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चंडीगढ़ वाले केंद्र के सामने रखेंगे निजी स्कूलों की मनमानी
ब्यूरो, अमर उजाला/ चंडीगढ़
Updated Tue, 12 Apr 2016 12:08 PM IST
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शहर के प्राइवेट स्कूलों की ओर से अभिभावकों को निजी पब्लिशर्स की किताबें और चुनिंदा दुकानों से स्कूल ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर करने का मामला अब केंद्र सरकार के अधिकारियों तक पहुंच गया है। पूरे मामले को चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मंगलवार को केंद्रीय मानव एवं विकास संसाधन मंत्रालय (एमएचआरडी) के सामने रखेंगे।
सूत्रों के अनुसार मंगलवार को डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन रूबिंदरजीत सिंह बराड़, डिप्टी डायरेक्टर स्कूल चंचल सिंह की एमएचआरडी अधिकारियों के साथ दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। इस दौरान निजी स्कूलों की मनमानी पर कार्रवाई के लिए मांग की जाएगी। बैठक में सीबीएसई के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
कई प्राइवेट स्कूलों द्वारा उनके स्कूल कैंपस से ही किताबें, ड्रेस खरीदने की बाध्यता से परेशान कई अभिभावकों ने शिक्षा सचिव, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन सहित अन्य अधिकारियों को लिखित और व्हाट्सअप पर शिकायतें भेजी हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी नियमों की दुहाई देते हुए दोषी स्कूलों पर कार्रवाई से बच रहे हैं। लेकिन अभिभावकों के बढ़ते रोष के बाद अब विभाग ने पूरे मामले को एमएचआरडी मंत्रालय के सामने उठाने और स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग का फैसला किया है। पूरे मामले में अब सीबीएसई के माध्यम से दोषी स्कूलों की मान्यता रद्द करवाने की तैयारी है।
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मामले को लेकर सोमवार को शिक्षा विभाग के आला अधिकारी दिन भर एमएचआरडी में पेश की जाने वाली रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में अभिभावकों द्वारा दी गई शिकायत में स्कूलों के नाम भी शामिल हैं। रिपोर्ट में अभिभावकों की ओर से अधिकारियों को भेजे लिखित और चिट्ठी दोनों शामिल हैं।
तीन साल में भी जस्टिस मोंगिया कमिशन की रिपोर्ट नहीं हो सकी पेश
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस स्ट्रक्चर की जांच के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जस्टिस आरएस मोंगिया की अध्यक्षता में कमिशन गठित किया था। लेकिन तीन साल बाद भी कमिशन ने स्कूलों के जांच की रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा नहीं कराई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार कमिशन की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्कूलों की महंगी फीस अन्य चीजों को लेकर विभाग आगे की कार्रवाई कर सकेगा। रिपोर्ट के बारे में अधिकारियों का कहना है कि मौखिक तौर पर जस्टिस मोंगिया ने रिपोर्ट तैयार होने की बात कही है, लेकिन अब तक इसे हाईकोर्ट को नहीं सौंपा गया है। स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए शिक्षा विभाग एक स्थायी रेगुलेटरी कमिशन बनाने पर भी विचार कर रहा है।
क्या है मामला
300 रुपये की बुक सेट 4 से 5 हजार में बिक रहा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी किताबें सिलेबस में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में सीबीएसई को 4 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट जमा करनी है। हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद शहर के अधिकतर निजी स्कूल अब भी प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों को सिलेबस में शामिल कर रहे हैं। एनसीईआरटी की किताबों के जो सेट 300 रुपये में उपलब्ध हैं, निजी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स को फायदा पहुंचाने के लिए 4 से 8 क्लास का बुक सेट 4 से 5 हजार में खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। कई स्कूल तो अपने कैंपस में ही खुद किताबें, ड्रेस और स्कूल का अन्य सामान मनमाने दामों पर बेच रहे हैं।
शिक्षा विभाग का सर्कुलर बेअसर
किसी एक दुकान से किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर करने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने दो साल पहले सर्कुलर जारी किया था। अभिभावक किसी भी दुकान से बच्चों से जुड़ा सामान खरीद सकते हैं। लेकिन विभाग के आदेशों का प्राइवेट स्कूल सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
कोट्स ...
निजी स्कूलों के खिलाफ मेरे पास 7-8 लिखित और 3-4 व्हाट्सअप पर शिकायतें मिली हैं। शिक्षा विभाग के पास ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई प्रोविजन नहीं है। लेकिन विभाग मंगलवार को एमएचआरडी के अधिकारियों के साथ होने वाली मीटिंग में इस मुद्दे को उठाएगा। इस मामले में सीबीएसई को कार्रवाई करनी चाहिए।
- रूबिंदरजीत सिंह बराड़, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन चंडीगढ़।
पेरेंट्स को किताबें या ड्रेस खरीदने के लिए कोई भी निजी स्कूल मजबूर नहीं कर सकते। जिन स्कूलों के खिलाफ ऐसी शिकायतें आएंगी, उन पर सीबीएसई नियमों के तहत कार्रवाई करेगा।
-आरके खांडेराव, डायरेक्टर सीबीएसई रीजनल सेंटर पंचकूला।
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सूत्रों के अनुसार मंगलवार को डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन रूबिंदरजीत सिंह बराड़, डिप्टी डायरेक्टर स्कूल चंचल सिंह की एमएचआरडी अधिकारियों के साथ दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। इस दौरान निजी स्कूलों की मनमानी पर कार्रवाई के लिए मांग की जाएगी। बैठक में सीबीएसई के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
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कई प्राइवेट स्कूलों द्वारा उनके स्कूल कैंपस से ही किताबें, ड्रेस खरीदने की बाध्यता से परेशान कई अभिभावकों ने शिक्षा सचिव, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन सहित अन्य अधिकारियों को लिखित और व्हाट्सअप पर शिकायतें भेजी हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी नियमों की दुहाई देते हुए दोषी स्कूलों पर कार्रवाई से बच रहे हैं। लेकिन अभिभावकों के बढ़ते रोष के बाद अब विभाग ने पूरे मामले को एमएचआरडी मंत्रालय के सामने उठाने और स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग का फैसला किया है। पूरे मामले में अब सीबीएसई के माध्यम से दोषी स्कूलों की मान्यता रद्द करवाने की तैयारी है।
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मामले को लेकर सोमवार को शिक्षा विभाग के आला अधिकारी दिन भर एमएचआरडी में पेश की जाने वाली रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में अभिभावकों द्वारा दी गई शिकायत में स्कूलों के नाम भी शामिल हैं। रिपोर्ट में अभिभावकों की ओर से अधिकारियों को भेजे लिखित और चिट्ठी दोनों शामिल हैं।
तीन साल में भी जस्टिस मोंगिया कमिशन की रिपोर्ट नहीं हो सकी पेश
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस स्ट्रक्चर की जांच के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जस्टिस आरएस मोंगिया की अध्यक्षता में कमिशन गठित किया था। लेकिन तीन साल बाद भी कमिशन ने स्कूलों के जांच की रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा नहीं कराई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार कमिशन की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्कूलों की महंगी फीस अन्य चीजों को लेकर विभाग आगे की कार्रवाई कर सकेगा। रिपोर्ट के बारे में अधिकारियों का कहना है कि मौखिक तौर पर जस्टिस मोंगिया ने रिपोर्ट तैयार होने की बात कही है, लेकिन अब तक इसे हाईकोर्ट को नहीं सौंपा गया है। स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए शिक्षा विभाग एक स्थायी रेगुलेटरी कमिशन बनाने पर भी विचार कर रहा है।
क्या है मामला
300 रुपये की बुक सेट 4 से 5 हजार में बिक रहा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी किताबें सिलेबस में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में सीबीएसई को 4 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट जमा करनी है। हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद शहर के अधिकतर निजी स्कूल अब भी प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों को सिलेबस में शामिल कर रहे हैं। एनसीईआरटी की किताबों के जो सेट 300 रुपये में उपलब्ध हैं, निजी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स को फायदा पहुंचाने के लिए 4 से 8 क्लास का बुक सेट 4 से 5 हजार में खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। कई स्कूल तो अपने कैंपस में ही खुद किताबें, ड्रेस और स्कूल का अन्य सामान मनमाने दामों पर बेच रहे हैं।
शिक्षा विभाग का सर्कुलर बेअसर
किसी एक दुकान से किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर करने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने दो साल पहले सर्कुलर जारी किया था। अभिभावक किसी भी दुकान से बच्चों से जुड़ा सामान खरीद सकते हैं। लेकिन विभाग के आदेशों का प्राइवेट स्कूल सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
कोट्स ...
निजी स्कूलों के खिलाफ मेरे पास 7-8 लिखित और 3-4 व्हाट्सअप पर शिकायतें मिली हैं। शिक्षा विभाग के पास ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई प्रोविजन नहीं है। लेकिन विभाग मंगलवार को एमएचआरडी के अधिकारियों के साथ होने वाली मीटिंग में इस मुद्दे को उठाएगा। इस मामले में सीबीएसई को कार्रवाई करनी चाहिए।
- रूबिंदरजीत सिंह बराड़, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन चंडीगढ़।
पेरेंट्स को किताबें या ड्रेस खरीदने के लिए कोई भी निजी स्कूल मजबूर नहीं कर सकते। जिन स्कूलों के खिलाफ ऐसी शिकायतें आएंगी, उन पर सीबीएसई नियमों के तहत कार्रवाई करेगा।
-आरके खांडेराव, डायरेक्टर सीबीएसई रीजनल सेंटर पंचकूला।