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विद्यार्थियों ने नहीं दिखाई रुचि, पेक ने बंद किया एमटेक इंडस्ट्रियल डिजाइन कोर्स, सत्र भी शून्य घोषित
Sat, 03 Oct 2020 03:10 PM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 03 Oct 2020 03:10 PM IST
सार
- वर्ष 2017 में हुआ था संचालन, शुरुआत में 15 और 2018-19 में तीन छात्रों ने लिया दाखिला
- वर्ष 2019-20 व 2020-21 सत्र विद्यार्थियों के न आने के कारण शून्य घोषित हो गया
- पेक की सीनेट ने इस कोर्स को बंद करने के लिए लगाई मुहर, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स लेगा फाइनल निर्णय
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) में एमटेक इंडस्ट्रियल डिजाइन कोर्स बंद हो गया है। इस पर पेक की सीनेट ने मुहर लगा दी है। अब यह प्रस्ताव बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के पास जाएगा। माना जा रहा है कि इस कोर्स का अब दोबारा संचालन मुश्किल है। कोर्स के बंद होने का एक प्रमुख कारण यह निकलकर आ रहा है कि इसका प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। छात्रों को इसके भविष्य के बारे में जानकारी नहीं दी गई। यदि विद्यार्थियों तक जानकारी पहुंचती तो शायद आज यह कोर्स बंद नहीं होता।
ऐसे खड़ा हुआ विभाग
पेक ने एमटेक इंडस्ट्रियल डिजाइन कोर्स का शुभारंभ वर्ष 2017-18 में किया था। इस कोर्स की शुरुआत सही रही। 18 सीटों में से 15 सीटों पर दाखिले हुए। कोर्स की दो साल की फीस 3.03 लाख रुपये रखी गई। स्नातक के बाद इस कोर्स में विद्यार्थियों को एडमिशन लेना था। शुरुआत ठीक होने के बाद अगले साल वर्ष 2018-19 में इस कोर्स में महज तीन ही छात्रों ने एडमिशन के लिए अप्लाई किया।
इसके कारण कोर्स का संचालन मुश्किल हो गया। शर्त थी कि कम से कम 50 फीसदी सीटें भरने पर ही कोर्स संचालित किया जा सकता है। इससे बुरा हाल अगले वर्षों में हो गया। वर्ष 2019-20 में एक भी छात्र ने एडमिशन के लिए आवेदन नहीं किया। चालू सत्र 2020-21 में दाखिले के लिए फिर पेक ने कोशिश की, लेकिन इसके लिए भी आवेदन पेक को नहीं मिले। तीन साल से लगातार इस कोर्स में छात्रों की रुचि न होने के कारण पेक को इस कोर्स को बंद करने का निर्णय लिया और सीनेट के सामने इस हकीकत को रखा।
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सूत्रों का कहना है कि आंकड़ों को देखते हुए सीनेट ने इस कोर्स को बंद करने पर सहमति दे दी। इस पर फाइनल निर्णय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से लिया जाना है। सूत्रों का कहना है कि यह पेक का उच्च सदन है। सीनेट के अधिकांश प्रस्तावों पर यह सदन मुहर लगाता है। माना जा रहा है कि अब यह कोर्स पेक में संचालित नहीं होगा।
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ऐसे खड़ा हुआ विभाग
पेक ने एमटेक इंडस्ट्रियल डिजाइन कोर्स का शुभारंभ वर्ष 2017-18 में किया था। इस कोर्स की शुरुआत सही रही। 18 सीटों में से 15 सीटों पर दाखिले हुए। कोर्स की दो साल की फीस 3.03 लाख रुपये रखी गई। स्नातक के बाद इस कोर्स में विद्यार्थियों को एडमिशन लेना था। शुरुआत ठीक होने के बाद अगले साल वर्ष 2018-19 में इस कोर्स में महज तीन ही छात्रों ने एडमिशन के लिए अप्लाई किया।
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इसके कारण कोर्स का संचालन मुश्किल हो गया। शर्त थी कि कम से कम 50 फीसदी सीटें भरने पर ही कोर्स संचालित किया जा सकता है। इससे बुरा हाल अगले वर्षों में हो गया। वर्ष 2019-20 में एक भी छात्र ने एडमिशन के लिए आवेदन नहीं किया। चालू सत्र 2020-21 में दाखिले के लिए फिर पेक ने कोशिश की, लेकिन इसके लिए भी आवेदन पेक को नहीं मिले। तीन साल से लगातार इस कोर्स में छात्रों की रुचि न होने के कारण पेक को इस कोर्स को बंद करने का निर्णय लिया और सीनेट के सामने इस हकीकत को रखा।
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सूत्रों का कहना है कि आंकड़ों को देखते हुए सीनेट ने इस कोर्स को बंद करने पर सहमति दे दी। इस पर फाइनल निर्णय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से लिया जाना है। सूत्रों का कहना है कि यह पेक का उच्च सदन है। सीनेट के अधिकांश प्रस्तावों पर यह सदन मुहर लगाता है। माना जा रहा है कि अब यह कोर्स पेक में संचालित नहीं होगा।
इसलिए फ्लॉप हुआ कोर्स
- कोर्स संचालन से पहले पेक को एक सर्वे करना चाहिए था। विद्यार्थियों की रुचि भी देखी जानी चाहिए थी।
- कोर्स का प्रचार-प्रसार होना चाहिए था। इसके लिए ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यमों का प्रयोग होना था।
- विद्यार्थियों को यह बताना था कि डिजाइन का बाजार बहुत बड़ा है। प्लेसमेंट भी अच्छा है।
- यह बताया जाता कि प्रतिस्पर्धा इस क्षेत्र में कम होने के कारण नौकरी आसानी से मिलती है।
- सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को इस कोर्स के फायदों के बारे में बताना चाहिए था।
- सरकारी सिस्टम है। प्रचार-प्रसार करने में आनाकानी की गई और उसका हश्र सामने है। निजी कॉलेज होता तो यह कोर्स दौड़ रहा होता।
उत्पाद बेहतर बनाने की कला पढ़ाया जाता है कोर्स में
एक उत्पाद को बेहतर बनाने के लिए जो कला लागू होती है उसके बारे में इस कोर्स में पढ़ाया जाता है। कला और विज्ञान का मिश्रण करते हुए विद्यार्थी बाजार और ग्राहक दोनों के लिए फायदेमंद उत्पाद डिजाइन तैयार करता है। डिजाइन हर उत्पाद को चाहिए। हर उद्योग को चाहिए, यानी इसका क्षेत्र विस्तृत है। क्योंकि बिना डिजाइन के न उद्योग आगे बढ़ सकते और न वह ग्राहकों की पसंद बन सकते। ऐसे में यह कोर्स अपने में बहुत महत्व रखता है। मुंबई, बंगलुरू, हरियाणा, गुजरात समेत कई प्रदेशों के शिक्षण संस्थानों में यह कोर्स दौड़ रहा है। शुरुआत में प्लेसमेंट का पैकेज छह लाख सालाना रहता है।
- कोर्स का प्रचार-प्रसार होना चाहिए था। इसके लिए ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यमों का प्रयोग होना था।
- विद्यार्थियों को यह बताना था कि डिजाइन का बाजार बहुत बड़ा है। प्लेसमेंट भी अच्छा है।
- यह बताया जाता कि प्रतिस्पर्धा इस क्षेत्र में कम होने के कारण नौकरी आसानी से मिलती है।
- सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को इस कोर्स के फायदों के बारे में बताना चाहिए था।
- सरकारी सिस्टम है। प्रचार-प्रसार करने में आनाकानी की गई और उसका हश्र सामने है। निजी कॉलेज होता तो यह कोर्स दौड़ रहा होता।
उत्पाद बेहतर बनाने की कला पढ़ाया जाता है कोर्स में
एक उत्पाद को बेहतर बनाने के लिए जो कला लागू होती है उसके बारे में इस कोर्स में पढ़ाया जाता है। कला और विज्ञान का मिश्रण करते हुए विद्यार्थी बाजार और ग्राहक दोनों के लिए फायदेमंद उत्पाद डिजाइन तैयार करता है। डिजाइन हर उत्पाद को चाहिए। हर उद्योग को चाहिए, यानी इसका क्षेत्र विस्तृत है। क्योंकि बिना डिजाइन के न उद्योग आगे बढ़ सकते और न वह ग्राहकों की पसंद बन सकते। ऐसे में यह कोर्स अपने में बहुत महत्व रखता है। मुंबई, बंगलुरू, हरियाणा, गुजरात समेत कई प्रदेशों के शिक्षण संस्थानों में यह कोर्स दौड़ रहा है। शुरुआत में प्लेसमेंट का पैकेज छह लाख सालाना रहता है।
यहां खुले हैं नौकरी के रास्ते
- किसी भी उद्योग में डिजाइनर का पद मिल सकता है।
- औद्योगिक डिजाइन इंजीनियर बना जा सकता है।
- मॉडलिंग, परीक्षण और उत्पादन मेें इसके प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होती है।
- अनुसंधान के संचालन में परियोजना डिजाइन करनी होती है। वहां इसके प्रशिक्षित चाहिए।
- किसी भी शिक्षण संस्थानों में व्याख्याता बना जा सकता है।
- कंपनियों में बिजनेस डायरेक्टर, प्रोजेक्ट मैनेजर, लेक्चरर आदि की नियुक्तियां इन्हीं विद्यार्थियों से होती है।
- औद्योगिक डिजाइन इंजीनियर बना जा सकता है।
- मॉडलिंग, परीक्षण और उत्पादन मेें इसके प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होती है।
- अनुसंधान के संचालन में परियोजना डिजाइन करनी होती है। वहां इसके प्रशिक्षित चाहिए।
- किसी भी शिक्षण संस्थानों में व्याख्याता बना जा सकता है।
- कंपनियों में बिजनेस डायरेक्टर, प्रोजेक्ट मैनेजर, लेक्चरर आदि की नियुक्तियां इन्हीं विद्यार्थियों से होती है।