पंजाब यूनिवर्सिटी में इंटरनल एग्जाम लेने की तैयारी, छात्र बोले- पूरा सिलेबस आया तो होगा नुकसान

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 20 May 2020 11:18 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
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पंजाब यूनिवर्सिटी की कई कक्षाओं के हजारों छात्रों का इंटरनल एग्जाम लेने की तैयारी चल रही है। तमाम शिक्षक इस पेपर के लिए पूरे सिलेबस से प्रश्न या अन्य कार्य छात्रों को सौंप रहे हैं। पीयू के छात्रों का कहना है कि 20 मार्च तक जितना पढ़ाया गया उतने में से ही इंटरनल एग्जाम लिए जाएं। अगर पूरे सिलेबस से एग्जाम लिया गया तो नुकसान होगा, क्योंकि 20 मार्च तक ही कक्षाएं लगी थीं और उसके बाद ऑनलाइन कक्षाएं चलीं, लेकिन ये कारगर साबित नहीं हुई हैं।
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20 से लेकर 30 अंक के होते हैं इंटरनल एग्जाम
पीयू इस समय सेमेस्टर एग्जाम करवाता है, लेकिन लॉकडाउन के चलते यह परीक्षाएं समय पर नहीं हो पा रही हैं। इंटरनल पेपर भी अभी तक तमाम कक्षाओं में नहीं हो पाए हैं। इंटरनल एग्जाम 20 से लेकर 30 अंक तक के होते हैं। यह अंक छात्रों की मेरिट बनाने में बड़े सहयोगी होते हैं। ऐसे में छात्र मेहनत कर यह पेपर देते हैं।
इसकी बाकायदा तैयारी होती है और इस एग्जाम में वही पूछा जाता है जितना विद्यार्थियों को पढ़ाया गया है। कुछ कक्षाओं में तो छात्रों को अलग-अलग टॉपिक दे दिया जाता है, उसी पर 10 से 15 मिनट की प्रजेंटेशन देनी होती है। कुछ में फाइल वर्क या अन्य कार्य दे दिया जाता है। इस समय पीयू में गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं। इसी बीच पीयू इंटरनल एग्जाम पूरा करना चाहता है।

इस बार इंटरनल एग्जाम बेहद महत्वपूर्ण..
सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन लंबा चला और यूनिवर्सिटी खोलने की अनुमति नहीं दी गई तो इसी इंटरनल के आधार पर विद्यार्थियों को अगली कक्षाओं में प्रमोट किया जा सकता है। इसलिए यह एग्जाम विद्यार्थियों का भविष्य बनाने में सहायक होगा। इस एग्जाम को विद्यार्थी सेमेस्टर एग्जाम की तरह ही ले रहे हैं।

विद्यार्थियों को इसलिए सता रहा डर
पीयू के कई विभागों ने इंटरनल एग्जाम लेने की तैयारी शुरू कर दी। कुछ छात्रों को कार्य सौंप भी दिया। कुछ को टॉपिक मिले हैं जिन पर प्रजेंटेशन देनी होगी। छात्रों का कहना है कि इंटरनल में पूरा सिलेबस देने की बात सामने आई है। साथ ही तीन-तीन घंटे का पेपर भी लेने की तैयारी है।

ऐसे में विद्यार्थियों को नुकसान होगा, क्योंकि न तो विद्यार्थियों को विषयों की किताबें मिल पाई हैं और न ही अन्य सुविधाएं मिलीं। उनका तर्क है कि 20 मार्च तक कक्षाएं लगी हैं, उस दौरान तक जितना पढ़ाया गया है वही परीक्षा में पूछा जाना चाहिए। क्योंकि यदि सिलेबस पूरा आया तो विद्यार्थियों के इंटरनल में कम अंक मिलेंगे और इससे उनका भविष्य प्रभावित होगा।
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