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पंजाब यूनिवर्सिटी की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 17 से, योजना पर शिक्षाविदों ने उठाए सवाल

अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 06 Sep 2020 02:02 AM IST
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 17 सितंबर से करवाने जा रहा है, लेकिन यह परीक्षा केवल नाम की होगी। इसमें नकल की कोई रोक-टोक नहीं है। घर बैठकर विद्यार्थी परीक्षा दे सकेंगे। उधर, परीक्षा की योजना पर शिक्षाविदों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पीयू परीक्षा पर योजना बनाने में फेल रहा है। छात्रों से अधिक जिम्मेदारों को कोरोना से अधिक खतरा था, इसलिए वह परीक्षा के नाम पर मजाक बना रहे हैं। इससे अच्छा है पीयू परीक्षा न कराए।



ऐसे ली जाएंगी परीक्षा
पेपर विद्यार्थियों की मेल पर आएगा और उसका जवाब अधिकतम 12 सीटों पर लिखकर विद्यार्थियों को पीडीएफ या स्कैन कॉपी पीयू को भेजनी होगी या वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। नोडल सेंटरों पर भी दो घंटे के अंदर विद्यार्थी यह उत्तर पुस्तिका जमा करवा सकते हैं। विद्यार्थी प्रश्नपत्र में से 50 सवालों के जवाब देंगे। मूल्यांकन की प्रक्रिया भी पांच दिन में हो जाएगी। वहीं दूसरी ओर छात्रों ने भी अड़ंगा लगा दिया है। उनका कहना है कि परीक्षा का कार्यक्रम तो पीयू तीन माह से बनाने में जुटी थी, लेकिन अचानक तय समय से पहले कैसे कार्यक्रम रख दिया। छात्रों को 21 दिन का समय तैयारी के लिए देना चाहिए था।


शिक्षक बोले- सभी को पता था सितंबर में कराने हैं पेपर तो आखिरी समय में क्यों ऐसा किया
वरिष्ठ शिक्षकों ने सवाल उठाए हैं कि तीन माह पीयू परीक्षा करवाने की तैयारी कर रहा था। इस बीच में कभी हाईकोर्ट के आदेश आए तो कभी यूजीसी के। सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश जारी किए हैं। शुरू से ही आदेश थे कि सितंबर में पेपर कराकर खत्म करने हैं तो पीयू ने उस हिसाब से प्लान क्यों नहीं बनाया। आखिरी समय में पेपर की घोषणा कर दी। अब कह रहे हैं कि पीयू के पास समय नहीं बचा था। यदि कोर्ट में केस चल रहा था तो भी प्लान बनाकर रखना चाहिए था। अधिकारी इतने दिन क्या करते रहे। पीयू के वाइस चांसलर यूजीसी की कमेटी के सदस्य भी हैं। ऐसे में उनसे तो ऐसे परीक्षा प्लान की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। क्योंकि जिन विश्वविद्यालयों का कोई वजूद नहीं था वह भी परीक्षाएं बेहतर ढंग से करवा रहे हैं।

नकल होने से होशियार विद्यार्थियों का होगा नुकसान
शिक्षकों का कहना है कि नाम की परीक्षा है, लेकिन इस परीक्षा का असर बच्चों के दिमाग पर गलत पड़ेगा। नकल होगी और होशियार विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। शिक्षकों ने तो यह भी कहा है कि पीयू की नकल दूसरे विश्वविद्यालय करते हैं, लेकिन इस बार परीक्षा को लेकर पीयू ने कोई बेहतर प्लान नहीं तैयार किया। दूसरे विश्वविद्यालयों से भी सीख लेनी चाहिए थी।

विशेषज्ञ बोले- जेईई मेन परीक्षा से पीयू ने क्यों नहीं लिया सबक

विशेषज्ञों का कहना है कि पीयू चाहता तो परीक्षा जेईई की तरह करवा सकता था। जेईई की परीक्षा में 13 लाख से अधिक विद्यार्थी ऑनलाइन परीक्षा दे रहे हैं। उनके लिए हर जगह सेंटर बनाए गए हैं। पूरी पारदर्शिता बरती गई है। ऐसा ही पीयू भी कर सकती थी। इसके लिए सेंटर बनाए जा सकते थे। दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी अपने प्रदेश की राजधानी तक आकर परीक्षा दे सकते थे। कई विश्वविद्यालय ऐसे हैं जो ऑफलाइन परीक्षा करवा रहे हैं। एनडीए से लेकर नीट तक की परीक्षाएं ऑफलाइन हो रही हैं।

क्या कहते हैं परीक्षा नियंत्रक
परीक्षा नियंत्रक प्रो. परविंदर सिंह का कहना है कि यह निर्णय एक समुचित कमेटी की ओर से लिया गया है। वर्तमान में परीक्षा ऑनलाइन ही होनी चाहिए। कई विश्वविद्यालय यह करवा रहे हैं। नकल के सवाल पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।
पीयू की ओर से छात्रों को आश्वासन दिया गया था कि परीक्षा से 21 दिन पहले वह उन्हें बताएंगे और नियम भी है कि परीक्षा से पहले छात्रों को परीक्षा के लिए समय दिया जाए लेकिन ऐसा नहीं किया गया। छात्रों के साथ धोखा किया गया।
- हरीश गुर्जर, अध्यक्ष एबीवीपी

छात्रों को नुकसान होगा
परीक्षा का कार्यक्रम तो घोषित कर दिया, लेकिन पीयू ने छात्रों को पढ़ने के लिए समय तक नहीं दिया। महज 12 दिन बचे हैं। अभी डेटशीट आना बाकी है। पीयू के इस कदम से छात्रों को नुकसान होगा।
- निखिल नरमेटा, अध्यक्ष, एनएसयूआई

परीक्षा की शुचिता ऐसे होगी कलंकित
- मेल के जरिये जाने वाले पेपर को छात्र किसी से भी हल करवा सकता है।
- समूह में एक ही कक्षा के छात्र एक जगह बैठ सकते हैं और कोई एक व्यक्ति सभी प्रश्नों का बारी-बारी से उत्तर लिखवा सकता है।
- कोई भी अच्छे शिक्षक के नोट्स छात्र रखकर बैठ सकते हैं और उनको प्रश्नों के जवाब में प्रयोग कर सकते हैं।

ये आएंगी दिक्कतें
- दूरस्थ क्षेत्रों में बैठे विद्यार्थियों के पास न नेट है और न लैपटॉप। मोबाइल भी एंड्रायड नहीं हैं। ऐसे में वह विद्यार्थी कैसे परीक्षा देंगे।
- शहर या ग्रामीण इलाकों में किसी के पास लैपटाप या डेस्कटॉप है भी तो वह लाइट या बैट्री पर निर्भर करेगा कि कितनी देर तक परीक्षा देगा।
- परीक्षा से वंचित छात्रों की अगली परीक्षा क्या ऐसी ही होगी या फिर उसका तरीका ऑफलाइन होगा। उन्हें फिर अंकों का नुकसान होगा।
- आंसर सीट सामने आने के बाद क्या छात्र को पूरे अंक मिलेंगे या फिर उसमें औसत अंक लगेंगे, यह चीजें भी साफ नहीं।

शिक्षाविद बोले- परीक्षा के नाम पर भद्दा मजाक.. इससे अच्छा होता नहीं करवाते
नॉर्थ जोन में पीयू का बड़ा नाम है, लेकिन परीक्षा का जो तरीका अपना रहा है उसमें तो वह बिल्कुल फेल हो गया। इससे अच्छा परीक्षा ही न करवाएं। प्राइवेट कोचिंग तक ऐसे सिस्टम लाकर ऑनलाइन परीक्षा करवा रहे हैं तो पीयू क्यों नहीं करवा सकती थी। यह परीक्षा के नाम पर भद्दा मजाक है। -कुणाल, शिक्षाविद

पीयू से यह उम्मीद तो बिल्कुल नहीं थी। क्या जेईई, एनडीए, नीट की परीक्षा देने वाले विद्यार्थी नहीं हैं। क्या उनको कोरोना से खतरा नहीं है जो पीयू को इतना खतरा नजर आया। मुझे तो लगता है कि छात्रों से अधिक जिम्मेदारों को कोरोना से अधिक खतरा था, इसलिए वह परीक्षा के नाम पर मजाक बना रहे हैं। परीक्षा न कराए पीयू।
सुरेंद्र प्रताप सिंह, शिक्षाविद
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