फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   punjab university could not set up biogas plant in one year, no place in sanitation ranking

पंजाब यूनिवर्सिटी एक साल में नई लगा पाई बायोगैस प्लांट, तो नहीं मिली स्वच्छता रैंकिंग से जगह

Thu, 05 Dec 2019 02:38 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 05 Dec 2019 02:38 PM IST
विज्ञापन
punjab university could not set up biogas plant in one year, no place in sanitation ranking
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
पंजाब विश्वविद्यालय ब्यूटीफिकेशन से लेकर तमाम कार्यों पर करोड़ों खर्च कर चुका, लेकिन स्वच्छता रैंकिंग में आगे आने के लिए एक बायोगैस प्लांट नहीं लगा पाया। एक साल से फाइल अफसरों के पास घूम रही है, अब जाकर प्रस्ताव पास हुआ है। हालांकि, मशीन अभी भी स्थापित नहीं हो पाई है।
विज्ञापन


यही कारण रहा कि इस बार भी स्वच्छता रैंकिंग में पीयू पिछड़ गया, कहीं भी जगह नहीं बना पाया। पंजाब विश्वविद्यालय ने पिछली स्वच्छता रैंकिंग में भी इसी तरह का प्रदर्शन किया था और इस बार भी। कोई परिवर्तन नहीं हुआ। यानी एक साल में पीयू ने स्वच्छता को लेकर कोई खास कार्य नहीं किया।
विज्ञापन


हालांकि, गीले व सूखे कूड़े के लिए अलग-अलग कूड़ेदान अवश्य लगाए। सबसे हैरत की बात यह है कि वीसी प्रो. राजकुमार समय-समय पर विभाग अध्यक्षों समेत कई अधिकारियों की बैठक लेते रहे और उन्होंने स्वच्छता रैंकिंग में बाजी मारने को कहा। उसके लिए पैरामीटर्स की पूर्ति के लिए कहा, लेकिन इस निर्देश पर कार्य नहीं हो पाया और नतीजा सभी के सामने है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विभागों में साफ-सफाई का आलम अधिक अच्छा नहीं मिला। इसके अलावा हॉस्टल मेस में चिमनी आदि लगाई जानी थी, लेकिन यह भी कार्य नहीं हो पाया। किचन भी ऑटोमेटिड होना चाहिए था, लेकिन यह मानक भी पीयू पूरा नहीं कर पाया।

पर्यावरण से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि स्वच्छता के लिए कई बार बैठकें हुईं, पैसे भी खर्च किए गए, लेकिन परिणाम जस का तस रहा। पीयू शिक्षा का मंदिर है। यहां से स्वच्छता का संदेश हर जगह जाना चाहिए लेकिन पीयू खुद ही स्वच्छ नहीं रह पाया।

यहां पैसे लगाने की क्या जल्दी थी
पीयू ने गेट नंबर एक के पास ब्यूटीफिकेशन के नाम पर ईंटों से दो बड़े चबूतरे बना दिए। इनका सदुपयोग नहीं हो रहा है। इसके अलावा पूरे ब्यूटीफिकेशन पर 90 लाख रुपये का प्रोजेक्ट तैयार हुआ। इसमें कुछ रकम खर्च हुई, लेकिन बाद में इस पर रोक लगा दी। जानकारों का कहना है कि आखिर ऐसे ब्यूटीफिकेशन की जरूरत क्या थी। सबसे पहले पैसे बायोगैस प्लांट पर खर्च किए जाने चाहिए थे और पीयू के जिम्मेदार लोगों का ध्यान इसी पर होना चाहिए था ताकि पीयू का स्वच्छता में नाम होता लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।


बायोगैस प्लांट पीयू में नहीं लग पाया, इसलिए हमें कम अंक मिले हैं। प्लांट स्थापना की फाइल पास हो गई है, मशीन आने वाली है। जल्द ही यह कार्य पूरा हो जाएगा। मेस में चिमनी इसलिए नहीं लगाई गई कि भवनों की आकृति से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। अगली स्वच्छता रैंकिंग में हम आगे आएं, इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।
- डॉ. शिवानी शर्मा, को-ऑर्डिनेटर, स्वच्छ भारत अभियान पीयू
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed