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पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज को बड़ी सफलता, विदेशों में काम कर रहे 24 हजार वैज्ञानिक/प्रोफेसर ढूंढ निकाले

Tue, 02 Mar 2021 02:49 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 02 Mar 2021 02:49 AM IST
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Punjab engineering college discovered 24 thousand professor/scientist working in foreign countries
पेक के डॉ. राजेश भाटिया को दिल्ली में सम्मानित किया गया। - फोटो : अमर उजाला

चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) को बड़ी सफलता मिली है। पेक की टीम ने विदेशों में काम कर रहे 24 हजार प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों व शोधार्थियों को खोजा है। इनकी खोज के लिए पेक की टीम ने उपनाम, भारतीय विश्वविद्यालय व इंस्टीट्यूट के नाम प्रोजेक्ट में शामिल किए थे। 

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रविवार को इन सभी आंकड़ों को भारत सरकार ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर जारी किया। साथ ही इस प्रोजेक्ट को आगे भी जारी रखने की अनुमति दे दी। इस दौरान पेक के प्रोफेसर राजेश भाटिया को विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सम्मानित किया। उन्हीं की निगरानी में टीम ने यह सफलता हासिल की।

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इस तरह शुरू हुआ अध्ययन
2015 में पेक के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. राजेश भाटिया ने एक प्रस्ताव तैयार किया और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली को भेजा। प्रस्ताव था कि वह विदेशों में काम करने वाले प्रोफेसर, वैज्ञानिकों का डाटाबेस तैयार करेंगे। यह डाटा आज तक सरकार ने जुटाना उचित नहीं समझा था। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई और इस पर काम शुरू कर दिया गया। सबसे पहले इस टीम ने देश के आठ हजार उपनाम निकाले और उसका कार्यक्रम तैयार कर तकनीक विकसित की। इस तकनीक के जरिए काफी लोगों का पता लग गया। 

प्रथम चरण में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूके, कनाडा में काम कर रहे लोगों को खोजा गया। इस टीम ने उपनाम के जरिए आए नामों को पर्याप्त नहीं माना, क्योंकि केरल, तमिलनाडु आदि प्रदेशों में लोग किसी दूसरे संप्रदायों से हैं तो उनका पता नहीं लग पा रहा था। उसके बाद इस टीम ने एक और तकनीक विकसित की। इस तकनीक को विश्वविद्यालयों के नाम व इंस्टीट्यूट के जरिए पारंगत किया गया और इसके जरिए भी काफी लोग खोज निकाले गए। भारतीय शहरों के नाम से भी लोगों का पता लगाया गया।
 

चार देशों के आंकड़े पहले तैयार किए गए
अमेरिका में लगभग 16 हजार भारतीय प्रोफेसर व वैज्ञानिक सेवाएं दे रहे हैं। कनाडा में 13 फीसदी, ऑस्ट्रेलिया में पांच फीसदी व यूके में 14 फीसदी लोग काम कर रहे हैं। ये सभी लोग अपने देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं। इन देशों में 3462 शोधार्थी हैं जो भारतीय हैं। सबसे अधिक वैज्ञानिक, प्रोफेसर मेडिकल हेल्थ साइंस, इंजीनियरिंग में शिक्षा दे रहे हैं।

सामाजिक विज्ञान के जरिए भी काफी प्रोफेसर विदेशों में नौकरी कर रहे हैं। मालूम हो कि 2016 में पीएमओ ने पेक की टीम को शोधार्थियों के आंकड़े भी पता लगाने के लिए कहा था। उसके बाद इस पर भी काम किया गया। अब यह टीम ब्रिक्स देशों यानी ब्राजील, रूस, चीन, साउथ अफ्रीका में काम कर रहे भारतीय प्रोफेसर व वैज्ञानिकों के आंकड़े जुटाएगी। 
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