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फैसला: पंजाब यूनिवर्सिटी के शोधार्थी लाइब्रेरी से उधार ले सकते हैं किताबें, बैठने की अनुमति नहीं
Mon, 19 Oct 2020 11:48 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2020 11:48 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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पिछले हफ्ते पंजाब यूनिवर्सिटी ने शोधार्थियों को प्रयोगशाला में आने के लिए अनुमति दे दी थी। इसके बाद मुख्य एसी जोशी लाइब्रेरी के लाइब्रेरियन की पीयू प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लाइब्रेरी खोलने को लेकर बैठक की गई। बैठक में फैसला लिया गया कि अगले हफ्ते से शोधार्थी लाइब्रेरी से किताबें उधार ले सकते हैं।
एसी जोशी के लाइब्रेरियन जीवेश बंसल ने बताया कि लाइब्रेरी खोलने को लेकर अधिकारियों की ओर से बैठक बुलाई गई थी। हालांकि अभी लिखित में आदेश नहीं हुआ है। बैठक में फैसला लिया गया कि जो भी शोधार्थी पीयू आएंगे उन्हें लाइब्रेरी से किताबें उधार दी जाएंगी। लाइब्रेरी से किताबें लेने के लिए विभाग के अध्यक्ष को शोधार्थियों की लिस्ट लाइब्रेरी को देनी होगी। विभाग अध्यक्ष की तरफ से भेजे गई विद्यार्थियों की लिस्ट के अनुसार सिर्फ उन्हें ही किताबें दी जाएगी। शोधार्थियों को लाइब्रेरी में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
एसी जोशी लाइब्रेरी में 500 से अधिक विद्यार्थी बैठ सकते हैं एक साथ
एसी जोशी लाइब्रेरी में तीन फ्लोर के साथ एक बड़ा रीडिंग रूम भी है। इन सबमें मिलाकर लगभग 500 से अधिक विद्यार्थी एक साथ बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं। लाइब्रेरी में 6 लाख से ज्यादा पुस्तकों की वॉल्यूम है। इसके अलावा लाइब्रेरी में पुस्तकों, पत्रिकाओं, शोध प्रबंधों/शोध प्रबंधों, दुर्लभ पुस्तकों, रिपोर्टों, सरकारी दस्तावेजों, अखबारों की पिछली फाइलों और 1,490 पांडुलिपियों के बेशकीमती संग्रह सहित 6.4 लाख से अधिक प्रकाशनों का संग्रह है।
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एसी जोशी के लाइब्रेरियन जीवेश बंसल ने बताया कि लाइब्रेरी खोलने को लेकर अधिकारियों की ओर से बैठक बुलाई गई थी। हालांकि अभी लिखित में आदेश नहीं हुआ है। बैठक में फैसला लिया गया कि जो भी शोधार्थी पीयू आएंगे उन्हें लाइब्रेरी से किताबें उधार दी जाएंगी। लाइब्रेरी से किताबें लेने के लिए विभाग के अध्यक्ष को शोधार्थियों की लिस्ट लाइब्रेरी को देनी होगी। विभाग अध्यक्ष की तरफ से भेजे गई विद्यार्थियों की लिस्ट के अनुसार सिर्फ उन्हें ही किताबें दी जाएगी। शोधार्थियों को लाइब्रेरी में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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एसी जोशी लाइब्रेरी में 500 से अधिक विद्यार्थी बैठ सकते हैं एक साथ
एसी जोशी लाइब्रेरी में तीन फ्लोर के साथ एक बड़ा रीडिंग रूम भी है। इन सबमें मिलाकर लगभग 500 से अधिक विद्यार्थी एक साथ बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं। लाइब्रेरी में 6 लाख से ज्यादा पुस्तकों की वॉल्यूम है। इसके अलावा लाइब्रेरी में पुस्तकों, पत्रिकाओं, शोध प्रबंधों/शोध प्रबंधों, दुर्लभ पुस्तकों, रिपोर्टों, सरकारी दस्तावेजों, अखबारों की पिछली फाइलों और 1,490 पांडुलिपियों के बेशकीमती संग्रह सहित 6.4 लाख से अधिक प्रकाशनों का संग्रह है।
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क्या कहते हैं शोधार्थी
हमने मांग की थी कि लाइब्रेरी में बैठने दिया जाए। लाइब्रेरी में शोधार्थियों को सामाजिक दूरी के साथ आराम से बैठाया जा सकता है। एक टेबल पर 5 के करीब कुर्सियां लगी हैं, वहां एक विद्यार्थी को बैठने दिया जाए। इस हिसाब से एक फ्लोर पर 25 लोग आराम से सामाजिक दूरी के साथ बैठ सकते हैं। - प्रिया, शोधार्थी और पुरसा सदस्य
पंजाबी साहित्य ऑनलाइन उपलब्ध नहीं
मेरी पीएचडी सिख स्टडीज पर चल रही हैं। ऐसे में मुझे ऑनलाइन पंजाबी साहित्य पर डाटा नहीं मिलता है। बिना लाइब्रेरी के शोध कार्य नहीं हो पा रहा है। पीयू को हर वर्ष के शोधार्थी को लाइब्रेरी की अनुमति देनी चाहिए। हमें एक लाइन लिखने के लिए भी कम से कम एक किताब की जरूरत पड़ती है, ऐसे में बिना लाइब्रेरी के हम कैसे काम करें । - परमिंदर सिंह, पीएचडी, दूसरा वर्ष
शोध के लिए पुरानी किताबें लाइब्रेरी में ही उपलब्ध
मेरी पीएचडी हिंदी से चल रही है। हमें शोध लिखने के दौरान बहुत सारी किताबों की जरूरत पड़ती है। किताबों के साथ कई बार शब्दावली की भी जरूरत पड़ती है। ऐसे में ऑनलाइन डिक्शनरी 3 से 5 हजार की मिलती है। हर कोई शोधार्थी सारी डिक्शनरी और किताबें नहीं खरीद सकता। वहीं बहुत सारी पुरानी किताबों की जरूरत पड़ती है जो कि बाजार में भी उपलब्ध नहीं होती।
- हैप्पी, शोधकर्ता, तृतीय वर्ष
प्रशासन का अजीब फैसला
पीयू प्रशासन से लाइब्रेरी खोलने के लिए मांग की थी। इन्होंने हमारी मांग बदलकर लाइब्रेरी से किताबें उधार लेने पर फैसला दिया है। हर शोधार्थी को किताबों की जरूरत पड़ती है। लेकिन प्रशासन के फैसले बड़े अजीब हैं। पहले विभाग से इजाजत लेने के लिए जाना पड़ेगा, उसके बाद वो लिस्ट देंगे, तभी किताब मिल पाएगी। - संदीप, शोधार्थी और पुरसा सदस्य
पंजाबी साहित्य ऑनलाइन उपलब्ध नहीं
मेरी पीएचडी सिख स्टडीज पर चल रही हैं। ऐसे में मुझे ऑनलाइन पंजाबी साहित्य पर डाटा नहीं मिलता है। बिना लाइब्रेरी के शोध कार्य नहीं हो पा रहा है। पीयू को हर वर्ष के शोधार्थी को लाइब्रेरी की अनुमति देनी चाहिए। हमें एक लाइन लिखने के लिए भी कम से कम एक किताब की जरूरत पड़ती है, ऐसे में बिना लाइब्रेरी के हम कैसे काम करें । - परमिंदर सिंह, पीएचडी, दूसरा वर्ष
शोध के लिए पुरानी किताबें लाइब्रेरी में ही उपलब्ध
मेरी पीएचडी हिंदी से चल रही है। हमें शोध लिखने के दौरान बहुत सारी किताबों की जरूरत पड़ती है। किताबों के साथ कई बार शब्दावली की भी जरूरत पड़ती है। ऐसे में ऑनलाइन डिक्शनरी 3 से 5 हजार की मिलती है। हर कोई शोधार्थी सारी डिक्शनरी और किताबें नहीं खरीद सकता। वहीं बहुत सारी पुरानी किताबों की जरूरत पड़ती है जो कि बाजार में भी उपलब्ध नहीं होती।
- हैप्पी, शोधकर्ता, तृतीय वर्ष
प्रशासन का अजीब फैसला
पीयू प्रशासन से लाइब्रेरी खोलने के लिए मांग की थी। इन्होंने हमारी मांग बदलकर लाइब्रेरी से किताबें उधार लेने पर फैसला दिया है। हर शोधार्थी को किताबों की जरूरत पड़ती है। लेकिन प्रशासन के फैसले बड़े अजीब हैं। पहले विभाग से इजाजत लेने के लिए जाना पड़ेगा, उसके बाद वो लिस्ट देंगे, तभी किताब मिल पाएगी। - संदीप, शोधार्थी और पुरसा सदस्य