वयं भी अपने गीतों में हिंदी-उर्दू-पंजाबी भाषाओं के शब्दों का बहुत सहजता से प्रयोग करते हैं। उन्होंने हिंदी के भीष्म साहनी व यशपाल, उर्दू के मंटो और पंजाबी की अमृता प्रीतम जैसे लेखकों के उदाहरण देते हुए कहा कि तीनों भाषाओं में विभाजन की त्रासदी को कई तरह से और बहुत संजीदगी से चित्रित किया गया है।
हिंदी के प्रचार-प्रसार में फिल्मी गीतों का बड़ा योगदान
पीयू हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने गीतकार डॉ. इरशाद कामिल का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी माह के दौरान हुई परिचर्चा में बार-बार यह बात उभरकर सामने आई की हिंदी के प्रचार-प्रसार में फिल्मी गीतों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इसलिए डॉ. इरशाद कामिल जैसे लेखकों पर हमें गर्व होना चाहिए।
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डॉ. इरशाद कामिल ने कहा कि वह स्वयं भी अपने गीतों में हिंदी-उर्दू-पंजाबी भाषाओं के शब्दों का बहुत सहजता से प्रयोग करते हैं। उन्होंने हिंदी के भीष्म साहनी व यशपाल, उर्दू के मंटो और पंजाबी की अमृता प्रीतम जैसे लेखकों के उदाहरण देते हुए कहा कि तीनों भाषाओं में विभाजन की त्रासदी को कई तरह से और बहुत संजीदगी से चित्रित किया गया है।
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हिंदी के प्रचार-प्रसार में फिल्मी गीतों का बड़ा योगदान
पीयू हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने गीतकार डॉ. इरशाद कामिल का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी माह के दौरान हुई परिचर्चा में बार-बार यह बात उभरकर सामने आई की हिंदी के प्रचार-प्रसार में फिल्मी गीतों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इसलिए डॉ. इरशाद कामिल जैसे लेखकों पर हमें गर्व होना चाहिए।
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इरशाद कामिल ने सुनाईं स्वयं लिखित कविताएं और गजलें
व्याख्यान के बाद प्रश्न-उत्तर का सत्र भी हुआ, जिसमें इरशाद कामिल ने कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों की फरमाइश पर हिंदी, उर्दू और पंजाबी तीनों भाषाओं में स्वयं लिखित कविताएं, गजलें भी सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। आज के कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से शोधार्थी एवं प्राध्यापकों सहित 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान पीयू के पूर्व वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर, संगीत विभाग से प्रो. नीना ग्रोवर, विभाग से प्रो. नीरजा सूद, प्रो. सत्यपाल सहगल, संध्याकालीन विभाग से प्रो. नीरज जैन, जनसंचार विभाग से डॉ. भवनीत भट्टी, इतिहास विभाग से डॉ. प्रियतोष शर्मा, प्रो. सुखदेव सिंह मिन्हास, तिरुपति से प्रो. राम प्रकाश, मणिपुर से डॉ. ई विजयलक्ष्मी, प्रयागराज से डॉ. ज्ञानेन्द्र शुक्ल और प्रशांत मिश्रा आदि शामिल रहे।
हिंदी हैं हम...कविता लेखन के विद्यार्थियों पर बरसा धन
हिंदी विभाग की ओर से ‘हिंदी हैं हम’ कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसके विजेताओं पर सोमवार को धनवर्षा हुई। मुख्य वक्ता डॉ. इरशाद कामिल ने विजेताओं के नामों की घोषणा की। विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित विश्वविद्यालयों/ महाविद्यालयों से 117 कविताएं प्राप्त हुईं। इनमें से निर्णायक मंडल की ओर से कोलकाता विश्वविद्यालय के अभिषेक पांडेय की कविता ‘हिंदी का हो रहा सोलह श्रृंगार’ को 2000 रुपये का प्रथम पुरस्कार दिया गया।
पंजाब विश्वविद्यालय के संध्याकालीन विभाग की अंजली की कविता ‘हिंदी-सरिता’ को 1500 रुपये का द्वितीय पुरस्कार और इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के संदीप त्रिपाठी की कविता ‘ज्ञान राशि की चली हवाएं’ को 1000 रुपये का तृतीय पुरस्कार दिया गया। यह राशि विद्यार्थियों के खातों में या चेक के जरिए भेजी जाएगी। बाकी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे।
इस दौरान पीयू के पूर्व वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर, संगीत विभाग से प्रो. नीना ग्रोवर, विभाग से प्रो. नीरजा सूद, प्रो. सत्यपाल सहगल, संध्याकालीन विभाग से प्रो. नीरज जैन, जनसंचार विभाग से डॉ. भवनीत भट्टी, इतिहास विभाग से डॉ. प्रियतोष शर्मा, प्रो. सुखदेव सिंह मिन्हास, तिरुपति से प्रो. राम प्रकाश, मणिपुर से डॉ. ई विजयलक्ष्मी, प्रयागराज से डॉ. ज्ञानेन्द्र शुक्ल और प्रशांत मिश्रा आदि शामिल रहे।
हिंदी हैं हम...कविता लेखन के विद्यार्थियों पर बरसा धन
हिंदी विभाग की ओर से ‘हिंदी हैं हम’ कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसके विजेताओं पर सोमवार को धनवर्षा हुई। मुख्य वक्ता डॉ. इरशाद कामिल ने विजेताओं के नामों की घोषणा की। विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित विश्वविद्यालयों/ महाविद्यालयों से 117 कविताएं प्राप्त हुईं। इनमें से निर्णायक मंडल की ओर से कोलकाता विश्वविद्यालय के अभिषेक पांडेय की कविता ‘हिंदी का हो रहा सोलह श्रृंगार’ को 2000 रुपये का प्रथम पुरस्कार दिया गया।
पंजाब विश्वविद्यालय के संध्याकालीन विभाग की अंजली की कविता ‘हिंदी-सरिता’ को 1500 रुपये का द्वितीय पुरस्कार और इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के संदीप त्रिपाठी की कविता ‘ज्ञान राशि की चली हवाएं’ को 1000 रुपये का तृतीय पुरस्कार दिया गया। यह राशि विद्यार्थियों के खातों में या चेक के जरिए भेजी जाएगी। बाकी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे।